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..तो इसलिए न‍िकाय चुनाव मैदान में उतरे CM योगी, पढ़ें 8 तर्क

पहले चरण का मतदान दो दिन बाद संपन्न हो जाएगा, लेकिन इस बार चुनाव कुछ मायनों में अलग साबित होगा।

Parvez Ahmad | Last Modified - Nov 20, 2017, 07:10 PM IST

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    निकाय चुनाव में प्रचार के लिए सीएम योगी ने पार्टी की कमान खुद संभाली है।

    लखनऊ.यूपी में नगरीय निकाय चुनाव के पहले दौर की वोटिंग जारी है। यह पहला फेज है। इसके बाद 26 और 29 नवंबर को दो और फेज होंगे। इस बार के निकाय चुनाव में कुछ बातें नई हैं। कुछ नए नगर निगम शामिल किए गए हैं। सभी बड़ी पार्टियां अपने सिंबल पर चुनाव लड़ रही हैं। आमतौर पर निकाय चुनाव में सीएम कैंपेन नहीं करते। लेकिन योगी आदित्यनाथ पूरी ताकत से इलेक्शन कैंपेन कर रहे हैं। उन्होंने कई रैलियां की हैं और कई करने वाले हैं। सवाल ये है कि योगी लोकल बॉडी के इलेक्शन पर इतना फोकस क्यों कर रहे हैं। मोटे तौर पर इसकी 8 वजहें सामने आती हैं।

    1) योगी पर यूपी असेंबली इलेक्शन में बीजेपी के शानदार परफॉर्मेंस को दोहराने का दबाव है। इसलिए कैंपेन की कमान वो खुद संभाल रहे हैं।

    2) सीएम बनने के बाद योगी के लिए पहला बड़ा चुनाव है। अगर वो पहले इम्तिहान में पास होते हैं तो यह बीजेपी के लिए 2019 की तरफ बेहतर इशारा होगा। लोकसभा चुनाव में जीत का एक रास्ता निकाय चुनाव से भी होकर गुजरता है।

    3) योगी नरेंद्र मोदी की राह पर चल रहे हैं। मोदी जब गुजरात के सीएम थे तो वो भी निकाय चुनाव में कैंपेन करते थे। मायावती, अखिलेश, मुलायम और राजनाथ ने कभी निकाय चुनाव के लिए कैंपेन नहीं किया था।

    4)यूपी असेंबली इलेक्शन के नतीजों से साफ हो गया था कि लोगों ने नोटबंदी का समर्थन किया। अब जीएसटी का मुद्दा भी है। बीजेपी ने निकाय चुनाव के लिए जिस तरह से कैंडिडेट उतारे हैं, उससे लगता है कि पार्टी कारोबारियों को अपने फेवर में लाना चाहती है।

    5) निकाय चुनावों में अब तक बीजेपी को बेहतरीन नतीजे मिलते आए हैं। ज्यादातर नगरनिगमों में उसके मेयर है। पिछली बार नगर निकाय चुनावों में से 12 नगरनिगमों में 10 में बीजेपी के मेयर जीते थे। योगी पर इस प्रदर्शन को फिर कर दिखाने का मौका और दबाव दोनों हैं।

    6)2012 के असेंबली इलेक्शन में बीजेपी तीसरे नंबर पर थी। सपा सरकार में थी। लेकिन उसने निकाय चुनाव को हल्के में लिया और पिछले विधानसभा चुनाव में उसे करारी हार मिली। बीजेपी इससे सबक लेकर मैदान में उतरी है। शायद योगी इसीलिए कैंपेन पर इतना ध्यान दे रहे हैं।

    7)सभी पार्टियां अपने सिंबल पर चुनाव लड़ रही हैं। इसलिए इन्हें मिनी असेंबली इलेक्शन भी कहा जा रहा है। विरोधी असेंबली इलेक्शन में मिली हार का बदला लेना चाहते हैं। इसलिए, योगी खुद मैदान में पूरी ताकत से मौजूद हैं।

