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जब डाकुओं के चंगुल से पतियों को छुड़ाने पत्नियों ने भरी हुंकार, पढ़ें क्या हुआ

मानिकपुर स्टेशन के पास 24 नवंबर को वास्को-पटना एक्सप्रेस पटरी के टूटे होने के कारण डीरेल हो गई।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 25, 2017, 07:57 PM IST

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    करीब 1986-87 में ददुआ गैंग ने रेलवे के अफसरों को किडनैप कर लिया था।

    लखनऊ. यूपी-एमपी के बार्डर एरिया में मानिकपुर स्टेशन के पास 24 नवंबर को वास्को-पटना एक्सप्रेस पटरी के टूटे होने के कारण डीरेल हो गई। रेलवे के एक्सपर्ट के मुताबिक, लापरवाही के अलावा हादसे के पीछे किसी की साजिश भी हो सकती है। DainikBhaskar.com से बातचीत में चित्रकूट के सोशल वर्कर गोपाल ने मानिकपुर से जुड़े एक किस्से के बारे में बताया। जब किडनैप हुए रेलवे के इंजीनियर्स को उनकी पत्नियों ने छुड़वाया था।

    अगर इंजीनियर्स किडनैप न होते, तो बदल जाती मानिकपुर की तस्वीर...
    - चित्रकूट के सोशल वर्कर 'गोपाल भाई' ने बताया, उस समय मानिकपुर में रेलवे का लोको था, जहां हजारों लोग काम करते थे। स्थानीय लोगों को भी कई तरह से रोजगार मिल जाता था। लेकिन डाकूओं के आतंक की वजह से यहां कुछ नहीं हो सका।

    - बात करीब 1986-87 की है, मैं पढ़ाई कर रहा था। सतना के पास मझगंवा और अन्य कई स्टेशनों पर डाकूओं के छोटे-बड़े गिरोह अक्सर ट्रेनों को रोक लूट-डकैती करते थे।

    - रेलवे ने मानिकपुर लोको की यूनिट को बढ़ाकर सेल्फ बनाने के अलावा यहां इंजन कारखाना भी लगाने का प्लान था। इसके सर्वे के लिए दिल्ली से इंजीनियर्स और 3 अफसर आए। लेकिन ददुआ गैंग ने इन्हें किडनैप कर लिया।

    - पुलिस से शिकायत हुई, जांच की गई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। किडनैपर्स ने रेलवे को लेटर लिखकर 5 लाख की फिरौती मांगी और इसके लिए 10 दिन का समय दिया। रेलवे यह रकम देने को तैयार नहीं था। इंजीनियर्स और अफसरों के परिजनों में कोहराम मच गया।

    - 6 दिन बीतने के बाद किडनैप 3 अफसर की पत्न‍ियों ने मानिकपुर लोको पहुंच काफी हंगामा किया, चूड़ियां उतार कर फेंकी, लेकिन रेलवे ने पैसा नहीं दिया।

    - जब बात नहीं बनीं तो तीनों महिलाओं ने गहने और प्रापर्टी बेच पैसे जुटाए और डाकूओं से सम्पर्क कर उनकी बताई लोकेशन पर पैसा पहुंचा दिया। जिसके एक दिन बाद तीनों अफसर चित्रकूट के रामघाट पर मिले।

    - इस घटना के बाद रेलवे ने इंजन कारखाना और लोको प्लान बनाने का प्लांट बंद कर दिया, जो जैसा था उसे उसी हाल में छोड़ दिया गया।

    - अगर रेलवे के उन बड़े इंजीनियर्स और अफसरों को किडनैप न किया गया होता, तो आज एक बड़ा लोको और इंजन कारखाना होता। पूरे मानिकपुर, सतना, कर्वी, बांदा, और चित्रकूट की तस्वीर बदल जाती।

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