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पढ़ाई के लिए इस PM ने छोड़ा था अपना घर, इस दुकान का खाते थे मिठाई

23 दिसंबर को पूर्व पीएम स्व. चौधरी चरण सिंह की जयंती को किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

Danik Bhaskar | Dec 23, 2017, 07:00 AM IST
23 दिसंबर को पूर्व PM का जन्मदिन मनाया जाता है। (फाइल) 23 दिसंबर को पूर्व PM का जन्मदिन मनाया जाता है। (फाइल)

मेरठ (यूपी). किसानों के मसीहा कहे जाने वाले देश के पूर्व पीएम स्व. चौधरी चरण सिंह की जयंती को किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस शहर से इनका गहरा नाता रहा है, इनकी प्राइमरी शिक्षा जानी खुर्द के सरकारी स्कूल में हुई थी। इस स्कूल में ये क्लास 4 तक पढ़े थे। इसके बाद अपने पढ़ने के ​लिए अपने पैतृक गांव नूरपुर चले गए थे।

ताऊ के यहां गुजरा था बचपन...


- चौधरी चरण का पैतृक गांव जिला हापुड़ में पड़ता था। जन्म के बाद उनका बचपन मेरठ जिले के भूपगढ़ी गांव में गुजरा। ब्लॉक जानी के इस गांव भूपगढ़ी में इनके ताऊ गजपतर​ सिंह रहते ​थे। करीब 6 साल की उम्र में ये अपने ताऊ के पास आकर रहने लगे थे।
- ग्रामीणों ने बताया, ''भूपगढ़ी गांव के पास ही जानी खुर्द गांव के सरकारी स्कूल में वह पढ़ने आते थे। जो उनके गांव से करीब 3 किलोमीटर दूर है। वह पैदल ही गांव से दूसरे बच्चों के साथ पैदल आते थे। वे यहां कक्षा 4 तक ही पढ़ाई की, उसके बाद वह अपने मां-बाप के पास नूरपुर चले गए थे।''
- ''कुछ साल नूरपुर में रहने के बाद वह फिर वापस पढ़ाई के लिए भूपगढ़ी आ गए थे। बाद में यही रहकर अपनी मिडिल क्लास और ​​फिर ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। ग्रेजुएशन करने के लिए रोज साइकिल से शहर पढ़ने जाते थे।''

अंग्रेजों के खिलाफ किया था आंदोलन
- गांव भूपगढ़ी में रहने के दौरान चरण सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया था। जिसके कारण 1941 में उन्हें जेल भी जाना पड़ा। जिला कारागार में उन्हें बैरक नंबर 9 में रखा गया था। आज इस जिला कारागार का नाम भी चौधरी चरण सिंह के नाम पर ही है।
- उनके साथ उनके बचपन के दोस्त छोटनलाल उपाध्याय भी जेल गए थे। इन्होंने मेरठ, मवाना, सरधना, गाजियाबाद, बुलंदशहर आदि में गुप्त क्रांतिकारी संगठन तैयार किए थे।''

मुन्नूलाल का पेड़ा था इनकी पहली पसंद
- चौधरी साहब को बचपन से ही मिठाई खाने का शौक था। जब वह भूपगढ़ी में रहते थे तो जानी गांव में आकर मुन्नू हलवाई के पेड़ा खाते थे। बताते हैं दिल्ली में जब कोई गांव वाले उनसे मिलने आता था तो वह मुन्नूलाल हलवाई के पेड़े उनके लिए लेकर जाता था।
- प्रधानमंत्री बनने के बाद 1980 में एक जनसभा को संबोधि‍त करने के लिए ये जानी गांव आए थे। ग्रामीणों की मानें तो उस वक्त भी चौधरी साहब ने मुन्नू की दुकान से पेड़े मंगा कर खाए थे।
- इस गांव में इनके जन्मदिन पर हर साल हवन किया जाता है। स्कूल में भी बच्चों को चौधरी चरण सिंह के बारे में बताया जाता है और उनके आदर्शों को अपनाने के लिए कहा जाता है।
- स्थानीय निवासी दिनेश उपाध्याय का कहना है, ''किसानों के लिए चौधरी चरण सिंह ने जो कार्य किया है, उन्हें सदैव याद किया जाएगा। इतिहास उनके कार्यों को कभी भूला नहीं सकेगा।''

चौधरी चरण सिंह ने इस स्कूूूल से क्लास 4 तक की पढ़ाई की थी। चौधरी चरण सिंह ने इस स्कूूूल से क्लास 4 तक की पढ़ाई की थी।
पूर्व पीएम के नाम पर मेरठ के जिला कारागार का नाम रखा गया।( फाइल) पूर्व पीएम के नाम पर मेरठ के जिला कारागार का नाम रखा गया।( फाइल)
इनके ही नाम पर मेरठ विश्वविद्यालय का नाम पड़ा। (फाइल) इनके ही नाम पर मेरठ विश्वविद्यालय का नाम पड़ा। (फाइल)