पाकिस्तान की कमर तोड़ने के लिए भारत उठाएगा एक और बड़ा कदम, नितिन गडकरी ने बताया क्या है अगला प्लान / पाकिस्तान की कमर तोड़ने के लिए भारत उठाएगा एक और बड़ा कदम, नितिन गडकरी ने बताया क्या है अगला प्लान

आतंक के खेती करने वाले पाकिस्तान पर पड़ेगी एक और मार

Dainikbhaskar.com

Feb 21, 2019, 05:19 PM IST
Bagpat UP news in hindi:  Nitin Gadkari hints that india may hold water supply to pakistan over Pulwama Attack

बागपत (उत्तर प्रदेश). पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया है कि भारत आने वाले दिनों में पाकिस्तान का पानी रोक सकता है। उनके मुताबिक, तीन नदियों के अधिकार का पानी प्रोजेक्ट बनाकर पाकिस्तान की बजाय यमुना में छोड़ा जाएगा। बता दें कि व्यास, रावी और सतलज नदियों का पानी भारत से होकर पाकिस्तान पहुंचता है। मतलब, आतंक की खेती करने वाले पाकिस्तान में सूखा पड़ जाएगा। वो अब बूंद-बूंद को तरसेगा।

ये है भारत का अगला प्लान

गडकरी ने कहा है कि सरकार सड़कों के साथ-साथ जलमार्ग पर काम कर रही है। पानी की कमी न रहे इसलिए भारत के अधिकार वाली तीनों नदियों का पानी जो पाकिस्तान जाता है, उसे मोड़कर यमुना में लाया जाएगा। हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोग दिल्ली से आगरा जलमार्ग से जा सकेंगे। इसीलिए बागपत में यमुना किनारे रिवर पोर्ट भी तैयार कराया जाएगा। पोर्ट से चीनबांग्लादेश और म्यांमार तक भेजी जाएगी। इसमें खर्च कम होगा।

केंद्रीय मंत्री बुधवार को बालैनी स्थित श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज में मेरठ बाईपास से हरियाणा बॉर्डर तक डबल लेन हाईवे और बागपत में यमुना के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का शिलान्यास करने आए थे। गौरतलब है कि पुलवामा अटैक के बाद सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान को मिलने वाले पानी पर रोक लगाने की मांग की जा रही है।

क्‍या है सिंधु जल संधि?


भारत और पाकिस्‍तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्‍ताक्षर 19 सितंबर 1960 को हुआ था। भारत की ओर से प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति अयूब खान ने इस समझौते पर हस्‍ताक्षर किए थे। दोनों देशों के बीच यह संधि विश्‍व बैंक के हस्‍तक्षेप से हुई थी। इस समझौते के तहत सिंधु नदी घाटी की नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में बांटा गया। समझौते के मुताबिक झेलम और चेनाब नदियों (पश्चिमी नदियों) के पानी को पाकिस्तान के लिए दिया गया, जबकि रावी, ब्यास और सतलज नदियों (पूर्वी नदियों) का पानी भारत के लिए तय किया गया।

समझौते के तहत भारत को बिजली बनाने और कृषि कार्यों के लिए पश्चिमी नदियों के पानी के इस्तेमाल का भी कुछ सीमित अधिकार दिया। दोनों पक्षों के बीच विवाद होने और आपसी विमर्श के बाद भी इसका निपटारा नहीं होने पर किसी तटस्‍थ विशेषज्ञ की मदद लेने या कोर्ट ऑफ ऑर्बिट्रेशन में जाने का प्रावधान किया गया है।

खत्म किया मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा


पुलवामा आतंकी हमले के बाद पूरा देश एकजुट होकर सरकार से पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। बता दें कि सरकार ने सबसे पहले पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को कमजोर करने के लिए उसका मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा समाप्त कर दिया है। भारत ने पाकिस्तान का MFN का दर्जा समाप्त करने का फैसला 23 साल बाद लिया है। साथ ही भारत ने पाकिस्तान से आने वाले सामान पर 200 फीसदी का आयात शुल्क लगा दिया है।

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