अयोध्या / शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा- भाजपा मंदिर के नाम पर दफ्तर बनाना चाहती है, वह हमें मंजूर नहीं



Shankaracharya is supreme, we are the supreme court of Hindus: Swarupananda Saraswati
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Shankaracharya is supreme, we are the supreme court of Hindus: Swarupananda Saraswati

  • परमधर्म संसद में शंकराचार्य ने फैसला किया था कि 21 फरवरी को अयोध्या में राम मंदिर के लिए शिला पूजन होगा
  • उन्होंने कहा- अगर हम आगे नहीं आए तो विहिप-भाजपा के लोग दूसरी जगह मंदिर बना देंगे
  • शंकराचार्य ने कहा- हम कांग्रेसी नहीं, हिंदुओं के गुरु और हिंदुओं के सुप्रीम कोर्ट हैं
  • स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा- हमने मोदी को भी आशीर्वाद दिया था और योगी को भी, लेकिन हुआ कुछ नहीं

रवि श्रीवास्तव

Feb 10, 2019, 11:36 AM IST

प्रयागराज. अयोध्या पर सियासत फिर गर्म है। द्वारका और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने पिछले दिनों ऐलान किया था कि वे कुंभ से साधु-संतों के साथ अयोध्या कूच कर वहां राम जन्मभूमि पर शिला पूजन करेंगे। दैनिक भास्कर प्लस ऐप ने उनसे इस घोषणा के बारे में बातचीत की। उन्होंने कहा कि हिंदुओं में शंकराचार्य ही सर्वोच्च होता है। हिंदुओं के सुप्रीम कोर्ट हम ही हैं। विहिप और भाजपा अयोध्या में मंदिर के नाम पर अपना ऑफिस बनाना चाहते हैं जो हमें मंजूर नहीं है। पेश है शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से विशेष बातचीत के अंश... 

 

भाजपा आरोप लगा रही है कि आप कांग्रेसी संत हैं और कांग्रेस का एजेंडा चलाते हैं, इसलिए आपने शिला पूजन की अपनी तारीख तय कर दी? 
शंकराचार्य :
हमारे साथ कांग्रेस कहां है? हमने जो निर्णय लिया है, वह किस कांग्रेस की प्रेरणा से लिया है? कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी हैं। वे हमसे आज तक नहीं मिले। हम कैसे कांग्रेसी हो गए? हम तो शंकराचार्य हैं, हिन्दुओं के गुरु हैं। शंकराचार्य सर्वोच्च होता है। क्या हमारा कोई दायित्व नहीं बनता है? हिन्दुओं के सुप्रीम कोर्ट तो हम ही हैं। हम जो कहेंगे यह जन्मभूमि है तो वह मानी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट इसका क्या फैसला करेगी? 

 

क्या आप 21 फरवरी को ऐलान करेंगे कि अब हमें अब कोई कोर्ट नहीं देखना है, न कानून देखना है?
शंकराचार्य :
ऐसा है न्यायिक प्रक्रिया अपना काम करती है। हमने कई दिन पहले 21 तारीख की घोषणा की है। क्या न्यायिक प्रक्रिया एक दिन में हो जाएगी? अगर न्यायिक प्रक्रिया से दूसरी जगह मंदिर बनाने की बात होती है तो वह हमें मंजूर नहीं है। अगर सुप्रीम कोर्ट कह दे कि रामलला को वहां से हटा दो और मस्जिद बना दो तो क्या सबको मंजूर होगा?

 

मामला कोर्ट में होने के बावजूद इस तरह का आयोजन करना क्या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश नहीं है?
शंकराचार्य :
 कोर्ट हो या सरकार, सभी संविधान मानते हैं। संविधान के निर्माता बोलते हैं कि भारत की सर्वोच्च सत्ता जनता में निहित है। जब लाखों की संख्या में लोग वहां (राम जन्मभूमि पर) जा रहे हैं तो उसके विरुद्ध आप कैसे कानून बना सकते हैं? हम न्यायालय को मानते हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि यहां राम जन्मभूमि है। अब ये बात गलत है या सही, यही सुप्रीम कोर्ट को बताना है। वही नहीं हो पा रहा है। पेशी पर पेशी होती जा रही है।

 

आपके शिला पूजन के बाद अगर कोर्ट का फैसला अलग आता है तो क्या करेंगे ?
शंकराचार्य :
न्यायिक प्रक्रिया कहां चल रही है? प्रक्रिया तो बंद है। मामला आप लटका कर रखे हैं और हम लोगों को न्याय मिल नहीं रहा है। हम कब तक भगवान को पॉलिथीन में रखेंगे? षड्यंत्र यह चल रहा है कि ये (विहिप और भाजपा) लोग दूसरी जगह मंदिर बना रहे हैं। अब ऐसे में हम आगे नहीं आएंगे तो ये दूसरी जगह मंदिर बना देंगे और पुतला खड़ा कर देश का साढ़े तीन हजार करोड़ रुपया बर्बाद कर देंगे।

