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यूपी शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन बोले, अयोध्या विवाद के लिए पाक से हो रही हैं फंडिंग

वसीम रिजवी ने कहा- सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसे नहीं हैं।

Dainik Bhaskar

Nov 22, 2017, 03:36 PM IST
वसीम रिजवी ने कहा- सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसे नहीं हैं। इतने महंगे वकील के साथ कैसे केस लड़ रहे हैं। वसीम रिजवी ने कहा- सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसे नहीं हैं। इतने महंगे वकील के साथ कैसे केस लड़ रहे हैं।

लखनऊ. यूपी शिया वफ्क बोर्ड के चैयरमैन वसीम रिजवी ने अयोध्या विवाद में पाकिस्तान का हाथ होने का दावा किया है। वसीम रिजवी ने DainikBhaskar.com से बातचीत करते हुए कहा- "अयोध्या विवाद में पाकिस्तान की ओर से सुन्नी वफ्क बोर्ड को फंडिंग की जा रही है।" पाकिस्तान के पैसों से लड़ रहे हैं केस....

-वसीम रिजवी ने कहा- "अयोध्या मुद्दे पर पाकिस्तान लगातार फंडिंग कर रहा है। सुन्नी वक्फ बोर्ड इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहा हैं। जिस सुन्नी वफ्क बोर्ड के पास अपने कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए पैसे नहीं है, वह इस केस में इतने मंहगे वकीलों के जरिए कैसे लड़ रहा है।"

जांच हुई, तो सच्चाई सामने आ जाएगी:वसीम रिजवी

-उन्होंने कहा- "इकबाल अंसारी का बेटा अयोध्या में साइकिल पंचर की दुकान चलता है फिर वो ये केस कैसे लड़ सकता है। इस मामले में पाकिस्तान शुरू से ही दिलचस्पी ले रहा है। 1992 में जब मस्जिद गिराई गई थी, तब पाकिस्तान ने बदले में कई हिन्दू मंदिरों को पाकिस्तान में तुड़वा दिया था। पाकिस्तान के फंडिंग की जांच की जाए, सारी सच्चाई सामने आ जाएगी।

शिया वक्फ बोर्ड ने दिया था प्रपोजल

- इससे पहले शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या विवाद पर नया प्रपोजल दिया है। अगले महीने सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले वक्फ बोर्ड की तरफ से ये प्रस्ताव आया है। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा कि हमने एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इसे 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया है। ड्राफ्ट में अयोध्या में राम मंदिर और लखनऊ में मस्जिद बनाने की बात कही है। इस प्रपोजल पर कई महंतों ने सहमति जताई है।

अयोध्या विवाद में कौन-कौन से पक्ष हैं ?

- निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड।

तीनों पक्षों का दावा क्या है ?

- निर्मोही अखाड़ा: गर्भगृह में विराजमान रामलला की पूजा और व्यवस्था निर्मोही अखाड़ा शुरू से करता रहा है। लिहाजा, वह स्थान उसे सौंप दिया जाए।
- रामलला विराजमान: रामलला विराजमान का दावा है कि वह रामलला के करीबी मित्र हैं। चूंकि भगवान राम अभी बाल रूप में हैं, इसलिए उनकी सेवा करने के लिए वह स्थान रामलला विराजमान पक्ष को दिया जाए, जहां रामलला विराजमान हैं।
- सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड:सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का दावा है कि वहां बाबरी मस्जिद थी। मुस्लिम वहां नमाज पढ़ते रहे हैं। इसलिए वह स्थान मस्जिद होने के नाते उनको सौंप दिया जाए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

- 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन को मामले से जुड़े 3 पक्षों में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।

18 नवंबर को वसीम रिजवी ने अयोध्या विवाद के लिए सुलह का फॉर्मूला सुप्रीम कोर्ट में जमा किया है। 18 नवंबर को वसीम रिजवी ने अयोध्या विवाद के लिए सुलह का फॉर्मूला सुप्रीम कोर्ट में जमा किया है।
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वसीम रिजवी ने कहा- सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसे नहीं हैं। इतने महंगे वकील के साथ कैसे केस लड़ रहे हैं।वसीम रिजवी ने कहा- सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसे नहीं हैं। इतने महंगे वकील के साथ कैसे केस लड़ रहे हैं।
18 नवंबर को वसीम रिजवी ने अयोध्या विवाद के लिए सुलह का फॉर्मूला सुप्रीम कोर्ट में जमा किया है।18 नवंबर को वसीम रिजवी ने अयोध्या विवाद के लिए सुलह का फॉर्मूला सुप्रीम कोर्ट में जमा किया है।
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