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कुलदीप नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी, कोर्ट ने कहा- ताकतवर इंसान के खिलाफ पीड़ित का बयान सच्चा और निष्कलंक

2 वर्ष पहले
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  • पीड़ित को सेंगर के पास ले जाने वाली सह-आरोपी शशि सिंह सुनवाई के दौरान बेहोश हो गई
  • अदालत ने कहा- पीड़ित के घर जाने की बजाय सीबीआई ने उसे दफ्तर में बुलाया, आश्चर्यजनक
  • अदालत ने सेंगर को नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण का दोषी करार दिया, सजा पर बहस मंगलवार को

दिल्ली/लखनऊ. उत्तर प्रदेश के उन्नाव केस में दिल्ली कोर्ट ने सोमवार को भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (53) को नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और अपहरण का दोषी करार दिया। कोर्ट ने कहा कि एक ताकतवर इंसान के खिलाफ पीड़ित का बयान सच्चा और निष्कलंक है। अदालत सजा पर बुधवार को बहस करेगी और इसी दिन सजा तय की जा सकती है। पीड़ित की तरफ से कोर्ट में उम्र कैद देने की अपील की गई। जिला जज धर्मेश शर्मा ने इस मामले में सह आरोपी शशि सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया।


सेंगर और उसके साथियों ने 2017 में लड़की को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म किया था। इसी साल जुलाई में पीड़ित की कार की ट्रक से भिड़ंत हो गई थी। हादसे में पीड़ित की चाची और मौसी की मौत हो गई थी। पीड़ित लड़की और उसके वकील तभी से दिल्ली एम्स में भर्ती हैं। विधायक के भाई की शिकायत पर लड़की का चाचा जेल में है। सेंगर फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है।

कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई, कहा- एजेंसी ने खुद प्रक्रिया का पालन नहीं किया

  • न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा- पीड़ित का यह बयान कि उसका यौन शोषण हुआ, मुझे यह सच्चा और निष्कलंक लगता है। उसे धमकाया गया था और वह परेशान थी। वह किसी कॉस्मोपॉलिटन के शिक्षित इलाके की नहीं, गांव की लड़की है। सेंगर एक ताकतवर शख्स था। ऐसे में पीड़ित ने अपना समय लिया।
  • न्यायाधीश ने कहा, "जब पीड़ित के परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा, तब उसके परिवार के खिलाफ कुछ आपराधिक मुकदमे दर्ज करा दिए गए। इनमें सेंगर का प्रभाव दिखाई दे रहा था।'
  • अदालत ने दुष्कर्म के मामले में सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल करने में देरी पर हैरानी जताई। कोर्ट ने कहा कि इससे सेंगर और अन्य के खिलाफ ट्रायल में देरी हुई। कोर्ट ने कहा कि महिला अधिकारी की गैर-मौजूदगी में जांच की गई और आरोप तय किए गए। इस बात की फिक्र भी नहीं की गई कि यौन शोषण की पीड़ित किस यातना से गुजरेगी और दोबारा उस पीड़ा को भोगेगी। कानून के मुताबिक, ऐसे मामले में पीड़ित के बयान दर्ज करते वक्त महिला अफसर का होना जरूरी है, लेकिन यह आश्चर्यजनक है कि सीबीआई ने उसके घर जाने की बजाय कई बार पीड़ित को ही सीबीआई दफ्तर में बुलाया।
  • कोर्ट ने नाराजगी जताई कि जांच एजेंसी ने पीड़ित के बयान से जुड़ी चुनिंदा जानकारी को बाहर भेजा ताकि पीड़ित के केस पर पर्दा डाला जा सके। पॉक्सो एक्ट में कोई खामी नहीं है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके निष्प्रभावी क्रियान्वयन और अधिकारियों में मानवीय नजरिए की कमी ने हालात को ऐसा बना दिया, जहां इंसाफ में देरी हुई। सीबीआई ने जांच और अभियोग से जुड़ी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस दिल्ली ट्रांसफर हुआ था
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस लखनऊ से दिल्ली कोर्ट ट्रांसफर हुआ था। इसके बाद 5 अगस्त से रोजाना बंद कमरे में सुनवाई हो रही थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के 9 गवाहों से जिरह हुई। पीड़ित का बयान दर्ज करने के लिए एम्स में स्पेशल कोर्ट बनाया गया था। तीस हजारी कोर्ट ने 10 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रखा था।

