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योगी सरकार ने 'माटी कला बोर्ड' को दी मंजूरी, 30 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार; विपक्ष ने कहा- उद्योगपतियों के लिए हुआ गठन

कांग्रेस ने कहा उद्योगपतियों को लाभ पहुंचानेके लिए बनाया गया है बोर्ड।

Danik Bhaskar | Jul 11, 2018, 01:15 PM IST

लखनऊ. योगी कैबिनेट ने मंगलवार को प्रदेश में माटी कला बोर्ड के गठन को मंजूरी दी है। सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि 'माटी कला बोर्ड' का गठन प्रदेश में 15 जुलाई से लागू होने वाले प्लॉस्टिक बैन के मद्देजनर किया गया है। अध्यक्ष खादी एवं ग्रामीण उद्योग मंत्री अथवा शासन द्वारा नामित प्रतिनिधि इसके अध्यक्ष बनेंगे। बोर्ड में पांच सदस्य भी नामित किए गए हैं। इस बोर्ड के गठन से दलित शोषित वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष संतराम प्रजापति ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा, 'हम सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं यह 70 साल में पहली बार हुआ है जब किसी सीएम ने इतना बड़ा फैसला लिया है।'

- यूपी में हमारे वर्ग की करीब 70 लाख जनसंख्या है। हमारी जाति के लोग यूपी के हर गांव में हैं। प्रदेश में एक बड़ी आबादी माटी शिल्पी परिवार से संबद्ध है और अपने पारंपरिक कार्य के माध्यम से जीवन-यापन के लिए देवी-देवताओं, गमला, मटका, एवं हाथी-घोड़ा कुल्हड़, दीया तथा अन्य साज-सज्जा के कलात्मक वस्तुओं के उत्पादन पर निर्भर है।

30 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार: संतराम प्रजापति के मुताबकि इस बोर्ड के गठन से 30 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और कुम्हारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति सबल होगी। प्रजापति महासंघ लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता आ रहा है। उनका कहना है कि अभी तक कुम्हारों की अनदेखी होती रही है और केवल वोट के लिए उनका प्रयोग किया जाता रहा है लेकिन इस बोर्ड के गठन की मंजूरी मिलने के बाद लाभ मिलेगा।

चायनीज प्रोडेक्ट पर पड़ेगा असर: इस बोर्ड के गठन के बाद कारोबार में सरकार की मदद मिलने से सबसे बड़ा असर चायनीज के प्रोडेक्ट के बिकने पर पड़ेगा। इस बोर्ड गठन से सरकार का उद्देश्य यह है कि मिट्टी के बनने वाले उपकरण को एक मार्केट मिलेगी। कारीगरों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और उनको अपने प्रोडेक्ट की अच्छी कीमत मिलेगी। बोर्ड द्वारा ऐसे मिट्टी के कारोबार करने वालों को रोजगार का साधन भी बढ़ेगा। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने कहा, ये बोर्ड कितना सफल होगा यह तो समय बताएगा। फिलहाल सरकार की नियत ने गरीब के विकास के लिए कोई योजना नहीं है वह सभी योजनाओं का हेड किसी उद्योगपति को बनाती है जिसे सबसे ज्यादा लाभ होता है।