बहादुरी को सलाम: छोटी बहन पर हमला कर रहे सांड के सामने दीवार बन गया था ये भाई, स्कूल बैग से ताबड़तोड़ वार किए तो भाग खड़ा हुआ सांड / बहादुरी को सलाम: छोटी बहन पर हमला कर रहे सांड के सामने दीवार बन गया था ये भाई, स्कूल बैग से ताबड़तोड़ वार किए तो भाग खड़ा हुआ सांड

जानिए, दिलेर दिव्यांश की पूरी कहानी....

dainikbhaskar.com

Jan 14, 2019, 02:45 PM IST
pm narendra modi will give national bravery award to divyansh on republic day

लखनऊ जानकीपुरम निवासी दिव्यांश सिंह को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर PM नरेंद्र मोदी वीरता पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। ब्रेवरी अवॉर्ड पाने वाले दूसरे बच्चों के साथ दिव्यांश भी 26 जनवरी की परेड में होंगे। दिव्यांश को इससे पहले रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार 2018 मिल चुका है। आइए जानते हैं किस बहादुरी के लिए दिव्यांश को मिल रहा है ये अवार्ड.....

यूं बचाया था बहन को सांड से

- 31 जनवरी 2018 को दिव्यांश (14) अपनी छोटी बहन समृद्धि (5) के साथ रोज की तरह स्कूल बस स्टॉप से घर वापस जा रहे थे। घर से 250 मीटर दूर रास्ते में अचानक एक सांड सामने आ गया। उसने समृद्धि पर हमला कर दिया।
- बहन पर हमला करते सांड को देख दिव्यांश ने हिम्मत जुटाई और उसके सामने जाकर दीवार बनकर खड़ा हो गया। तब सांड ने दिव्यांश पर हमला कर दिया।
- खुद को बचाने के लिए दिव्यांश ने अपने स्कूल बैग से सांड पर ताबड़तोड़ वार शुरू कर दिए। स्कूल बैग से हुए वार से सांड थोड़ा डर गया और आखिरकार भाग निकला। हालांकि दिव्यांश और समृद्धि घटना के दौरान घायल हो गए थे। दोनों को जिला अस्पताल ले जाया गया था।

मां हिंदी डिपार्टमेंट की एचओडी, पिता असिस्टेंट प्रोफेसर

- दिव्यांश के पिता धीरेंद्र बहादुर सिंह डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर (भौतिकी) हैं। मां विनीता सिंह गंगा मेमोरियल गल्र्स पीजी कॉलेज में विभागाध्यक्ष (हिंदी) के पद पर कार्यरत हैं।
- दिव्यांश लखनऊ पब्लिक स्कूल, सहारा स्टेट में पढ़ते हैं। पिता धीरेंद्र बहादुर ने बताया कि घटना में दिव्यांश को काफी चोटें आई थीं। जिला प्रशासन की संस्तुति के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सम्मान मिला था।


क्यों दिया जाता है राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार, कब दिया गया पहला पुरस्कार

- राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार हर साल 16 साल के कम उम्र के बच्चों को उनके वीरता पूर्ण कार्य के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार भारत सरकार और इंडियन काउंसिल फार चाइल्ड वेलफेयर की ओर से साल 1957 में शुरू किया गया था।
- वीरता पुरस्कारों की शुरूआत 2 अक्टूबर 1957 को तब हुई जब तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू रामलीला मैदान में एक कार्यक्रम में सम्मिलित हुए थे। इस दौरान शार्ट सर्किट से शामियाने में आग लगने वाली थी। तभी 14 वर्षीय हरीश चन्द्र मेहरा नाम के एक स्काउट ने जलते टैंट को चाकू से काट कर अलग कर दिया जिससे हजारों जानें बच गईं।
- इन पुरस्कारों को मोटे तौर पर पाँच श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है, जिनमें भारत पुरस्कार, संजय चोपड़ा पुरस्कार, गीता चोपड़ा पुरस्कार, बापू गाइधानी पुरस्कार और सामान्य राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार शामिल हैं।
- इस तरह पहला राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार हरीश चन्द्र के साथ अन्य बच्चों को 4 फरवरी 1958 को प्रदान किया गया। वीरता पुरस्कारों का निर्धारण इंडियन काउंसिल फार चाइल्ड वेलफेयर द्वारा किया जाता है।

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