कारगिल विजय दिवस / मैं न लौटूं तो गर्व से सिर ऊंचा रखना... यह कहकर अपनों से विदा हुए थे हरदोई के आबिद खां



शहीद आबिद की बेटी व पत्नी। शहीद आबिद की बेटी व पत्नी।
X
शहीद आबिद की बेटी व पत्नी।शहीद आबिद की बेटी व पत्नी।

  • कारगिल जंग में शहीद हुए थे हरदोई के रहने वाले आबिद खां
  • पहली पोस्टिंग में आबिद ने दिखाया था अपने पराक्रम का जौहर

Dainik Bhaskar

Jul 26, 2019, 03:31 PM IST

हरदोई. 19 दिन परिवार के साथ रहने के बाद जब मुख्यालय से बुलाया आया तो हरदोई के आबिद खान ने पत्नी फिरदौस बेगम से कहा था कि, अपना और बच्चों का ख्याल रखना। अगर मैं न लौट पाऊं तो तुम शहीद की पत्नी बनकर समाज में अपना सिर गर्व से ऊंचा रखना। आबिद की बात सच निकली, वह घर लौटा लेकिन उसके आने का अंदाज जुदा था। तिरंगे में लिपटे आबिद को देखकर परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा था, लेकिन उसकी शहादत पर फक्र भी था। यह कहानी है 20 साल पहले कारगिल में शहीद हुए जवान आबिद खां की। कारगिल विजय दिवस की शहीद परिवार का गम फिर ताजा हो उठा है। 

 

 

 

बड़े बेटे की शहादत के बाद पिता ने छोटे बेटे को सेना में भेजा

  1. पाली नगर के काजी सराय मोहल्ला निवासी आबिद खां 6 फरवरी 1988 में सेना में भर्ती हुए थे। पहली पोस्टिंग डलहौजी में हुई। सैनिक बनने के 2 साल बाद उनका निकाह फिरदौस बेगम के साथ हुआ। 1995 में आतंकियों से लोहा लेते हुए सुरक्षित अपनी चौकी तक वापस आने के लिए आबिद को सैनिक सम्मान से नवाजा गया था। 

  2. कारगिल जंग के दौरान 30 मई को आबिद की टोली को टाइगर हिल की फतेह करने के जज्बे के साथ रवाना किया गया। कई सैनिक साथी शहीद हो चुके थे। एक गोली आबिद के पैर में भी लगी थी। बावजूद इसके हिम्मत न हारते हुए उन्होंने निरंतर आगे बढ़ते हुए दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया। लेकिन यहां राष्ट्र की रक्षा करते हुए यह जांबाज सैनिक भारत माता के चरणों में 1 जुलाई को शहीद हो गया। उनका पार्थिव शरीर 12 जुलाई को पाली नगर में पहुंचा था। 

  3. बड़े भाई की शहादत के वक्त खालिद खां 16 साल के थे और पढ़ाई कर रहे थे। पिता गफ्फार ने बेटे की शाहदत के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। गम से उबरने के बाद उन्होंने खालिद को सेना में जाने के लिए प्रेरित किया। पिता के संकल्प को पूरा करते हुए खालिद 2001 में सेना में भर्ती हुए। इस समय वह सिपाही के पद पर पटियाला में तैनात हैं।

     

  4. शहीद आबिद खान के चार बच्चे हैं। तीन बेटियां और एक बेटा है। सबसे छोटी बेटी शगुफ्ता का जन्म पिता की शहादत के तीन महीने बाद हुआ था। बेटी शबिस्ता तीन साल की है। वह अपने पिता की तरह सेना में जाना चाहती है। शाबिस्ता ने कहा उसे अपने पिता पर बहुत गर्व है और वो आर्मी में जाना चाहती है। फिरदौस कहती हैं कि, ढाई बीघा जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। इसे मुक्त कराने के लिए कई बार अफसरों को पत्र दिया गया। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना