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स्माॅग को हटानें के लिए आर्टिफिशियल बारिश, एक्सपर्ट बोले- EIA टेस्ट जरूरी वरना पड़ेगा बैड इफेक्ट

लखनऊ में गुरुवार को पानी के टैंकर और फायर बिग्रेड की गाड़ियों से शहर के कई इलाकों में पानी का छ‍िड़काव किया गया।

Dainik Bhaskar

Nov 16, 2017, 09:46 PM IST
गुरुवार को पॉल्यूशन कम करने के लिए पानी का छिड़काव किया गया था। गुरुवार को पॉल्यूशन कम करने के लिए पानी का छिड़काव किया गया था।

लखनऊ. राजधानी में बढ़ते प्रदूषण और स्माॅग को हटाने के लिए सरकार नए-नए तरीके अपना रही है। इसके तहत गुरुवार को पानी के टैंकर और फायर बिग्रेड की गाड़ियों से शहर के कई इलाकों में पानी का छ‍िड़काव किया गया। DainikBhaskar.com को एनवायरनमेंट एक्सपर्ट डॉ. काशिफ इमदाद ने बताया, ''पहले इसका एनवायरनमेंट असेसमेंट जरूरी है, कृत्रिम बारिश कराने से फायदा कम नुकसान ज्यादा हो सकता है।'' बता दें, मंगलवार रात प्रमुख सचिव अरविंद कुमार की अध्यक्षता में आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट की एक टीम ने यूपी प्रदूषण और पर्यावरण विभाग के साथ मिलकर सीएम योगी को आर्टिफिशियल बारिश पर प्रेजेन्टेशन दिया था। जिसका आज प्रैक्टिकल देखने को मिला। क्या है आर्टिफिशियल बारिश या क्लाउड रेन?...


- शहर में फैले स्माॅग को कम करने और बढ़ने से रोकने के लिए आर्टिफिशियल बारिश कराई जाती है।
- इसमें पानीं बहुत छोटे-छोटे बूंदों में बारिश की तरह से ही गिरता है। जिससे हवा में मौजूद प्रदूषण के कण पानी की बूंदों के साथ नींचे आ जाते हैं, और हवा में फैली धुंध कम हो जाती है।

किस प्रकार से स्मॉग पर नियंत्रण किया जा सकता है

- पहली जिसमें पानी को र्फोस के साथ छोड़ा जाता है। जिसमें फायर बिग्रेड की गाड़ियों के द्वारा नीचे से या हवाई जहाज के जरिए ऊपर से पानी फौब्वारों से छोड़ा जाते हैं।
- दूसरा केमिकल के जरिए। जिसमें केमिकल्स को हवा में ऊंचाई पर छोड़कर क्लाउड सीडिंग के जरिए बारिश कराना।
- इस तरह की बारिश के लिए मुख्यत: दो प्रकार के केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। सिल्वर आयोडाइड और ड्राईआईज।
- इन केमिकल्स को बहुत ऊंचाई से छोड़ा जाता है। जिससे इनके नमी के कण संघनित होकर पानी के कणों का निर्माण करते हैं, और हवा के साथ बारिश के रूप में नीचे गिरते हैं।

सिल्वर आयोडाइड और ड्राईआईज क्या हैं?
-सिल्वर आयोडाइड या ड्राईआईज का इस्तेमाल करके आर्टिफिशियल बारिश कराई जाती है।

-इस प्रकार के केमिकल्स को मिसाइल से बादलों पर छिड़कने से आर्टिफिशियल बारिश कराई जा सकती है

एनवायरनमेंट असेसमेंट टेस्ट जरूरी वरना फायदा से ज्यादा होगा नुकसान
- आर्टिफिशियल रेन के लिए केमिकल्स का यूज करने से पहले 'एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट' जरूर होना चाहिए। ताकि कहीं पर भी इसका साइड इफेक्ट न हो।
- साथ ही पब्लिक हेल्थ, एनवायरनमेंट, वाइल्ड लाइफ से जुड़े हर तरह के एक्सपर्ट से बात करनीं चाहिए। पूरी तैयारी के बाद ही कुछ करना चाहिए।
- इसका सीधा असर वाटर क्वालिटी, एअर क्वालिटी पर हो सकता है। क्योंकि ड्राईआइज में सीओ 2 होता है, जो कि पर्यावरण के लिए खतरनाक है। फिर इसके साथ सिल्वर आयोडाइड की केमिकल बांडिंग हार्मफुल हो सकती है।

