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कैराना उपचुनाव से पहले आरएलडी को बड़ा झटका, राष्ट्रीय प्रवक्ता साहब सिंह बीजेपी में शामिल

साहब सिंह सपा सरकार में भी दर्जा प्राप्त मंत्री रह चुके हैं।

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 12:10 PM IST
साहब सिंह आरएलडी के राष्टीय प्रवक्ता रह चुके हैं। साहब सिंह आरएलडी के राष्टीय प्रवक्ता रह चुके हैं।

लखनऊ. कैराना लोकसभा सीट में होने वाले उपचुनाव से पहले रालोद (राष्ट्रीय लोकदल) को बड़ा झटका लगा है। आरएलडी के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी साहब सिंह बीजेपी में शामिल हो गए हैं। शुक्रवार को उन्होंने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्रनाथ पांडेय की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता ली। साहब सिंह सपा सरकार में भी दर्जा प्राप्त मंत्री रह चुके हैं। मौजूदा समय में लोकसभा और यूपी विधानसभा में रालोद का कोई भी प्रतिनिधित्व नहीं है। ऐसे में रालोद कैराना उपचुनाव जीतकर 2019 से पहले वापसी करना चाहती है। उनके साथ बसपा के पूर्व नेता चरण सिंह भारती, बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रजनीकांत जाटव बीजेपी में शामिल हुए हैं।


आरएलडी उम्मीदवार का समर्थन कर रही है सपा-बसपा
- यूपी के कैराना लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को एक बार फिर चित के लिए समर्थन-गठबंधन के फॉर्मूले का समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पैतरा अपनाया है।
- बीएसपी से सांसद रही मौजूदा समय में समाजवादी नेता तब्बसुम हसन को कैराना लोकसभा सीट से राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के सिंबल पर प्रत्याशी बनाया गया है।

क्यों हो रहे हैं उपचुनाव
- कैराना लोकसभा सीट और नूरपुर विधानसभा की सीट सांसद हुकुम सिंह और विधायक लोकेन्द्र सिंह के निधन से खाली हुई थी। 28 मई को मतदान होगा जबकि मतों की गिनती 31 मई को होगी।

कैराना लोकसभा का जातीय गणित
- मुस्लिम - 5.50 लाख वोटर्स
- दलित - करीब 2 लाख वोटर्स
- जाट - 1 लाख 75000 वोटर्स
- राजपूत- 75000 वोटर्स
- गुजर - 1.30 लाख वोटर्स
- कश्‍यप - एक लाख 20 हजार वोटर्स
- सैनी - एक लाख 10 हजार वोटर्स
- ब्राह्मण - 60000 वोटर्स
- वैश्‍य 55000 वोटर्स

पश्चिमी यूपी में  आरएलडी की प्रभुत्व है लेकिन 2014 में अजीत सिंह खुद अपनी सीट हार गए थे।  फाइल पश्चिमी यूपी में आरएलडी की प्रभुत्व है लेकिन 2014 में अजीत सिंह खुद अपनी सीट हार गए थे। फाइल
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साहब सिंह आरएलडी के राष्टीय प्रवक्ता रह चुके हैं।साहब सिंह आरएलडी के राष्टीय प्रवक्ता रह चुके हैं।
पश्चिमी यूपी में  आरएलडी की प्रभुत्व है लेकिन 2014 में अजीत सिंह खुद अपनी सीट हार गए थे।  फाइलपश्चिमी यूपी में आरएलडी की प्रभुत्व है लेकिन 2014 में अजीत सिंह खुद अपनी सीट हार गए थे। फाइल
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