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स्कूल वालों ने छात्रा को दिया ऐसा धोखा,2 साल बाद सामने आया ये सच्च

हाईस्कूल में फेल एक छात्रा को स्कूल प्रशासन ने ना सिर्फ इंटर में एडमिशन दिलवाया बल्कि उसे इंटर परीक्षा भी पास करा दी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 06, 2018, 11:20 AM IST

    • छात्रा हाईस्कूल में फेल हो गई थी जबकि 2017 में इंटर पास किया था।

      मुरादाबाद.यूपी के मुरादाबाद जिले से शिक्षा विभाग की लापरवाही का मामला सामने आया है। दरअसल, यहां हाईस्कूल में फेल एक छात्रा को स्कूल प्रशासन ने ना सिर्फ इंटर में एडमिशन दिलवाया बल्कि उसे इंटर परीक्षा भी पास करा दी। छात्रा ने जब हाईस्कूल के मार्कशीट की मांग की तो स्कूल प्रशासन टालमटोल करना शुरू कर दिया। वहीं, स्नातक परीक्षा के लिए निजी कॉलेज द्वारा जब मार्कशीट लाने के लिए कहा तो पूरा मामला उजागर हुआ। आगे पढ़िए क्या है पूरा मामला...


      - यहां के बिलारी थाना क्षेत्र में रहने वाली छात्रा शिखा(19) ने जीएसए इंटर कॉलेज गवलखेड़ा से 2017 में बारहवीं पास की है। जिसके प्रमाण के तौर पर उसके पास इंटर की मार्कशीट भी है।
      - छात्रा शिखा ने बताया कि साल 2015 में उसने हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। जिसका रिजल्ट निकलने के बाद स्कूल प्रशासन ने छात्रा को पास बताते हुए उसका इंटर में एडमिशन करा दिया।
      - छात्रा ने जब हाईस्कूल के अंकपत्र की मांग की तो स्कूल प्रशासन ने टालमटोल करना शुरू कर दिया। इसी बीच साल उसने इंटर का परीक्षा फार्म भी भर दिया और उसके आधार पर इंटर की परीक्षा भी दे दी।


      ऐसे हुआ मामले का खुलासा
      - साल, 2017 में इंटर पास होने के बाद स्कूल के प्रधानाचार्य ने अपने पहचान वाले के निजी डिग्री कॉलेज छात्रा का एडमिशन भी करा दिया। स्नातक परीक्षा के लिए कॉलेज ने छात्रा से मार्कशीट लाने कहा।
      - इसके बाद छात्रा के परिजनों द्वारा हंगामा करने के बाद स्कूल प्रशासन ने इंटर पास की मार्कशीट तो दे दी। लेकिन हाईस्कूल की मार्कशीट में सुधार करने की बात कहकर मामले को टाल दिया।
      - वहीं, स्कूल प्रशासन से तंग आकर परिजनों ने माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। जहां उन्हें बताया गया कि शिखा हाईस्कूल में 3 विषयों में फेल थी।
      - बता दें, माध्यमिक शिक्षा परिषद के परीक्षा फार्म ऑनलाइन भरे जाते हैं। जिसमें हाईस्कूल की मार्कशीट भी सॉफ्टवेयर में दर्ज होती है। माना जा रहा है कि इस पूरे मामले में माध्यमिक शिक्षा परिषद मिलीभगत है।

      क्या कहती है मां
      - छात्रा का मां का कहना है कि हम बहुत ही गरीब परिवार से हैं। किसी तरह मेहनत-मजदूरी करके अपने बच्चों को पढ़ाती हूं। स्कूल वालों ने बच्ची को दसवीं करा दिया और हाईस्कूल भी करा दिया। लेकिन यह नहीं बताया कि वह दसवीं में फेल हैं। इन लोगों ने मेरी बच्ची का भविष्य खराब कर दिया। हमे न्याय चाहिए बस।


      क्या कहते है शिक्षा विभाग के अधिकारी
      - परिजनों की शिकायत पर डीआईओएस प्रदीप कुमार द्विवेदी ने स्कूल को नोटिस देकर 3 दिन में जांच रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है। डीआईओएस के मुताबिक, "रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अगर स्कूल प्रशासन दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"

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      प्रमाण के तौर पर उसके पास इंटर की मार्कशीट भी है।
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      छात्रा ने जब हाईस्कूल के मार्कशीट की मांग की तो स्कूल प्रशासन टालमटोल करना शुरू कर दिया।
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      स्नातक परीक्षा के लिए निजी कॉलेज ने जब मार्कशीट लाने के लिए कहा तो पूरा मामला उजागर हुआ।
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