 

आपके साथ कुंभ से कितने साधु-संन्यासी अयोध्या कूच कर रहे हैं?
शंकराचार्य :
अभी हम यह नहीं कह सकते कि अयोध्या से कितने लोग कूच कर रहे हैं? लेकिन यह जरूर है कि हमें व्यापक समर्थन मिल रहा है। कुंभ में आए ज्यादातर महात्मा हमें समर्थन दे रहे हैं। जितने प्रतिष्ठित साधु-संत हैं, सभी समर्थन दे रहे हैं। अभी विहिप ने भी धर्म संसद बुलाई थी, लेकिन उसमें कोई भी बड़ा साधु-संत शामिल नहीं हुआ। अखाड़े भी शामिल नहीं हुए। उसी धर्म संसद में लोगों ने मांग कर दी कि तारीख बताओ। आप समझ सकते हैं कि कितने लोग समर्थन में हैं।

 

क्या 21 तारीख को देशभर से शिलाएं भी अयोध्या से पहुंचेंगी?
शंकराचार्य :
अभी द्वारका से शिलाएं आई हैं। अनगिनत शिलाएं अयोध्या पहुंचेंगी। अगर हमको रोका गया तो अन्य लोग शिलाएं लेकर अंदर पहुंचेंगे। यह सिलसिला अब तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक शिलान्यास न हो जाए या मंदिर न बन जाए। क्योंकि इस समय भारत मंदिर बनाने के लिए तैयार है।

 

आप तो पहले भी शिला पूजन की घोषणाएं कर चुके हैं। 1989 के शिला पूजन से इस बार की घोषणा में अलग क्या है?
शंकराचार्य :
उस समय हमारे साथ छल हुआ था। उस समय मुलायम सिंह की सरकार थी। फूलपुर में हमारे पहुंचने से पहले ही हमें गिरफ्तार कर लिया गया था और किस्सा ये बनाया गया था कि शंकराचार्य जी ये कह रहे थे कि मैं मुसलामानों को भारत से बाहर कर दूंगा और बाबरी मस्जिद को नष्ट कर दूंगा, जबकि हम फूलपुर पहुंचे ही नहीं थे। हमसे पूछा गया कि जब शिलान्यास एक बार हो चुका है तो आप क्यों दोबारा जा रहे थे तो हमने बताया कि शिलान्यास जिस विधान से होना चाहिए, उससे नहीं हुआ था। पुराणों के अनुसार 4 शिलाओं से ही शिलान्यास होता है, जो कि हमने तैयार कर ली हैं। नियम ये हैं कि जब मंदिर का शिलान्यास होता है तो जिस देवता की स्थापना होती है, उसका यंत्र भी रखा जाता है।

 

आप राम जन्मभूमि न्यास के साथ हैं या उससे अलग? 
शंकराचार्य :
विहिप और भाजपा के लोग वहां मंदिर के नाम पर अपना ऑफिस बनाना चाहते हैं, इसलिए ये सारी बातें कर रहे हैं। मंदिर का एक धार्मिक रूप होना चाहिए, लेकिन यह लोग इसे राजनीतिक रूप देना चाहते हैं जो कि हम लोगों को मान्य नहीं है। इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना की है कि जो अविवादित भूमि है, वह उनके मालिकों को लौटा दी जाए। उसमें थोड़ी-सी राम जन्मभूमि न्यास की जमीन है। उस पर ये लोग राम जन्मभूमि से अलग अविवादित भूमि पर एक मंदिर बना सकें। अविवादित भूमि पर मंदिर बनेगा तो जन्मभूमि पर मंदिर बनाने की जो मांग संत समाज की ओर से है, वह समाप्त हो जाएगी, इसलिए इन लोगों ने यह चाल चली है। 

 

अगर अविवादित जमीन पर मंदिर बनता है तो क्या होगा?
शंकराचार्य :
उसका परिणाम ये होगा कि ये वहीं एक मंदिर अलग बनाकर कह देंगे कि हमने तो मंदिर बना दिया, जबकि अयोध्या में सैकड़ों मंदिर हैं। एक कनक भवन है, जहां सभी दर्शन करते हैं। मांग तो यह है कि जन्मभूमि पर मंदिर बनना चाहिए। यूपी के मुख्यमंत्री योगी कह रहे हैं कि हम सरयू किनारे आठ एकड़ जमीन पर सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा से भी लंबा पुतला बनाएंगे। साढ़े तीन हजार करोड़ रुपया खर्च होगा। उससे हमारा क्या होने वाला है? उस पुतले पर कौआ बैठेगा। रामलला तो छाया में रहते हैं। हम उन्हें छाया में रखना चाहते हैं तो तुम उन्हें आकाश में ले जाना चाहते हो, इसलिए हमारा उनका विरोध बस इसी बात का है। हमारा दायित्व बनता है कि हम जनता को मार्गदर्शन दें।

