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14 साल से लोगों को जागरूक कर रहे ट्रैफ‍िक बाबा का न‍िधन, यातायात पुल‍िस ने क‍िया था सम्मान‍ित

ट्रैफिक बाबा के नाम से मशहूर 83 वर्षीय मुकुल चंद जोशी का नोएडा सेक्टर-27 स्थित कैलाश अस्पताल में न‍िधन हो गया।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 06, 2017, 08:14 PM IST

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    14 साल से सड़कों पर ट्रैफ‍िक न‍ियमों के प्रत‍ि लोगों को कर रहे थे जागरूक। फाइल
    नोएडा.ट्रैफिक बाबा के नाम से मशहूर 83 वर्षीय मुकुल चंद जोशी का रविवार देर रात सेक्टर-27 स्थित कैलाश अस्पताल में न‍िधन हो गया। वह पिछले 14 वर्षों से ट्रैफ‍िक नियमों के प्रति जागरूकता के लिए अभियान चला रहे थे। मृत्यु के बाद उनकी इच्छा अनुसार दोनों आंखें और पेसमेकर दान की गई। सोमवार सुबह दिल्ली के लोधी रोड स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। ट्रैफिक बाबा की मौत पर नोएडा ट्रैफिक पुलिस ने गहरा शोक व्यक्त किया है। हाल ही में नोएडा पुलिस ने उन्हें सम्मानित किया था। एक घटना ने मुकुल चंद जोशी को बना द‍िया ट्रैफ‍िक बाबा...
    -मूलरूप से अल्मोड़ा निवासी मुकुल चंद जोशी सेक्टर-21 जलवायु विहार स्थित सोसायटी के फ्लैट नंबर बी-56 में पत्नी के साथ रहते थे।
    -साल 1993 में वह आगरा से लाइट इंजीनियर के पद से सेवानिवृत हुए थे। परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे हैं। बड़े बेटे कैप्टन नीरज जोशी मर्चेन्ट नेवी सिगापुर में हैं, जबकि छोटे बेटे कैप्टन राजीव जोशी एयर फोर्स बैंगलुरु में कार्यरत हैं।
    -राजीव जोशी ने बताया, रविवार सुबह के समय पिताजी और मां नोएडा स्थित घर पर मौजूद थीं। पिताजी ने सुबह के समय दैनिक कार्य के बाद खुद चाय बनाकर पी और फिर बेड पर आराम करने के लिए गए थे।
    -कुछ देर बाद जब मां पानी गरम करने के बाद नहाने के लिए उन्हें जगाने गई तो काफी प्रयास के बाद भी वह नहीं उठे। फिर पड़ोसी की मदद से वह उन्हें लेकर सेक्टर 27 स्थित कैलाश अस्पताल पहुंचीं, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर रविवार देर रात बैंगलुरु से वह और सिगापुर से उनके भाई भी नोएडा पहुंचे।
    -पिता की इच्छा थी कि मृत्यु के बाद शरीर का जो भी अंग दूसरे का काम आ सके, उसे दान कर दी जाए। ऐसे में उनकी मौत के बाद मां ने उन लोगों के आने से पहले ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर पिता की दोनों आंखे और पेसमेकर दान कर दी थी।
    -राजीव ने बताया, करीब 14 साल पहले उनके एक मामा का बेटा बिना हेलमेट लगाए स्कूटर लेकर निकला था और सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई थी। इस घटना ने पिताजी को झकझोर दिया था। उसके बाद से ही उन्होंने लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने का बेड़ा उठाया।
    -वो चौराहों पर लाउडस्पीकर और पम्फलेट के जरिए लोगों को जागरूक करते थे। इसके अलावा यातायात पुलिस के कार्यक्रम में हिस्सा लेकर सहयोग करते थे।
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