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बेटी के कफन के लिए भीख मांगता रहा पिता, 8 साल पहले छोड़ गया था लवर पति

पिता की पेंशन पर तीन बच्चों के साथ जिंदगी गुजारा कर रही थी नीलम।

Dainik Bhaskar

Nov 22, 2017, 05:46 PM IST
शिवप्रकाश सिंह अपने तीनों नातियों के साथ बेटी नीलम के अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगते रहे। शिवप्रकाश सिंह अपने तीनों नातियों के साथ बेटी नीलम के अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगते रहे।

लखनऊ. यूपी की राजधानी लखनऊ से लगभग 40 किमी दूर बसे पिपरौली गांव में एक लाचार पिता अपनी जवान बेटी के दाहसंस्कार के लिए मदद मांगता नजर आया। पुलिस और कुछ NGOs की मदद से देर शाम यह गरीब पिता बेटी की चिता को अग्नि दे सका।

बेटी की जिंदगी बर्बाद कर गया दामाद

- पीड़ित शिवप्रकाश सिंह ने बताया, "मेरी बेटी नीलम अपने पति के साथ बहराइच में रहती थी। 8 साल पहले दामाद हाफिज उसे तीन बच्चों समेत यहां मेरे पास छोड़ गया। उसने सारे रिश्ते खत्म कर लिए।"
- "हम हिंदू हैं और हाफिज मुस्लिम। उसने मेरी बेटी की जिंदगी बर्बाद करके रख दी।"

डेडबॉडी के साथ करते रहे सुबह का इंतजार

- शिवप्रकाश बताते हैं, "अपनी पेंशन से ही मैं बेटी और उसके तीनों बच्चों की देखरेख कर रहा था। पिछले एक साल से बेटी बीमार चल रही थी। उसका घर पर ही इलाज चल रहा था। रविवार को अचानक तबियत बिगड़ गई। मैं उसे आशियाना के लोकबंधु अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बलरामपुर अस्पताल भेज दिया।"
- "मंगलवार को सुबह तड़के 3 बजे उसने दम तोड़ दिया। नीलम के मरते ही तीनों बच्चे मुझसे लिपटकर रोने लगे। हम हॉस्पिटल से नीलम की डेडबॉडी लेकर घर पहुंचे, लेकिन वहां मकान मालिक ने अंदर तक नहीं घुसने दिया। मैं बेटी के शव और तीनों नातियों को लेकर घर के बाहर ही सुबह होने का इंतजार करता रहा।"

दाहसंस्कार के लिए नहीं थे पैसे, ऐसे मिली मदद

- शिवप्रकाश मंगलवार सुबह 8 बजे बेटी के शव को लेकर श्मशान घाट पहुंचे। वो बताते हैं, "मेरा घर पेंशन पर चलता है। कई महीनों से वह भी नहीं मिली। मैं इतना मजबूर था कि बेटी के अंतिम संस्कार तक के पैसे नहीं थे। मैं वहां आने-जाने वाले लोगों से मदद की गुहार लगा रहा था।"
- पीजीआई थाने में तैनात रणजीत सिंह सूचना मिलने पर श्मशान घाट पहुंचे। उन्होंने कुछ समाजसेवी एसके द्विवेदी, मनोज, प्रताप, अजय व धर्मराज रावत की मदद से करीब पांच हजार रुपए इकट्ठा कर बुजुर्ग को दिए।
- इस सोशल वर्क के लिए रणजीत सिंह को खुद डीआईजी लखनऊ ने सम्मानित किया।

नीलम की डेडबॉडी के साथ तीनों बच्चे। नीलम की डेडबॉडी के साथ तीनों बच्चे।
शिवप्रकाश सिंह को बेटी के कफन के लिए एक समाजसेवी ने डोनेशन दिया। शिवप्रकाश सिंह को बेटी के कफन के लिए एक समाजसेवी ने डोनेशन दिया।
पीजीआई थाने में तैनात रणजीत सिंह ने नीलम के दाह संस्कार में मदद की। पीजीआई थाने में तैनात रणजीत सिंह ने नीलम के दाह संस्कार में मदद की।
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शिवप्रकाश सिंह अपने तीनों नातियों के साथ बेटी नीलम के अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगते रहे।शिवप्रकाश सिंह अपने तीनों नातियों के साथ बेटी नीलम के अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगते रहे।
नीलम की डेडबॉडी के साथ तीनों बच्चे।नीलम की डेडबॉडी के साथ तीनों बच्चे।
शिवप्रकाश सिंह को बेटी के कफन के लिए एक समाजसेवी ने डोनेशन दिया।शिवप्रकाश सिंह को बेटी के कफन के लिए एक समाजसेवी ने डोनेशन दिया।
पीजीआई थाने में तैनात रणजीत सिंह ने नीलम के दाह संस्कार में मदद की।पीजीआई थाने में तैनात रणजीत सिंह ने नीलम के दाह संस्कार में मदद की।
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