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कुछ सेकेंड की लापरवाही से हो सकता है बड़ा रेल हादसा, एक्सपर्ट ने बताए ये कारण

चित्रकूट के पास वास्को डि गामा एक्सप्रेस के 13 डिब्बे पटरी से उतर गए हैं।

Danik Bhaskar | Nov 24, 2017, 10:07 AM IST
हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि 12 घायल हैं। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि 12 घायल हैं।

लखनऊ. यूपी-एमपी बॉर्डर पर मानिकपुर रेलवे स्टेशन के पास वास्कोडिगामा-पटना एक्सप्रेस (12741) शुक्रवार सुबह पटरी से उतर गई। हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई और 13 जख्मी हो गए हैं। एनसीआर के सीपीआरओ गौरव बंसल ने बताया- "रिलीफ ट्रेन पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक ट्रैक टूटा हुआ था।" हादसे के बाद रिटायर्ड सीनियर डीओएम बीके गुप्ता ने DainikBhaskar.com को हादसे के लिए कई वजह बताई।मौसम ही समस्या हो सकती है

-सीनियर डीओएम बीके गुप्ता के मुताबिक- रेलवे में हर हादसे के बाद एक लंबी जांच प्रक्रिया हेाती है। उसकी रिपोर्ट आने से पहले दूसरा हादसा हो जाता है। इस पर रेलवे के उच्च अधिकारियों और मैनेजमेंट को सोचना होगा।
-ठंड के मौसम में गलन या कोहरा ज्यादा पड़ने की वजह से पटरियों में लगने वाली "की" कमजोर होने के कारण चटक जाती है। जब ट्रेन स्पीड से निकलती है तो कभी-कभी वो टूट जाती है और हादसे हो जाते हैं। ऐसे मौसम में लोको पायलट को लिमिटेड स्पीड रखते हुए और मौसम को समझते हुए गाड़ी चलाने के लिए कहा जाता है।

ड्राइवर और ऑपरेटिंग टीम की बड़ी लापरवाही हो सकती है


-पूरी ट्रेन कंट्रोल रूम में बैठे ऑपरेटर और लोको पायलट भरोसे ही चलती है। इनमें से किसी के भी गलत को-आर्डिनेशन से इस तरह से हादसे हो सकते हैं। रात के वक्त कुछ सेकेंड्स की लापरवाही से भी बड़ा हादसा हो सकता है।

तीसरे और चौथे दर्जे के कर्मचारियों की कमी


-उन्होंने बताया- "मैं खुद ए ग्रेड अधिकारी रहा हूं लेकिन मुझे पता है कि जबतक हमारे तीसरे और चौथे दर्जे के स्टॉफ की कमी रहेगी हम ऐसे हादसों को रोक नहीं पाएंगे।"
-वर्किंग प्रोफेशनल्स यानी कर्मचारियों की संख्या में लगातार हो रही कमी से इस तरह की घटनाओं को रोकने में हम हमेशा नाकाम हो रहे हैं। हमारा तीसरा या चौथे दर्जे का स्टॉफ ही निचले स्तर पर जाकर काम करता है, इस वक्त उनपर जरूरत से ज्यादा प्रेशर है क्योंकि वर्किंग स्टाफ कम है।
-पहले रेलवे में पटरियों पर कम से कम 24 घंटे में एक बार हर रोज इंस्पेक्शन होता था, कम से कम रात को तो एक बार स्टॉफ देख लेता था, लेकिन अब उनपर बढ़ते ओवर लोड पर वो नियमित इंस्पेक्शन नहीं कर पाते हैं। जिससे कहीं न कहीं कमी रह जाती है, और हादसे होते हैं।
-अब हम टेक्नोलॉजी में तो आगे बढ़े हैं लेकिन हमने अपने स्टॉफ की अहमियत कम नहीं आंकनी चाहिए। रेलवे ने अभी कुछ दिन पहले ही चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों को बंद करके कांट्रैक्ट पर दे दिया गया है। जिससे विश्वसनीयता भी भंग होती है। अब आने वाली भयानक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्या होगा।
-किस रूट में पहले गांव पहले आ रहा है इस बात को बताने का कोई संकेत नहीं है, किसी कट की जानकारी नहीं होती हैं। इसमें डेंजरजोन पर सांकेतिक लगाना होगा।
-चित्रकूट, बांदा, कर्वी, मानिकपुर, एरिआ पूरी तरह से यूपी और एमपी को बार्डर एरिआ है। वो एक प्रकार से बीहड़ों का गढ़ भी रहा है। ऐसे में इससे इंकार नहीं कर सकते हैं की वहां पर किसी ने कोई साजिश रची हो। इसकी भी जांच होगी तो बात सामने आएगी।

एनसीआर के सीपीआरओ गौरव बंसल ने बताया- रिलीफ ट्रेन पहुंच चुकी है। एनसीआर के सीपीआरओ गौरव बंसल ने बताया- रिलीफ ट्रेन पहुंच चुकी है।