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HC की बड़ी खबरे: हाईकोर्ट में Bed से पहले टीईटी पास करने वालों की अपॉइंटमेंट को चुनौती

53 अन्य लोगों की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति सुनील कुमार सुनवायी कर रहे हैं।

Danik Bhaskar | Nov 24, 2017, 09:23 PM IST
याचिका में कुछ चयनित अभ्यर्थियों को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिका में कुछ चयनित अभ्यर्थियों को भी पक्षकार बनाया गया है।

इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गणित और विज्ञान के 2933 सहायक अध्यापक भर्ती मामले में उन अभ्यर्थियों की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। जिन्होंने बीएड की फाइनल डिग्री हासिल करने के पहले टीईटी 2011 उत्तीर्ण कर लिया था और अब चयनित होकर नौकरी कर रहे हैं। 5 दिसम्बर को होगी सुनवाई...

- प्रभात कुमार वर्मा और 53 अन्य लोगों की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति सुनील कुमार सुनवायी कर रहे हैं। कोर्ट इस मामले पर 5 दिसम्बर को सुनवाई करेगी।
- याचीगण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, सिद्धार्थ खरे, ए.के त्रिपाठी और प्रतिपक्षियों की ओर से अधिवक्ता अनिल सिंह बिसेन पक्ष रख रहे हैं। याचिका में कुछ चयनित अभ्यर्थियों को भी पक्षकार बनाया गया है।

# NTPC मामले में सीबीआई या न्यायिक जांच व मुआवजा नीति को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार से जवाब-तलब

 

 

 

इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनटीपीसी ऊंचाहार में बॉयलर फटने और आग लगने की घटना की सीबीआई जांच कराने। साथ ही, मृत और घायलों को मुआवजा देने की सरकारी नीति बनाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर केन्द्र व राज्य सरकार से 3 हफ्ते में जवाब मांगा है। 3 हफ्ते बाद होगी अगली सुनवाई...

 

 

- यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डी.बी भोंसले तथा न्यायमूर्ति एम.के गुप्ता की खण्डपीठ ने अधिवक्ता विनोद कुमार की याचिका पर दिया है।
- याचिका पर भारत सरकार के अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी और राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने पक्ष रखा।
- याची का कहना है कि हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराई जाय। ताकि भविष्य में अधिकारियों की लापरवाही के कारण कर्मचारियों की मौत रोकी जा सके।
- ऊंचाहार थर्मल पावर प्लान्ट के छठे बॉयलर प्लान्ट में ब्लास्ट होने के चलते विगत महीने भीषण आग लग गई। जिसमें एजीएम संजीव कुमार सहित 33 कर्मियों की मौत हो गई थी और 65 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
- याची का कहना है कि घायलों को 10 लाख और सामान्य रूप से घायलों को 2 लाख रुपए मुआवजा दिया जाय। भविष्य में संवेदनशील प्रतिष्ठानों में दुर्घटना पर स्टैण्डर्ड  मेंटीनेन्स पालिसी बनायी जाय। ताकि मुआवजा देने में भेदभाव न हो और समान रूप सभी पीड़ितों को मुआवजा मिल सके। याचिका की सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी।