बुलंदशहर लोकसभा सीट / भाजपा का गढ़ रही ये सीट; इस बार भोला सिंह के सामने किला बचाने की चुनौती

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 07:00 AM IST



up news bulandshahr loksabha election 2019 stronghold of bjp Challenge to save the seat Bhola Singh
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  • भाजपा ने मौजूदा सांसद भोला सिंह पर विश्वास जताते हुए उन्हें मैदान में उतारा है
  • शुरुआती पांच चुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज कराई थी, भाजपा भी यहां से 5 बार जीत चुकी है
  • 2019 के लोकसभा चुनावों में यहां से 13 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं

बुलंदशहर. उत्तरप्रदेश की बुलंदशहर लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान है। यहां मुख्य मुकाबला भाजपा के सांसद और उम्मीदवार भोला सिंह, कांग्रेस के बंशी सिंह और बसपा के योगेश वर्मा के बीच है। यहां 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। बीते साल दिसंबर माह में कथित गोकशी के बाद यहां के स्याना इलाके में भड़की हिंसा का मामला पूरे देश में गूंजा था।

 

शुरुआत के चुनाव में कांग्रेस का गढ़ रही यह सीट

आजादी के बाद 1952 में हुए पहले आम चुनाव में बुलंदशहर सीट पर कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी। इसके बाद 1971 तक हुए पांच चुनाव में कांग्रेस ने लगातार जीत दर्ज की। लेकिन उसके बाद यहां पर मतदाताओं ने अन्य पार्टियों के सिर पर जीत का सेहरा बांध। 1977 में भारतीय लोक दल, 1980 में जनता दल ने यहां कांग्रेस को करारी मात दी। लेकिन, 1984 में कांग्रेस वापसी करने में कामयाब रही। हालांकि 1989 के बाद से कांग्रेस यहां पर वापसी के लिए संघर्ष कर रही है।

 

1989 चुनाव में जनता दल ने जीत दर्ज कराई। इसके बाद 1991 से लेकर 2004 तक लगातार पांच बार भाजपा ने जीत हासिल की। 2009 में यहां समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कमलेश वाल्मिकी ने बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन 2014 में देश में चली मोदी लहर का असर यहां भी दिखा और भाजपा को जीत मिली। 

 

बुलंदशहर में 77 फीसदी आबादी हिंदू

2014 में लोकसभा चुनाव के अनुसार इस सीट पर 17 लाख 36 हजार वोटर थे। यहां करीब 77 फीसदी हिंदू और 22 फीसदी मुस्लिम आबादी है। यहां की 5 विधानसभा अनूपशहर, बुलंदशहर, डिबाई, शिकारपुर और स्याना में 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कब्जा जमाया था। 

 

2014 का परिणाम
2014 में इस सीट पर भाजपा के भोला सिंह ने प्रचंड जीत हासिल की थी। चुनाव में भोला सिंह को 60 फीसदी करीब 6 लाख वोट मिले थे। जबकि, बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप कुमार जाटव को 1 लाख 82 हजार वोट मिले थे। तब सिर्फ 58 फीसदी मतदान हुआ था।

 

अब तक हुए चुनावों पर नजर- 

साल जीते
1952 रघुवर दयाल (कांग्रेस)
1957 रघुवर दयाल (कांग्रेस)
1967 एसपी सिंह (कांग्रेस)
1971 सुरेंद्र पाल सिंह (कांग्रेस)
1977 महमूद हसन खान (भारतीय लोकदल)
1980 महमूद हसन खान (जनता पार्टी सेक्युलर)
1984 सुरेंद्र पाल (कांग्रेस)    
1989 सरवर हुसैन (जनता दल)
1991 छत्रपाल (भाजपा)
1996 छत्रपाल (भाजपा)
1998 छत्रपाल (भाजपा)
2004 कल्याण सिंह (भाजपा)
2009 कमलेश (सपा)
2014 भोला सिंह (भाजपा)

 

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