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प्रियंका मेरठ-मुजफ्फरनगर में मृतकों के परिजन से मिलीं, सपा ने कहा- कांग्रेस का प्रदर्शनों से कोई लेना-देना नहीं

7 महीने पहले
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प्रियंका गांधी को परिजन ने आपबीती सुनाई।
  • प्रियंका सीएए के खिलाफ प्रदर्शनों में हिंसा का शिकार हुए लोगों और उनके परिजन से मिलने बिजनौर और लखनऊ भी जा चुकी हैं
  • शनिवार को मुजफ्फरनगर में मौलाना असद माेहम्मद से मिलीं, असद ने बताया- पुलिस ने मदरसों से जबरन बच्चों को उठाकर पीटा
  • प्रियंका गांधी ने कहा- कांग्रेस 20 दिसंबर को हिंसा में मारे गए नूर मोहम्मद के परिवार की मदद करने की कोशिश करेगी

मुजफ्फरनगर/लखनऊ. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने शनिवार को मेरठ और मुजफ्फरनगर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों में हिंसा का शिकार हुए लोगों और उनके परिजन से मुलाकात की। प्रियंका सबसे पहले मुजफ्फरनगर में हिंसक प्रदर्शन में मारे गए नूर मोहम्मद के घर गईं। उन्होंने पीड़ितों को मदद का भरोसा दिया और कहा कि कांग्रेस पुलिस की अमानवीय कार्रवाई के खिलाफ लड़ई जारी रखेगी। इसके बाद मेरठ के परतापुर में पीड़ितों से मिलीं। उधर, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) में सीएए के विरोध का श्रेय लेने की होड़ लगी है। सपा का कहना है कि कांग्रेस का प्रदर्शनों से कोई लेना-देना नहीं था। प्रदेश में लोकतंत्र बचाने की लड़ाई सिर्फ सपा कार्यकर्ताओं ने लड़ी।

  • प्रियंका ने मुजफ्फरनगर में मौलाना असद मोहम्मद से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली। असद ने बताया कि पुलिस अचानक आई और मदरसे से बच्चों को उठाकर लेकर गई। काफी लोगों को चोटें आई थीं। कई बच्चों को जेल में डाल दिया गया। कुछ को रिहा किया गया तो कुछ अभी जेल में बंद हैं।
  • नूर की पत्नी से मिलने के बाद प्रियंका ने कहा, ''परिवार की कहानी दर्दनाक है। नूर की पत्नी (22 साल) गर्भवती है। उसकी डेढ़ साल की बेटी भी है। वह अब पूरी तरह से अकेली हो गई। हम उसकी हर संभव मदद की कोशिश करेंगे। हमने राज्यपाल को ज्ञापन दिया था। इसमें यह बताने का प्रयास किया है कि पुलिस ने किस तरह प्रदर्शन के दौरान ज्यादती की। हम पीड़ितों की लड़ाई के लिए सड़क पर उतरेंगे। उनके साथ अन्याय नहीं होने देंगे।''

सिर्फ सपा सड़कों पर उतरी, कांग्रेस सुविधाभोगी पार्टी: सपा नेता
सपा नेता राम गोबिंद चौधरी ने कहा कि कांग्रेस का प्रदर्शनों से कोई लेना-देना था ही नहीं तो उसके नेता क्यों गिरफ्तार लोगों और उनके परिजन से मुलाकात कर मदद की पेशकश कर रहे हैं? लोकतंत्र बचाने के लिए सपा ही सड़कों पर उतरती थी। कांग्रेस तो सुविधाभोगी पार्टी रही है। उन्होंने वादा किया- अगर 2022 में उनकी पार्टी सत्ता में आई तो प्रदर्शनों में गिरफ्तार लोगों को लोकतंत्र सेनानी की तरह संविधान रक्षक के तहत पेंशन दी जाएगी। सपा ने ही उत्तर प्रदेश में आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों को लोकतंत्र सेनानी पेंशन देने की शुरुआत की थी।

भाजपा ने कहा- दोनों पार्टियों का असली चेहरा सामने आया
इस पर भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा- कानून के विरोध में हिंसक प्रदर्शन करने वालों को एक पार्टी पेंशन देने की बात कह रही है तो दूसरी पार्टी कानूनी सहायता देने की। इनका असली चेहरा जनता के सामने आ चुका है। कांग्रेस और सपा वोट के लिए देश को बांटना चाहती हैं।

उत्तर प्रदेश में हिंसक प्रदर्शन में 19 लोगों की मौत हुई

  • इससे पहले 24 दिसंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को मेरठ जाने से रोक दिया गया था। तब दोनों नेता यहां पीड़ितों से मिलना चाहते थे। प्रियंका इससे पहले लखनऊ और बिजनौर में हिंसा में प्रभावित हुए लोगों और उनके परिजन से मुलाकात कर चुकी हैं।
  • सीएए के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों में उत्तर प्रदेश में 19 लोगों की मौत हुई थी। मेरठ में 5 लोग मारे गए थे। मुजफ्फरनगर में 20 दिसंबर को हिंसा में नूर मोहम्मद की जान चली गई थी। उग्र भीड़ ने अस्थाई पुलिस चौकी फूंक दी थी। गोलीबारी में तीन लोग घायल हुए थे।
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