    8)कुछ सीटों जैसे गोरखपुर और फूलपुर में बाई-इलेक्शन होने हैं। गोरखपुर से योगी जबकि फूलपुर से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का नाम जुड़ा है। इसलिए भी योगी पूरी मेहनत से मैदान में हैं।

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    सीएम योगी रोज 2 से 3 रैलियां कर रहे हैं।

    बेपरवाह भाजपा
    - यह जानना ज्यादा दिलचस्प है कि अन्य विपक्षी पार्टियां जहां इस चुनाव में जुबानी तीर चला रही हैं, वहीं भाजपा बिना किसी बात पर ध्यान दिए अपने काम में जुटी है।
    -सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि भाजपा अपनी खराब स्थिति के कारण डरी हुई है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में यह पहला मौका है जब कोई मुख्यमंत्री स्थानीय निकाय चुनाव में प्रचार अभियान में उतरा हो और चुनावी सभाओं को संबोधित कर रहा हो।

    - उनका यह भी कहना है कि पुरानी परंपरा को देखते हुए स्थानीय निकाय के प्रचार अभियान से वरिष्ठ नेता दूर हैं। दूसरी ओर निकाय चुनाव को लेकर अन्य दल भी कमर कस रहे हैं।

    - अखिलेश यादव को अपने द्वारा कराए गए विकास कार्यों पर भरोसा है। वह कहते भी हैं कि अगर लखनऊ मेट्रो, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, समाजवादी पेंशन योजना, समाजवादी आवास योजना समेत उनकी पिछली सरकार के तमाम विकास कार्यों को देखते हुए वोट पड़े तो ज्यादातर नगर निकायों में पार्टी के प्रत्याशी चुने जाएंगे।


    सपा के राष्ट्रीय सच‍िव ने कहा- प्रचार मैदान में उतरने का अख‍िलेश का कोई कार्यक्रम नहीं
    - सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी का कहना है कि फिलहाल अखिलेश के चुनाव प्रचार मैदान में उतरने का कोई कार्यक्रम नहीं है। उधर, कांग्रेस यह मानती है कि यह पार्टी नगरनिगमों, नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों में अपने प्रत्याशी खड़े करती रही है। लेकिन इस बार यह चुनाव बेहद अहमियत रखते हैं, क्योंकि इसके बाद सीधे 2019 का लोकसभा चुनाव होगा, लिहाजा निकाय चुनाव से पार्टी का आधार मजबूत होगा।

    - चुनाव में पार्टी के राज्यस्तरीय नेता प्रचार करेंगे। जहां जरूरत पड़ेगी, वहां केंद्रीय नेताओं से मदद ली जाएगी। कांग्रेस ऐसा कर भी रही है। उसके भी कई बड़े नेता मैदान में उतरे हुए हैं। बसपा भी इस चुनाव के महत्व को समझ रही है, इसलिए पहली बार वह अपने सिंबल पर निकाय चुनाव लड़ रही है। उधर, दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में पहली बार नगर निकाय चुनाव में ताल ठोक रही है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली यह पार्टी इन स्थानीय चुनावों को राज्य में अपनी सियासी पारी की औपचारिक शुरुआत मान रही है।


    मुस्तैद भाजपा
    अन्य पार्टियां चाहे जो भी कहें या चुनाव को जिस भी रूप में ले रही हों, पर भाजपा इसे लेकर जरा भी बेपरवाह नहीं है। हर स्तर पर वह इस चुनाव में फतह हासिल करने का प्रयास कर रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यही उठ रहा है कि चुनाव तो पहले भी होते रहे हैं और निकाय चुनावों में भाजपा का ही डंका बजता रहा है, लेकिन इस बार ऐसा क्या है कि परंपरा तोड़कर खुद मुख्यमंत्री को प्रचार के लिए उतरना पड़ा है।

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Web Title: Cm Yogi Adityanath Campaigns For Body Elections In Uttar Pradesh
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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