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इस कॉलेज के स्टूडेंट्स ने मानी थी नेहरू की बात, उखाड़ दी थी रेल पटरी

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 14, 2017, 12:13 PM IST

मेरठ. यहां के दयानंद महाविद्यालय गुरूकुल इंटर कॉलेज में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू आए थे।
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    प्रधानमंत्री बनने से पहले नेहरू दयानंद महाविद्यालय गुरूकुल इंटर कॉलेज (गुरूकुल डौरली) में आए थे।
    मेरठ. यहां के दयानंद महाविद्यालय गुरूकुल इंटर कॉलेज (गुरूकुल डौरली) में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू आए थे। वह प्रधानमंत्री बनने से पहले उस वक्त आए थे, जब देश के अंदर अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति चल रही थी। नेहरू ने कॉलेज के छात्रों के साथ सभा कर उनमें देश भक्ति का जोश भरा था।


    जब नेहरू की बातों से प्रभावित होकर छात्राें ने उखाड़ दी थी ट्रेन की पटरी
    - गुरूकुल डौरली कॉलेज क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र था। बताया जाता है कि इसी कॉलेज से 9 अगस्त 1942 को आंदोलन की नींव रखी गई थी। छात्रों को नेहरू ने संबोधित किया था, जिसके बाद यहां छात्रों ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करते हुए घंटाघर पर तिरंगा फहराया।
    - स्वतंत्रता सेनानी रतनलाल शास्त्री के बेटे शीलेंद्र चौहान के मुताबिक, छात्रों में देशभक्ति का जोश इस कदर भरा था कि उन्होंने खतौली में रेल की पटरी तक उखाड़ दी थी।
    - पटरी उखाड़ने के आरोप में अंग्रेज पुलिस ने छात्रों को अरेस्ट कर जेल में डाल दिया था। इनमें हरिदत्त शास्त्री, वेदपाल, रतनलाल, विक्रमादित्य, लेखराम, शिवदयालु आदि नाम शामिल थे।
    - छात्रों में तेजी से बढ़ती अंग्रेज विरोधी गतिविधियों को देख अंग्रेजी हुकूमत ने कॉलेज में साल 1942 में ताले जड़ दिए थे। बाद में कानूनी लड़ाई लड़कर 1945 में ताले खुलवाए गए और यहां फिर से पढ़ाई होने लगी।
    - यही नहीं, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी गुरूकुल डौरली को महत्वपूर्ण केंद्र बनाया गया। इस आंदोलन की जिम्मेदारी यहां चौधरी चरण सिंह को सौंपी गई थी।
    - जवाहर लाल नेहरू के अलावा इस कॉलेज में आजादी से पहले महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी और आजाद भगत सिंह भी आ चुके थे।
    - बता दें, कॉलेज की नींव साल 1924 में रखी गई थी। आज भी यहां पढ़ने वाले छात्रों को देश को आजाद कराने में योगदान देने वाले क्रांतिकारी छात्रों के बारे में बताया जाता है।


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    गुरूकुल डौरली कॉलेज क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र था। बताया जाता है कि इसी कॉलेज से 9 अगस्त 1942 को आंदोलन की नींव रखी गई थी।
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    स्वतंत्रता सेनानी रतनलाल शास्त्री के बेटे शीलेंद्र चौहान के मुताबिक, छात्रों में देशभक्ति का जोश इस कदर भरा था कि उन्होंने खतौली में रेल की पटरी तक उखाड़ दी थी।
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    छात्रों में तेजी से बढ़ती अंग्रेज विरोधी गतिविधियों को देख अंग्रेजी हुकूमत ने कॉलेज में साल 1942 में ताले जड़ दिए थे।
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    भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी गुरूकुल डौरली को महत्वपूर्ण केंद्र बनाया गया।
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Web Title: Students Involved In Revolutionary Activities After Nehru Visit In College
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