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पाकिस्तान के कारण ताजमहल को ढ़ंक दिया था ग्रीन चादर से, नहीं ढ़ंकते तो आज नहीं होती ये प्यार की निशानी

दो बार कवर किया जा चुका है ताजमहल को हरे कपड़े से।

DainikBhaskar.Com | Last Modified - Apr 18, 2018, 11:46 PM IST

  • पाकिस्तान के कारण ताजमहल को ढ़ंक दिया था ग्रीन चादर से, नहीं ढ़ंकते तो आज नहीं होती ये प्यार की निशानी
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    ताजमहल

    आगरा.47 साल पहले 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को भारत में कैद कर लिया गया था। उस युद्ध के समय ताज महल को विशाल कपड़े से ढंक दिया गया था जिससे कि दुश्मन (पाकिस्तान) अपने देश की धरोहर ताज महल को नुकसान न पहुंचा सकें। इसके पहले भी दूसरे विश्वयुद्ध के समय 1942 में भी ताज महल को इसी तरह कपड़े से कवर किया गया था जो कि 15 दिन तक इसी स्थिति में रहा था। इसके बाद लोगों के लिए फिर खोल दिया गया था।

    (वर्ल्ड हेरीटेज डे के मौके पर हम आपको ताजमहल के बारे में बता रहे हैं।)

    - ताज महल ढंकने के लिए ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग) ने ताज महल के चारों और बांस का सुरक्षा घेरा बना दिया था।
    - इसके फर्श के आसपास पौधे बिछा दिए थे, ताकि वो ऊपर से घास या टीले जैसा लगे।
    - इसके बाद उस पर हरे रंग की चादर से डाल दी गई थी जिससे दुश्मनों को वो सिर्फ बांस का ढेर या फिर ग्रीन घास दिखाई दे।
    - मीडिया रिपोर्ट्स के उस समय मुताबिक, पूरे ताज महल को सुरक्षा के उद्देश्य कवर किया गया था ताकि कोई इस पर हमला न कर दे क्योंकि पाकिस्तानियों ने ताज महल की कुछ ही दूरी पर आगरा एयरबेस पर बम गिराए थे।

    ये है ताजमहल का इतिहास


    - ताजमहल 1983 से विश्व विरासत स्थल की लिस्ट में शामिल है।
    - दुनिया के 10 प्रमुख हेरीटेज प्लेसेस में भी ये शामिल है।
    - मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा 17 हेक्टेयर जमीन पर बनवाया था।
    - ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू हुआ था और यह 1648 में बनकर पूरा हुआ
    - इसे 22000 लोगों ने मिलकर बनाया था। तत्कालीन भारत के साथ ईरान और मध्य एशिया से इसे बनाने के लिए कारीगरों को बुलाया गया था।

    ताजमहल के बारे में 5 इंटरेस्टिंग फैक्ट्स

    1.ताज महल का आधार एक ऐसी लकड़ी पर बना हुआ है, जिसे मजबूत बनाए रखने के लिए नमी की जरूरत होती है। ऐसे में नमी बनाए रखने का यह काम ताजमहल के पास बहने वाली यमुना नदी का पानी करता है।

    2. ताजमहल के निर्माण के समय बादशाह शाहजहां ने इसके शिखर पर सोने का एक कलश लगवाया था। इसकी लंबाई 30 फीट 6 इंच थी। कलश करीब 40 हजार तोले (466 किलोग्राम) सोने से बनाया गया था। इस कलश को 3 बार बदला गया है। आगरा के किले को साल 1803 में हथियाने के बाद से ही अंग्रेजों की नजर ताजमहल पर थी।

    3. ताजमहल के मुख्‍य स्‍मारक के एक तरफ लाल रंग की मस्जिद है और दूसरी तरफ मेहमानखाना। ब्रिटिश शासन के दौरान मेहमानखाने को किराए पर दिया जाता था। इसमें ब्रिटेन से आने वाले नवविवाहित जोड़े ठहरते थे। उस वक्त इसका किराया काफी महंगा था। मेहमानखाने की पहली मंजिल पर पहले दीवारें बंद नहीं थीं। अंग्रेजों के समय में इसमें दीवारें जोड़ी गईं और उन्हें कमरों में तब्‍दील कर दिया गया था। इसे अंदर से बेहद खूबसूरत बनाया गया था।

    4. ताजमहल में शाहजहां और मुमताज की कब्र के ठीक ऊपर खूबसूरत लैंप टंगा है। ये लैंप मिस्र के सुल्तान बेवर्सी द्वि‍तीय की मस्जिद में लगे लैंप की नकल है। इसे तैयार करवाने में 108 साल पहले 15 हजार रुपए खर्च हुए थे। इससे पहले यहां धुएं वाला लैंप जलता था। इससे पूरे मकबरे में धुआं भर जाता था। तत्‍कालीन ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड कर्जन जब 18 अप्रैल, 1902 को आगरा आए और मकबरे में गए तो उन्हें वहां धुएं से काफी परेशानी हुई थी।

    5. ऐसा कहा जाता है कि ताजमहल के निर्माण के वक्‍त भूत-जिन्‍न इसकी नींव नहीं रखने देते थे। वे बार-बार इसे ध्‍वस्‍त कर देते और कारीगरों को डराकर भगा देते थे। ऐसे में शाहजहां ने भूत-जिन्न को वहां से भगाने के लिए इमामों से राय ली। इमामों ने शाहजहां को अरब में बुखारा शहर के पीर हजरत अहमद बुखारी को बुलाने का सुझाव दिया था। तब बादशाह के बुलावे पर पीर अपने साथ भाई सैय्यद जलाल बुखारी शाह, सैय्यद अमजद बुखारी शाह और सैय्यद लाल बुखारी शाह और सैंकड़ों सहायकों के साथ आगरा आए। शाहजहां सभी पीर बाबाओं को लेने खुद गए थे। चारों पीर बंधुओं ने आगरा में ताजमहल के नींव परिसर पर पहुंचकर कुरान और कलमे पढ़े थे। इसके बाद शाहजहां के हाथों नींव रखवाकर ताजमहल को बनवाने का काम शुरू करवाया गया। तब कहीं जाकर इसका निर्माण शुरू हो सका। इन चारों पीर भाइयों की मजार ताजमहल के चारों तरफ बनी हैं। माना जाता है कि जब तक ये मजार यहां हैं ताजमहल को कभी कुछ नहीं होगा।

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    ताजमहल को इस तरह से पत्तों से ढंका गया था।
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    1942 में खींची गई फोटो, जब जापानी और पाकिस्‍तानी लड़ाकू विमानों से बचाने के लिए इसे ढंका गया था।
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    सुरक्षा कारणों से वर्ष 1942 में तस्‍वीरें नहीं ली गई सिर्फ गुंबद को ढंकने की ही फोटो सामने आई थी।
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    सरेंडर लेटर जो पाक ने लिखा था।
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    पाक सैनिक भारत के सामने हथियार डालते हुए।
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    जीत के हीरो जगजीत सिंह (पगड़ी में) के साथ पाक सेनाध्यक्ष जनरल नियाजी।
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    मीडिया रिपोर्ट्स
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    भारत के सामने हथियार डालते हुए पाक सैनिक।
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Web Title: World Haritage Day Special Tajmahal Story
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