उप्र / लोकसभा चुनाव से पहले बदल रही सियासी तस्वीर, छोटे दलों की उम्मीदों को भी लगे पंख



political landscape changing quickly small parties important
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political landscape changing quickly small parties important

  • पीस पार्टी, निषाद पार्टी, महान दल जैसी पार्टियां गठबंधन में तलाश रहीं संभावना
  • छोटे दलों को भी साध सकते हैं सपा-बसपा 

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2019, 04:09 PM IST

लखनऊ. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन के ऐलान के बाद अब उप्र की सियासी तस्वीर बदलनी शुरू हो गई है। लोकसभा चुनाव के दौरान अपने अपने क्षेत्रों में अहमियत रखने वाले छोटे दल भी इस गठबंधन के बीच अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं। एक तरफ पीस पार्टी, निषाद पार्टी और महान दल के नेता जहां इस गठबंधन से खासे उत्साहित हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा से बगावती सुर अपनाए अपना दल (एस) और सुभासपा के लिए भी नई राह खुल गई है।

पीस पार्टी, निषाद पार्टी व महान दल भी तलाश रहे जमीन: पिछले विधानसभा चुनाव में सपा के साथ मिलकर लड़ चुकी पीस पार्टी अपने सहयोगी दल निषाद पार्टी के साथ सपा से कुछ सीटें पाने की उम्मीद लगाए बैठी है। पीस पार्टी के अध्यक्ष डा.अय्यूब का कहना है कि यह फैसला सपा-बसपा गठबंधन करेगा। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.संजय सिंह निषाद के बेटे प्रवीण निषाद ने लोकसभा उपचुनाव में सपा के टिकट पर गोरखपुर से जीत हासिल की थी। 

 

भाजपा पर और दबाव बना सकती है सुभासपा :  एनएडीए में शामिल ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का सवाल है तो उन्होंने यूपी में आगे का सफर भाजपा के साथ तय करने में दुश्वारियां जता दी हैं। राजभर ओबीसी के लिए गठित सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लोकसभा चुनाव से पहले लागू न किए जाने पर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर अकेले ही लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। पार्टी के प्रवक्ता के मुताबिक, घोसी, सलेमपुर, सुल्तानपुर, अकबरपुर और जौनपुर की सीटें अगर नहीं मिली तो सिर्फ यूपी में ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, बिहार और पंजाब में भी अन्य पार्टियों के साथ तालमेल कर अपना प्रत्याशी उतारने से भी नहीं हिचकेंगे।

 

फिलहाल एनडीए में ही रहेगा अपना दल (एस): राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल का कहना है कि हम एनडीए के साथ थे और उन्हीं के साथ रहेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से अभी सीटों को लेकर बात नहीं हुई है लेकिन सम्मानजनक सीटें दिए जाने की उम्मीद तो रखते ही हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में हम 11 सीटों पर लड़े थे और नौ सीटें जीती थीं वहीं लोकसभा में दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी। फूलपुर, मिर्जापुर, डुमरियागंज, बांदा, मछलीशहर, मिश्रिख, कैसरगंज आदि सीटों पर हमारी तैयारी शुरू हो गयी है। 

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