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मोदी सरकार की नीतियों के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की देशव्यापी हड़ताल, यूपी में डेढ़ लाख ट्रक और एक लाख बसों का चक्का जाम

मोदी सरकार की नीतियों के विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने देशव्यापी हड़ताल कर दी है।

Danik Bhaskar | Jul 20, 2018, 02:34 PM IST

लखनऊ. मोदी सरकार की नीतियों के विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने देशव्यापी हड़ताल कर दी है। जहां देश में 95 लाख से ज्यादा ट्रक तो वहीँ 50 लाख से ज्यादा प्राइवेट बसों के पहिये थम गए हैं। ट्रांसपोर्टर की यूनियन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस का कहना कि सरकार की गलत नीतियों के चलते ट्रांसपोर्ट उद्योग ख़त्म हो रहा है।

4 प्रमुख मांगों को लेकर हड़ताल
-ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रवक्ता जगदीश गुप्ता ने बताया कि यूपी में डेढ़ लाख से ज्यादा ट्रक हैं जबकि 1 लाख से ज्यादा प्राइवेट बसें चलती हैं। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई से सुबह 6 बजे से हड़ताल शुरू हो गयी है।
-जगदीश गुप्ता ने बताया कि डीजल और पेट्रोल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए। मांग है कि राष्ट्रीय स्तर पर सामान मूल्य निर्धारण और डीजल कीमतों की हर तीसरे महीने में संशोधन हो।
-जगदीश गुप्ता ने बताया कि हमारी मांग है कि पूरा देश टोल प्लाजा मुक्त हो। उन्होंने तर्क दिया कि डीजल-पेट्रोल लेते समय सबसे 8 रूपए प्रति लीटर हम रोड डेवलपमेंट के नाम पर देते हैं। उसके बाद परमिट बनवाने पर भी टैक्स लिया जाता है। रोड डेवलपमेंट के नाम पर अन्य टैक्स भी देते हैं तो उससे रोड बनवाई जाए। हम टोल टैक्स क्यों दे। सिर्फ टोल प्लाजा की वजह से देश में 15% से 20% तक महंगाई बढ़ जाती है।
-थर्ड पार्टी बीमा को जीएसटी से बाहर किया जाना चाहिए। क्योंकि इससे बीमा का 22% तक रेट बढ़ जाता है।
-साथ ही ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर टीडीएस ख़त्म हो। आयकर अधिनियम की धारा 44 ए।ई। में अनुमानित आय में कमी और उसका तर्कसंगत और ई-वे बिल से जुडी अन्य समस्याएं को ख़त्म किया जाए।

इमरजेंसी सेवाएं चलती रहेंगी
-जगदीश गुप्ता ने बताया की हड़ताल से इमरजेंसी सेवाओं को दूर रखा गया है। एम्बुलेंस, स्कूल वैन, पानी, पेट्रोल और कच्चे माल से सम्बंधित सेवाओं को हड़ताल में नहीं किया गया है। जगदीश गुप्ता ने बताया कि हम 2 महीने से अपनी मांगों को लेकर मंत्रालय को बता रहे थे लेकिन हमारी नहीं सुनी गयी। जिसके बाद हमने हड़ताल का फैसला किया।