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5 माह में 124 गोवंश की हुई मौत, अधिकारियों का दावा- प्रतिरोधक क्षमता घटने से सामने आ रही ऐसी स्थिति

एक वर्ष पहले
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  • रेणुकूट, रॉबर्ट्सगंज, पिपरी और दुद्धी में बने हैं अस्थाई केंद्र
  • आश्रय स्थलों पर आए दिन हो रही गोवंश की मौतें 

सोनभद्र. जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गोवंश के लिए बने आश्रय स्थलों में आए-दिन मौतें हो रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच महीने में 124 गोवंश की मौत हो चुकी है। हालांकि अधिकारी यह दलील दे रहे हैं कि एक जगह ज्यादा समय तक रखने की वजह से साइकोलॉजिकल प्रभाव की वजह से और पॉलीथीन खाने से गोवंश की मौत हो रही है। हालांकि पशु चिकित्साधिकारियों ने बताया कि इससे बचने के लिए आश्रय स्थलों पर कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है ताकि गोवंश पर निगरानी रखी जा सके।

 

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पशु चिकित्साधिकारी योगेश कुमार सिंह ने बताया कि गोवंश आश्रय स्थल पर रखे गए पशुओं के स्वास्थ्य की देखरेख की जिम्मेदारी अपर पशु चिकित्साधिकारी को मिली है। उन्होंने बताया कि व्यवस्था बहुत अच्छी है। लेकिन विगत 5 महीने में लगभग 124 गोवंशों की मौत हो चुकी है। वर्तमान समय में 175 पशु यहां पर हैं।

 

पहले आवारा पशु छुट्‌टा घूमते थे, लेकिन अब उन्हें एक जगह पर बांध कर रखा गया है। इसका साइकोलॉजिकल प्रभाव भी पड़ रहा है। जिसके कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती जा रही है। साथ ही पाॅलीथिन खाने से भी पशुओं की मौत हुई है। 

 

उन्होंने बताया कि अब काफी हद तक सुधार हो गया है। नगर पालिका और मुख्य चिकित्सा अधिकारी पशु द्वारा लगातार सुधार किए जा रहे हैं। साथ ही देखरेख के लिए 6 लोगों की ड्यूटी लगा दी गई है। जल्द और सुधार हो जाएगा।

 

इस समय जिले में नगर क्षेत्र में रेणुकूट, रॉबर्ट्सगंज, पिपरी और दुद्धी में अस्थाई रूप से गोवंश आश्रय स्थल केंद्र चल रहे हैं। वहीं कोशिश की जा रही है कि सभी ब्लॉक में कम से कम एक या दो आश्रय स्थल बनें। ग्रामीण क्षेत्र में कुल 12 गोवंश आश्रय स्थल संचालित हो रहे हैं।

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