42 महीने में 4 मौतें, 4 जून 2017 से अब तक उन्नाव केस के अहम मोड़

रेप के 10 दिन बाद पुलिस पीड़ित का पता लगा सकी
04 जून 2017- नाबालिग पीड़ित का गांव के ही दो युवकों शुभम और अवधेश ने अपहरण किया। दोनों युवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज।
21 जून 2017- दस दिन बाद पुलिस अपहृत किशोरी का पता लगा सकी। पीड़ित ने तीन लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया।
22 जुलाई 2017- पीड़ित ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिख इंसाफ की गुहार लगाई। पीड़ित ने कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने दुष्कर्म किया।

पीड़ित के पिता पर जानलेवा हमला किया गया
30 अक्टूबर 2017- विधायक की तरफ से पीड़ित और उसके परिवार के खिलाफ मांखी थाने में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया गया।
03 अप्रैल 2018- आरोपी विधायक के भाई अतुल सिंह सेंगर ने साथियों संग पीड़ित के पिता पर मारपीट कर जानलेवा हमला किया।
04 अप्रैल 2018- मारपीट मामले में पीड़िता के पिता के खिलाफ ही संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेज दिया।
09 अप्रैल 2018- जेल में पीड़ित के पिता हालत दिन-पर-दिन खराब होती गई और आखिरकार उन्होंने जेल में ही दम तोड़ दिया।

सुबह 4 बजे कुलदीप सेंगर को हिरासत में लिया था
13 अप्रैल 2018- सीबीआई ने सुबह चार बजे दुष्कर्म मामले में आरोपी भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को हिरासत में लिया।
11 जुलाई 2018- सीबीआई ने दुष्कर्म मामले में चार्जशीट दायर की, जिसमें कुलदीप सेंगर, भाई अतुल सिंह और पांच अन्य लोगों को आरोपी बनाया।
18 अगस्त 2018- दुष्कर्म मामले के मुख्य गवाह यूनुस की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत।
04 जुलाई 2019- पीड़िता के चाचा को 19 साल पुराने एक मामले में कोर्ट ने 10 साल के कारावास की सजा सुनाई।
12 जुलाई 2019- पीड़ित की तरफ से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई को पत्र लिखा, आरोपी विधायक से पूरे परिवार को जान को खतरा बताया।

एक्सीडेंट में मारी गईं पीड़ित की मौसी और चाची
28 जुलाई 2019- रायबरेली के गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र में ट्रक व कार की टक्कर में पीड़ित की चाची और मौसी की मौत। पीड़ित और उनके वकील गंभीर रूप से घायल हुए।
29 जुलाई 2019- सड़क दुर्घटना मामले में कुलदीप सिंह सेंगर, उसके भाई मनोज सिंह सेंगर, विनोद मिश्र सहित 15-20 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज।

सुप्रीम कोर्ट ने केस दिल्ली ट्रांसफर किए, रोज सुनवाई का आदेश दिया
31 जुलाई 2019- चीफ जस्टिस ने पीड़ित के पत्र पर संज्ञान लिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेट्री जनरल को देरी पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
01 अगस्त 2019- सुप्रीम कोर्ट ने पांच मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने, प्रतिदिन सुनवाई का आदेश दिया। भाजपा ने सेंगर को पार्टी से निकाला।
10 दिसम्बर 2019- तीस हजारी कोर्ट ने गवाहों की सुनवाई के कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।