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मान्यता: इस कुएं के पानी में स्नान करती थी द्रोपदी, अब इसलिए है फेमस

पांडवों और कौरवों के शौर्य के प्रतीक हस्तिनापुर की पहचान धर्म नगरी के रूप में भी है।

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2017, 09:00 PM IST
दिल्ली से करीब 110 किलोमीटर दूर दिल्ली से करीब 110 किलोमीटर दूर

मेरठ. पांडवों और कौरवों के शौर्य के प्रतीक हस्तिनापुर की पहचान धर्म नगरी के रूप में भी है। महाभारतकालीन पांडव टीला और दूसरे ऐतिहासिक स्थल यहां मौजूद हैं। ये स्थल आज भी महाभारत काल की याद ताजा करते हैं। पांडव टीले पर ही एक कुआं बना है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इस कुएं के पानी से ही द्रोपदी और पांडव स्नान करते थे।

अमृत कूप के नाम से जाना जाता है ये कुआं
- पांडव टीले पर बने इस कुएं को लोग अमृत कुएं के नाम से जानते हैं। इस कुएं का जीर्णोद्वार कराया गया है, इसका निचला हिस्सा लाखौरी र्इंटों से बना है। पुरातत्व विभाग ने इस स्थान को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया है।
- इस टीले तक पहुंचने के लिए पाण्डेश्वर महादेव मंदिर से रास्ता गया है। इसी रास्ते से पैदल चलकर यहां तक पहुंचा जा सकता है। टीले पर घने पेड़ और झाड़ियां है।
- स्थानीय निवासी सुधीर कुमार के मुताबिक, ऐसी मान्यता है कि अगर इस कुएं के पानी से स्नान किया जाए तो चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। कुएं का पानी भी कभी खत्म नहीं होता।
- हस्तिनापुर के ही हरिओम ने बताया, सालों से इस कुएं का पानी ऐसा ही है। हालांकि, रखरखाव के अभाव में कुआं क्षतिग्रस्त हो रहा है।

- बता दें, हस्तिनापुर मेरठ से 48 किलोमीटर दूर बूढ़ी गंगा नदी के किनारे स्थित है। दिल्ली से यह दूरी करीब 110 किलोमीटर है। करीब 1857 ईसवीं में पुरातत्ववेत्ता कनिंघल और 1880 में फ्यूहर ने भी हस्तिनापुर का दौरा किया।
- इसके बाद 1950-52 में प्रो. बीबी लाल ने प्राचीन टीले की खुदाई कराई, तो यहां से महाभारतकालीन चित्रित धूसर मृदभांड और कई दूसरी सभ्यताओं के अवशेष मिले।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इस टीले को संरक्षित घोषित किया है।

यहां स्थापित है प्राचीन पाण्डेश्वर महादेव मंदिर
- हस्तिनापुर में प्राचीन टीले के दक्षिणी-पश्चिमी किनारे पर प्राचीन पांडवेश्वर महादेव मंदिर स्थित है।
- यह मंदिर अपने अंदर महाभारत काल के इतिहास को संजोए हुए हैं। इस मंदिर परिसर में सालों पुराने दो विशालकाय वृक्ष है।
- बताया जाता है कि यहां पर पांडव और योगीराज भगवान श्रीकृष्ण खेलते थे। मंदिर में स्थित शिवलिंग को स्वयंभू शिवलिंग बताया जाता है।

- महाभारत काल के प्राचीन टीले से लगभग 500 मीटर की दूरी पर दानवीर कर्ण मंदिर स्थित है। इस मंदिर के गर्भगृह में देवी दुर्गा एवं भगवान शिव की प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं।
- मंदिर में स्थापित मूर्तियों को देखकर लगता है कि यह मंदिर करीब 500 साल पुराना होगा। लोगों की मान्यता है कि मंदिर में स्थित शिवलिंग की पूजा करने के लिए दानवीर कर्ण आया करते थे।
- इतिहासकार डॉ. केके शर्मा के अनुसार हस्तिनापुर में महाभारत कालीन कई प्रमाण मिले हैं। जिससे प्रतीत होता है कि यह पांडवों की नगरी रही है।

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