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शार्दुल ने नेशनल शूटिंग में एक ही दिन जीते थे 4 गोल्ड; शूटर बनने से पहले क्रिकेटर, शटलर बनना चाहते थे

6 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया एक साल बाद बैडमिंटन में भी हाथ आजमाया

Dainik Bhaskar

Aug 23, 2018, 07:18 PM IST
मेरठ में अच्छी शूटिंग रेंज नहीं होने की वजह से शार्दुल को प्रैक्टिस के लिए रोज दिल्ली जाना पड़ता था। मेरठ में अच्छी शूटिंग रेंज नहीं होने की वजह से शार्दुल को प्रैक्टिस के लिए रोज दिल्ली जाना पड़ता था।

मेरठ. शूटर शार्दुल विहान ने एशियाड में सिल्वर पर निशाना लगाया है। मेरठ के रहने वाले 15 साल के शार्दुल पुरुषों की डबल ट्रैप स्पर्धा में मेडल जीता है। शार्दुल की जीत के बाद उनके पिता दीपक विहान ने बताया कि मेरठ में अच्छी शूटिंग रेंज नहीं होने की वजह से शार्दुल को प्रैक्टिस के लिए रोज दिल्ली जाना पड़ता था। इसके लिए उसे रोज सुबह 4 बजे उठना पड़ता है। दिल्ली आने जाने में उसे रोज करीब 100 किमी का सफर करना पड़ता है। सफर के दौरान उसे थकान भी होती है लेकिन वह अपनी प्रैक्टिस पर नहीं पड़ने देता है।

शूटिंग से पहले क्रिकेट और बैडमिंटन में आजमाया हाथ: दीपक ने बताया कि शार्दुल क्रिकेटर बनना चाहता था, इसलिए उसे 6 साल की उम्र में क्रिकेट की प्रैक्टिस के लिए भेजना शुरू कर दिया था। सालभर प्रैक्टिस करने के बाद एक दिन शार्दूल ने बताया कि उसे सबसे पीछे खड़ा किया जाता है और बैटिंग भी बाद में देते हैं। इसके बाद उसे क्रिकेट की जगह बैडमिंटन की प्रैक्टिस कराना शुरू कराया। एक दिन गांव से जब शार्दुल स्टेडियम में प्रैक्टिस के लिए पहुंचा तो वह थोड़ा लेट हो गया। जिस पर उसके कोच ने उसे वापस घर भेज दिया।

राइफल उठाने पर कोच हुए थे शूटिंग सिखाने को तैयार: शार्दुल के पिता ने बताया कि बैडमिंटन कोच द्वारा घर भेजे जाने के बाद उसी दिन मैं शार्दुल को लेकर राइफल एसोसिएशन के वेदपाल सिंह से मिला। उन्होंने उसकी कम उम्र को देखकर थोड़ा इंतजार करने को कहा। शार्दुल शरीर से थोड़ा हेल्दी था, इसलिए वह कम उम्र में भी थोड़ा बड़ी उम्र का दिखता था। उन्होंने शार्दुल से पास ही रखी एक राइफल उठाकर टारगेट की ओर निशाना लगाने के लिए कहा। शार्दुल ने वह राइफल आराम से उठाकर टारगेट की ओर तान दी। जिससे देखकर वेदपाल सिंह ने उसे प्रैक्टिस कराने की हामी भर दी।

पहले प्रयास में ही जीता सिल्वर: साल 2012 में शार्दुल जब 9 साल का था तो उसने नार्थ जोन प्रतियोगिता में अपना पहला गेम खेला। इसमें उसने सिल्वर मेडल जीत कर सबका दिल जीत लिया। उसके बाद उसे नेशनल की तैयारी शुरू कराई गई। लेकिन नेशनल में कम से कम 12 साल का खिलाड़ी ही खेल सकता था, जिस कारण शार्दुल अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी नेशनल में नहीं खेल सका।

नेशनल शूटिंग में एक ही दिन जीते थे 4 गोल्ड : शार्दुल पिछले साल तब सबकी नजरों में आए थे, जब उन्होंने नेशनल शूटिंग चैम्पियनशिप में एक ही दिन में 4 गोल्ड मेडल जीत लिए थे। तब उन्होंने सीनियर और जूनियर दोनों वर्गों में पुरुष डबल ट्रैप में एकल और टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते थे। सीनियर वर्ग में उन्होंने दुनिया के नंबर वन डबल ट्रैप शूटर अंकुर मित्तल को भी पीछे छोड़ दिया था।

नेशनल शूटिंग में एक ही दिन जीते थे 4 गोल्ड नेशनल शूटिंग में एक ही दिन जीते थे 4 गोल्ड
पिता दीपक ने बताया कि शार्दुल क्रिकेटर बनना चाहता था। पिता दीपक ने बताया कि शार्दुल क्रिकेटर बनना चाहता था।
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मेरठ में अच्छी शूटिंग रेंज नहीं होने की वजह से शार्दुल को प्रैक्टिस के लिए रोज दिल्ली जाना पड़ता था।मेरठ में अच्छी शूटिंग रेंज नहीं होने की वजह से शार्दुल को प्रैक्टिस के लिए रोज दिल्ली जाना पड़ता था।
नेशनल शूटिंग में एक ही दिन जीते थे 4 गोल्डनेशनल शूटिंग में एक ही दिन जीते थे 4 गोल्ड
पिता दीपक ने बताया कि शार्दुल क्रिकेटर बनना चाहता था।पिता दीपक ने बताया कि शार्दुल क्रिकेटर बनना चाहता था।
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