 

मोदी और योगी सरकार से क्या अपेक्षाएं हैं ?
शंकराचार्य :
हमें उनसे कोई अपेक्षा नहीं है। अपेक्षा ये है कि हमें अपना काम करने दें। हमारे भगवान जिस रामजन्मभूमि में विद्यमान हैं, वहां हर हिन्दू को जाने का अधिकार है। हम कोई तोड़फोड़ कर रहे हैं क्या? यह फैसला तो आ चुका है कि वहां राम जन्मभूमि है। हाईकोर्ट ने फैसला कर दिया तो सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को बदल सकती है। ट्रायल कोर्ट जिस मामला का फैसला कर देती है, सुप्रीम कोर्ट उसके कानूनी पहलू पर फैसला देती है। वह ट्रायल कोर्ट नहीं बनती है।

 

हिन्दू संगठनों की तरफ से अलग-अलग तारीखें घोषित की जाती रही हैं, इस बार क्या अलग होगा? 
शंकराचार्य :
अगर हमें वे लोग शिला पूजन करने देंगे तो वह एक शुरुआत होगी। जब तक हम कार्य प्रारंभ नहीं करेंगे तो कार्य होगा ही नहीं। पहले शिलान्यास होना है, जब वास्तु शास्त्र के अनुसार शिलान्यास होगा तो मंदिर का निर्माण भी हो जाएगा। चाहे आरएसएस हो या भाजपा या दूसरी पार्टियां हो, वे राम को मानते हैं या नहीं? उन्हीं का तो हम काम कर रहे हैं। हम यह नहीं कह रहे हैं कि राम मंदिर बनाकर हम कांग्रेस को जिताएंगे। जो हिन्दुओं के गुरु के काम में अडंगा डालेगा, वह हिन्दू कैसा होगा? यह प्रश्न है। मुसलमान मक्का नहीं छोड़ेगा। ईसाई येरुशलम नहीं छोड़ेगा, तो हिन्दू राम जन्मभूमि कैसे छोड़ देगा? 

 

मोदी सरकार को साढ़े 4 साल बीत चुके हैं, क्या अपेक्षाएं पूरी हुई हैं?
शंकराचार्य :
इस सवाल का जवाब देने के लिए हम नहीं हैं, लेकिन आप पूछते हैं तो बताते हैं कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की और धारा 370 के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने बलिदान भी दिया। जिसके बलिदान से भाजपा आज है और जब आपको मौका मिला तो धारा 370 खत्म करना चाहिए। अभी तक क्यों नहीं खत्म किया? जब मोदी को प्रधानमंत्री का प्रत्याशी आरएसएस ने बनाया, तब उन्होंने कहा कि गोमांस का निर्यात भारत से होता है, इससे मेरा मन जल रहा है। अब भी भारत गोमांस निर्यात में नंबर 1 क्यों है? आपने नोटबंदी की उससे क्या हुआ? आतंकवादी और नक्सली अभी भी हंगामा कर रहे हैं। कश्मीर में अभी भी हमारे सैनिक क्यों मारे जा रहे हैं? लोकपाल के लिए अन्ना अनशन कर रहे हैं। अभी भी थाने बिक रहे हैं। लड़कियों के साथ रेप की घटना हो रही है। आपने सरकार बनाकर हिन्दुओं को क्या दिया? कोई भी सरकार बनती है तो वह विकास तो करती ही है।

 

योगी खुद सन्यासी हैं, अब सीएम हैं कितना खरा उतर रहे हैं?
शंकराचार्य :
हमने मोदी को भी आशीर्वाद दिया था और योगी को भी आशीर्वाद दिया था, लेकिन जो होना चाहिए था वह कुछ नहीं हो रहा है। एससी/एसटी बिल ले आए। अगर हरिजन को जाति पर बोल दो तो छह महीने बिना जांच जेल में रहना पड़ेगा। अब आप सोचिए जो व्यक्ति हमें छह महीने के लिए जेल भेज देगा, उसके साथ क्या कभी हम मिल पाएंगे? जिसके साथ हम मजाक नहीं कर सकते, जिससे हमेशा डरते रहेंगे, वो आदमी हमारे साथ कैसे जुड़ेगा? ये जोड़ने का काम कर रहे हैं या अलग करने का काम कर रहे हैं?

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