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जनहित के नाम पर डॉक्टरों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने से नहीं रोक सकती सरकार: HC

हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (बीआरएस) पर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है।

Danik Bhaskar | Nov 29, 2017, 09:16 PM IST

लखनऊ. हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने स्वैच्छिक रिटायरमेंट पर एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्पष्ट किया है, वर्तमान सरकारी नियमों में नियुक्ति प्राधिकरी को यह अधिकार नहीं है कि जनहित के नाम पर किसी सरकारी कर्मी को स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने से रोक सके। कोर्ट ने इस संबंध में दाखिल कुछ सरकारी डॉक्टरों की याचिकाओं पर दिए आदेश में कहा, ''राज्य सरकार को यह भी जानकारी करनी चाहिए कि सरकारी डॉक्टर आए दिन स्वैच्छिक रिटायरमेंट क्यों ले रहे हैं।''

3 याचिकाओं को किया नामंजूर...


- यह आदेश जस्टिस डीके अरोड़ा और जस्टिस रजनीश कुमार की खंडपीठ ने डॉ आचल सिंह व चार अन्य डॉक्टरों की ओर से दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर पारित किया। 3 याचियों की स्वैच्छिक रिटायरमेंट के प्रार्थना पत्र को सरकार ने नामंजूर कर दिया था जबकि 2 का मामला समय से लंबित रखा गया है।
- याचियों की ओर से अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा व नूतन ठाकुर इत्यादि ने दलील दी कि मूल नियमावली के अनुसार एक सरकारी कर्मचारी 45 साल की आयु पूरी करने के उपरांत अथवा 20 साल की नौकरी करने के पश्चात स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले सकता है।
- जबकि याचियों के प्रार्थना पत्र को इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया है कि डॉक्टरों की काफी कमी है। राज्य सरकार की ओर से फैसले का बचाव करते हुए कहा गया कि नियुक्ति प्राधिकारी को स्वैच्छिक रिटायरमेंट के प्रार्थना पत्र को मंजूर अथवा नामंजूर करने का अधिकार है।
- हालांकि कोर्ट सरकार के दलील से सहमत नहीं हुई। कोर्ट ने कहा, ''नियमों में नियुक्ति प्राधिकरी को यह अधिकार नहीं है कि जनहित के नाम पर किसी सरकारी कर्मी को स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने से रोक सके।''
- कोर्ट ने स्वास्थ्य सेवा पर नसीहत देते हुए कहा, ''सरकार को आम लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं तथा बेहतर सरकारी अस्पतालों की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करने चाहिए और यह भी जानकारी करनी चाहिए।''
- आखिर सरकारी डॉक्टर स्वैच्छिक रिटायरमेंट क्यों ले रहे हैं। कोर्ट ने डॉक्टरों से प्रशासकीय कार्य लिए जाने के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने डॉक्टरों के लिए ग्रेडिंग सिस्टम भी लाने की आवश्यकता पर बल दिया।
- कोर्ट ने कहा, ''डॉक्टरों को सेमिनार आदि में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। सेमिनारों आदि जगहों पर शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले डॉक्टरों को कुछ पॉइंट्स दिए जाने चाहिए जो उनके प्रमोशन में काम आएं।''