इसका आॅप्शन क्या है?
- साधारण तरीके से पानी का छिड़काव करने पर कोई नुकसान नहीं है। इसे तो कराया जा सकता है, लेकिन केमिकल्स के जरिए आर्टिफिशियल रेन करवाने से पहले हमें दिसंबर में होने वाली विंटर रेनफाॅल का वेट करना चाहिए।
- दिसंबर में पश्चिमी विक्षोभ के कारण विंटर सीजन में बारिश होती है। कभी-कभी तेज हवा चलने से भी प्राॅब्लम साल्व हो जाती है।
- बता दें, इंडिया में 1970 के दशक से ही आर्टिफिशियल रेन तमिलनाडु, राजस्थान और महाराष्ट्र में कराई गई है। लेकिन इसके साइड इफेक्ट का ठीक से अध्ययन नहीं हुआ है।

कौन हैं डॉ. काशिफ इमदाद ?
-डॉ. काशिफ इमदाद पीपीएन कॉलेज कानपुर में ज्योग्राफी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। यूएनडीपी और राज्य सरकार के लिए लखनऊ का डिजास्टर मैनेजमेंट प्लॉन बना चुके हैं।
-हाल ही में इन्हें यूपी के अर्बन ट्रांसपोर्टेशन एंड स्मार्ट सिटी के एक्सपर्ट पैनल में शामिल किया गया है। अभी तक क्लाइमेट चेंज, डिजास्टर मैनेजमेंट और अर्बन डेवलपमेंट पर रिर्सच कर रहे हैं। इसके अलावा ये इंटरनेशनल जर्नल आॅफ अप्लाइड रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस के एडिटर हैं।

इस तरीके से आर्टिफिशयल बारिश कराई जाती है। इस तरीके से आर्टिफिशयल बारिश कराई जाती है।
प्रदूषण और स्माॅग को हटानें के लिए पानी के टैंकर और फायर बिग्रेड की गाड़ियों से शहर के कई इलाकों में पानी का छ‍िड़काव किया गया। प्रदूषण और स्माॅग को हटानें के लिए पानी के टैंकर और फायर बिग्रेड की गाड़ियों से शहर के कई इलाकों में पानी का छ‍िड़काव किया गया।
डॉ. काशिफ इमदाद जलवायु परिर्वतन के एक्सपर्ट हैं और पीपीएन कॉलेज कानपुर में भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। डॉ. काशिफ इमदाद जलवायु परिर्वतन के एक्सपर्ट हैं और पीपीएन कॉलेज कानपुर में भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
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गुरुवार को पॉल्यूशन कम करने के लिए पानी का छिड़काव किया गया था।गुरुवार को पॉल्यूशन कम करने के लिए पानी का छिड़काव किया गया था।
इस तरीके से आर्टिफिशयल बारिश कराई जाती है।इस तरीके से आर्टिफिशयल बारिश कराई जाती है।
प्रदूषण और स्माॅग को हटानें के लिए पानी के टैंकर और फायर बिग्रेड की गाड़ियों से शहर के कई इलाकों में पानी का छ‍िड़काव किया गया।प्रदूषण और स्माॅग को हटानें के लिए पानी के टैंकर और फायर बिग्रेड की गाड़ियों से शहर के कई इलाकों में पानी का छ‍िड़काव किया गया।
डॉ. काशिफ इमदाद जलवायु परिर्वतन के एक्सपर्ट हैं और पीपीएन कॉलेज कानपुर में भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।डॉ. काशिफ इमदाद जलवायु परिर्वतन के एक्सपर्ट हैं और पीपीएन कॉलेज कानपुर में भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
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