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हाईकोर्ट ने जेलों में अप्राकृतिक कैदियों की मौत पर प्रदेश सरकार से मांगी कार्य योजना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से कार्य योजना मांगी है।

Danik Bhaskar | Nov 16, 2017, 08:48 PM IST
इस मामले की अगली सुनवाई अब  21 नव इस मामले की अगली सुनवाई अब 21 नव

इलाहाबाद. यूपी के जेलों में बंद कैदियों की अप्राकृतिक मौत के बाद उनके परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से उनकी कार्य योजना मांगी है। हाईकोर्ट का कहना है कि सरकार बताए वह कौन सा प्रावधान है, जिसके तहत कैदियों की अप्राकृतिक मौत के बाद आयोग की जांच एवं निर्देशों के बाद मुआवजा दिया जाता है। 21 नवम्बर को होगी अगली सुनवाई...

- यह आदेश चीफ जस्टिस डी बी भोसले एवं जस्टिस एम के गुप्ता की खंडपीठ ने लीगल एण्ड सर्विस क्लीनिक लॉ स्कूल बीएचयू एवं अन्य की तरफ से दायर एक आपराधिक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है।
- याचिका में कहा गया है कि सरकार के पास ऐसी कोई ठोस नीति नहीं है। जिससे कैदियों की आप्राकृतिक मौत के बाद तत्काल कार्रवाई प्रारंभ कर उनके परिजनों को मुआवजे का भुगतान किया जा सके।
- वहीं, सरकार की तरफ से कहा गया कि ऐसी आप्राकृतिक मौतों के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा जांचों प्रान्त कर मुआवजे का आंकलन किया जाता है। इसके बाद परिजनों को मुआवजा दिए जाने की कार्रवाई की जाती है।
- कोर्ट का कहना था कि सरकार क्यों नहीं ऐसी योजना बनाती है, जिससे किसी भी जेल में बंद कैदी की अप्राकृतिक मौत के तत्काल बाद उसके मुआवजे आदि की कार्यवाही एक समय सीमा के अंदर तय करके इसका निपटारा कर दिया जाए।
- इस मामले की अगली सुनवाई अब 21 नवम्बर को होगी।