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इस शख्स को 9 बार मिली फांसी की सजा, खुद को ऐसे बताया बेगुनाह

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 01, 2018, 08:43 PM IST

निठारी कांड के नर पिशाच सुरेंद्र कोली का एक वीडियो सामने आया है। इसमें उसने खुद को बेगुनाह बताया है।
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    सुरेंद्र कोली को 9वें मामले में 8 दिसंबर 2017 को फांसी की सजा सुनाई गई।

    मेरठ(यूपी).निठारी कांड के 'नर पिशाच' सुरेंद्र कोली का एक वीडियो सामने आया है। इसमें उसने कहा, ''मुझे इलाज के नाम पर इधर से उधर भेजा जा रहा है। मेरे पास अपनी बेगुनाही के तमाम सबूत हैं, लेकिन मेरी कोई मदद नहीं कर रहा है।'' बता दें, निठारी कांड के आरोपी सुरेन्द्र कोली 9 मामलों में फांसी की सजा हुई है। कड़ी सुरक्षा के बीच सुरेंद्र पहुंचा हॉस्पिटल...

    - 30 दिसंबर को गाजियाबाद पुलिस कड़ी सुरक्षा के बीच सुरेंद्र कोली को लेकर मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल अस्पताल लेकर पहुंची।

    - उसने कहा, ''मेरे एक हाथ में दर्द की शिकायत है। करीब 3 महीने पहले पैरालाइज का असर हो गया था। काफी कोशिश के बाद भी जेल प्रशासन इलाज के लिए तैयार नहीं हुआ। इलाज के लिए उसे कोर्ट की मदद लेनी पड़ी।''

    - मीडिया से बातचीत करते हुए कोली ने कहा, उसके पास बेगुनाही के सबूत हैं, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।
    - उसने आरटीआई और अन्य माध्यमों से ये सबूत इकट्ठा किए, लेकिन उसकी कोई मदद नहीं कर रहा है। वह अपना केस स्वयं लड़ रहा है। उसने अपनी बेगुनाही के सबूत इकट्ठा किए, लेकिन मदद कोई नहीं कर रहा है।

    - बता दें, इससे पहले सुरेंद्र कोली को मेरठ के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई के लिए लाया गया था। तब उसने अपनी रीढ़ की हड्डी में दर्द की शिकायत की थी। एमआरआई कराने के बाद कोली को लेकर गाजियाबाद पुलिस वापस चली गई थी।''
    - मेडिकल अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजित चौधरी का कहना था, ''सुरेंद्र कोली के मेडिकल टेस्ट किए गए हैं। उसे न्यूरो फिजि‍शियन को दिखाने की जरूरत है। फिलहाल मेडिकल अस्पताल में न्यूरो सर्जन न होने की वजह से उसे हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया है।''

    इन 8 मामलों में सुरेंद्र कोली को हुई है फांसी की सजा
    -13 सितंबर 2009 को कोर्ट ने एक बच्ची की हत्या में फांसी की सजा सुनाई।
    - 12 मई 2010 को कोर्ट ने एक बच्ची की हत्या में फांसी की सजा सुनाई।
    - 28 सितंबर 2010 को कोर्ट ने एक बच्ची की हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई।
    - 22 दिसंबर 2010 को कोर्ट ने एक बच्ची के मर्डर के आरोप में फांसी सुनाई।
    - 24 दिसंबर 2012 को कोर्ट ने एक बच्ची की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई।
    - 7 अक्टूबर 2016 को एक महिला की हत्या के आरोप में कोर्ट ने फांसी की सजा दी।
    - 16 दिसंबर 2016 को कोर्ट ने एक युवती की हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई।
    - 24 जुलाई 2017 को सुरेंदर कोली और मोनिंदर पंढेर को फांसी की सजा सुनाई गई।

    क्या है 9 वां मामला ?

    - मोनिंदर पंधेर के घर में काम करने वाली मेड अंजलि का है। इसकी रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। कोठी से मेड के खून से सने कपड़े बरामद किया गया था।
    - अदालत ने 376, 302 और 201 सेक्शन में मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेन्द्र कोली को दोषी माना है। अब इस मामले में दोनों आरोपियों को 8 दिसंबर को सजा सुनाई गई।

    मोनिंदर सिंह पंधेर को दो मामलों में हुई है सजा

    - 13 फरवरी 2009 को कोर्ट ने मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा सुनाई है।
    - 24 जुलाई 2017 को मोनिंदर सिंह पंढेर को फांसी कीसजा सुनाई गई है।


    डेड बॉडी के साथ करता था रेप
    - पुलिस अफसरों के मुताबिक, ''मोनिंदर पंढेर की कोठी में अक्सर कॉलगर्ल्स आया करती थीं। उनके लिए घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली ही खाने-पीने की व्यवस्था करता था।''
    - ''इस दौरान वो उनसे नजदीकी बढ़ाना चाहता था, लेकिन नौकर होने की वजह से कामयाब नहीं हो पाता था।''
    - ''इसलिए वह धीरे-धीरे नेक्रोफीलिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रसित होता गया। इस वजह से वो छोटे बच्चों के प्रति सेक्शुअली अट्रैक्ट होने लगा।''
    - ''जब इलाके में सन्नाटा छा जाता था तो कोठी से गुजरने वाली लड़कियों को वो पकड़ लेता और उनका मुंह बांधकर उनका रेप करता था। इतना ही नहीं, वो हत्या करने के बाद शव के साथ भी रेप करता था।''

    10 लाख में से किसी एक को होती है नेक्रोफीलिया की बीमारी
    - लखनऊ के केजीएमयू के जिरियॉट्रिक एंड मेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट के एच.ओ.डी डॉ. एस. सी तिवारी के मुताबिक, ''नेक्रोफीलिया' एक तरह का मेंटल डिसीज है। इसे रेयर डिसीज की लिस्ट में शामिल किया गया है।''
    - ''ये डिसीज 10 लाख व्यक्ति में से किसी एक को होती है। किसी व्यक्ति को ये डिसीज क्यों होती है, इस बारे में आज तक ठीक से पता नहीं चल पाया है। इसके पर अभी भी रिसर्च चल रहा है।''

    डेड बॉडी से सेक्स करते हैं नेक्रोफीलिया के पेशेंट
    - तिवारी ने कहा- ''नेक्रोफीलिया डिसीज से ग्रसित व्यक्ति डेड बॉडी के साथ सेक्स करता है। लेकिन उसे ये पता नहीं होता है कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। कभी-कभी ये सनक में तो कई बार प्लेजर के लिए भी किया जाता है।''
    - ''इस डिसीज के बारे में अभी तक मरीजों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। भारत में ये बीमारी कितने लोगों को है, यह डाटा भी उपलब्ध नहीं है।''

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    9वां मामला मोनिंदर पंधेर के घर में काम करने वाली मेड अंजलि का है। इसकी रेप के बाद हत्या कर दी गई थी।
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    निठारी कांड में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर मेन एक्यूजड है।
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Web Title: Nithari Case Accused Surendra Koli Story
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