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सपा सरकार में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले की फाइल दबाकर बैठे हैं अधिकारी: डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी

लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

Dainik Bhaskar

Jul 23, 2018, 02:18 PM IST
The files of the scam are pressed by the officials

लखनऊ. सपा शासनकाल में फर्जी राशन कार्ड के जरिये अरबों रुपये का घोटाला मामले में कार्रवाई की फाइल यूपी सरकार के अधिकारियों के ऑफिस में धूल फांक रही हैं। एसआईटी की तरफ से 49 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगने से जुड़ी फाइल 4 माह बाद आज भी प्रमुख सचिव गृह के ऑफिस में धूल फांक रही है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।


घोटाले की फाइल दबाए बैठे हुए हैं अधिकारी: डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि जांच शुरू होते ही घोटले में शामिल अधिकारियों ने इससे बचने के प्रयास शुरू कर दिए। सपा सरकार के कार्यकाल में हुए अरबों रुपये के घोटाले पर अधिकारियों का ढीला रवैया ठीक नहीं है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने 15 मई 2015 को इस घोटाले की लिखित शिकायत की थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसकी जांच मुरादाबाद के डीएसओ को सौंपी थी। एसआईटी जांच की मांग को लेकर उस वक्त बाजपेयी ने डीएसओ की जांच का विरोध भी किया था।

-प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने पर बाजपेयी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 13 जून 2017 को मुख्यमंत्री योगी ने इसकी एसआईटी जांच के आदेश दिए। सीएम के आदेश को कानूनी रूप लेने में ही तीन माह का समय लग गया। 8 सितंबर 2017 को आदेश जारी हुए। एसआईटी ने 30 मार्च 2018 को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट प्रमुख सचिव, गृह को सौंपते हुए 49 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। लेकिन 4 माह का समय बीतने के बावजूद अब तक एसआईटी को आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति नहीं मिल पाई है। सूत्रों का कहना है कि इन 49 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से प्रदेश के कई बड़े अधिकारी व सफेदपोश के नाम सामने आ सकते हैं।

अधिकारियों का ढीला रवैया ठीक नहीं: लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने एक बार फिर लखनऊ में योगी आदित्यनाथ से मिलकर एसआईटी को एफआईआर दर्ज कराने के लिए अनुमति दिए जाने की मांग की। वाजपेयी का कहना है की मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को एफआईआर की अनुमति दिए जाने के निर्देश दिए हैं। वाजपेयी का कहना है कि सपा सरकार के कार्यकाल में हुए अरबों रुपये के घोटाले पर अधिकारियों का ढीला रवैया ठीक नहीं है।


क्या है मामला: साल 2013 में केंद्र सरकार की तरफ से शुरू की गई खाद्य सुरक्षा योजना यूपी में 1 जनवरी 2016 से लागू हुई थी। इस योजना के तहत प्रत्येक राशन कार्ड की एक यूनिट पर 5 किलो अनाज (3 किलो गेहूं और 2 किलो चावल) महज 12 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है। आरोप है कि फर्जी राशन कार्ड के जरिये गरीबों को मिलने वाला प्रति यूनिट खाद्यान्न 94 रुपये में मार्केट में बेच दिया जाता था। बाजपेयी की शिकायत के बाद तत्कालीन प्रमुख सचिव राहुल भटनागर ने 27 अप्रैल 2017 को पूरे प्रदेश के राशन कार्ड का सत्यापन करने के आदेश जारी किए थे। इस प्रक्रिया में प्रदेश के 33 लाख राशन कार्ड के करीब 1.5 करोड़ यूनिट निरस्त किए गए। मेरठ में कुल 5 लाख 11 हजार राशन कार्ड बनाए गए। इनमें से 4 लाख 37 हजार 328 राशन कार्ड का रिकार्ड उपलब्ध ही नहीं थे।

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The files of the scam are pressed by the officials
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