दिल्ली / अगर निर्भया के हत्यारे फांसी पर लटक चुके होते तो वेटरनरी डॉक्टर की जिंदगी बच जाती: जल्लाद पवन

जल्लाद पवन मेरठ के रहने वाले हैं। जल्लाद पवन मेरठ के रहने वाले हैं।
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जल्लाद पवन मेरठ के रहने वाले हैं।जल्लाद पवन मेरठ के रहने वाले हैं।

  • जल्लाद पवन ने कहा- जब तक ऐसे अपराधियों को सख्त सजा नहीं मिलेगी, क्रूर लोगों में भय पैदा नहीं होगा
  • जल्लाद पवन ने 22 साल की उम्र में पहली बार पटियाला जेल में दी थी फांसी, तब उनके दादा भी मौजूद थे

दैनिक भास्कर

Dec 04, 2019, 02:23 PM IST

नई दिल्ली/ मेरठ. तेलंगाना में वेटरनरी डॉक्टर से गैंगरेप और निर्मम हत्या की घटना से पूरे देश में गुस्सा है। मेरठ में रहने वाले जल्लाद पवन ने बुधवार को कहा, ‘‘अगर निर्भया के हत्यारों को सरकार फांसी पर लटका चुकी होती तो शायद वेटरनरी डॉक्टर बेमौत मरने से बच जाती।’’ 

जल्लाद पवन ने कहा, ‘‘निर्भया के हत्यारों को आखिर तिहाड़ जेल में पालकर रखा ही क्यों जा रहा है? निर्भया कांड के मुजरिम हों या फिर वेटरनरी डॉक्टर के हत्यारे। इनका इलाज जब तक आनन-फानन में नहीं होगा, तब तक यह मुसीबतें समाज में बरकरार रहेंगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अब हम घर में नहीं बैठ सकते हैं। जरूरी है कि जितनी जल्दी हो निर्भया के मुजरिमों को फांसी पर लटकाया जाए। वेटरनरी डॉक्टर के हत्यारों को मुजरिम करार दिलवा दीजिए। हिंदुस्तान में निर्भया और वेटरनरी डॉक्टर के साथ हुए अपराध खुद-ब-खुद बंद हो जाएंगे। जब तक ऐसे जालिमों को मौत के घाट नहीं उतरा जाएगा तब तक बाकी बचे हुए ऐसे क्रूर इंसानों में भला भय कैसे पैदा होगा?’’

मैं एकदम तैयार हूं: जल्लाद पवन
जल्लाद पवन ने कहा, ‘‘मैं एकदम तैयार बैठा हूं। निर्भया के मुजरिमों के डेथ-वारंट मिले और मैं तिहाड़ जेल पहुंच जाऊं। मुझे मुजरिमों को फांसी के फंदे पर टांगने के लिए महज दो से तीन दिन का वक्त चाहिए। सिर्फ ट्रायल करूंगा और अदालत के डेथ वारंट को अमल में ला दूंगा।’’

'चौथी पीढ़ी का मैं इकलौता जल्लाद हूं'
उन्होंने कहा, ‘‘मैं खानदानी जल्लाद हूं। इस काम में मुझे शर्म नहीं आती। मेरे परदादा लक्ष्मण जल्लाद, दादा कालू राम जल्लाद, पिता मम्मू जल्लाद थे। मतलब जल्लादी के इस खानदानी पेशे में मैं अब चौथी पीढ़ी का इकलौता जल्लाद हूं।’’

पवन ने पटियाला जेल में दी थी पहली फांसी
जल्लाद पवन ने बताया कि मैंने पहली फांसी दादा कालू राम जल्लाद के साथ पटियाला सेंट्रल जेल में दो भाइयों को दी थी। उस वक्त मेरी उम्र यही कोई 20-22 साल रही होगी। अब मैं 58 साल का हो चुका हूं। दादा के साथ अब तक में पांच खूंखार अपराधियों को फांसी पर टांग चुका हूं।

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