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26 जिलों में जलाई गई पराली; मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से पूछा- जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की?

8 महीने पहले
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आगरा में जलाई गई पराली का फाइल फोटो।
  • इससे पहले 16 नवम्बर को 14 जिलों के डीएम को जारी किया था नोटिस
  • जिलाधिकारियों से मांगी गई पूरी रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया गया हवाला

लखनऊ. उत्तरप्रदेश के 26 जिलों में पराली जलाने की शिकायत मिलने पर मुख्य सचिव आरके तिवारी ने जिलों के डीएम को नोटिस जारी करके जवाब-तलब किया है। जिलाधिकारियों से पूछा गया है कि जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की गई? इससे पहले 16 नवंबर को भी 14 जिलों के डीएम को नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए पुराने शासनादेश याद दिलाए हैं। साथ ही 25 नवंबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का खास उल्लेख किया है। 

डीएम से मांगा गया कार्रवाई का ब्योरा
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से जिम्मेदारों पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है। पराली जलाने की घटनाओं को रोक पाने में विफल रहे संबंधित तहसील एवं थाना के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का विवरण तलब किया है। साथ ही डीएम को अपना जवाब भी 5 दिसंबर तक इस हिदायत के साथ दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं कि पराली जलाने की घटनाएं न होने पाएं।

इन जिलों के डीएम से जवाब तलब
शामली, मेरठ, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, बागपत, हापुड़, आगरा, फिरोजाबाद, हाथरस, काशीराम नगर, बदायूं, मुरादाबाद, रामपुर, ज्योतिबाफुले नगर, संभल, कानपुर देहात, फर्रूखाबाद, कन्नौज, जालौन, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, भदोही और अमेठी।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश
इसमें कोर्ट ने कहा था, 'अब समय आ गया है कि राज्य सरकारें यह बताएं कि वायु प्रदूषण से प्रभावितों को मुआवजा क्यों न दिया जाए? अंतत: राज्य प्रशासन के जरिए चलता है, इसलिए अपने दायित्वों के निर्वहन में विफल रहने वाली मशीनरी की जिम्मेदारी क्यों न तय की जाए?'

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