वाराणसी

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महाशिवरात्रि: मां पार्वती संग हुआ बाबा विश्वनाथ विवाह, 4 प्रहर में पूरी हुई रस्में

महाशिवरात्रि पर फाल्गुन तिथि चतुर्दशी में प्रवेश करते ही चार प्रहर में बाबा विश्वनाथ का विवाह हुआ।

Danik Bhaskar

Feb 14, 2018, 11:37 AM IST
महाशि‍वरात्र‍ि पर हुआ बाबा वि महाशि‍वरात्र‍ि पर हुआ बाबा वि

वाराणसी. महाशिवरात्रि को मंगलवार की रात चार प्रहर में बाबा विश्वनाथ का विवाह सात अर्चकों ने पूरा क‍िया। हाई सिक्युरिटी रेड जोन में महंत कुलपति तिवारी के घर बाबा विश्वनाथ का मौर तैयार हुआ। इसके पहले मातृका पूजन हुआ। प्रमुख अर्चक शशि भूषण त्रिपाठी ने बताया, बाबा विश्वनाथ को फूलों का मौर गर्भ गृह में पहनाया जाता है। इसके बाद रस्में निशाकर लाल चुनरी में सजी देवी पार्वती की रजत मूर्ति और बाबा विश्वनाथ का विवाह होता है।

ऐसे हुआ बाबा विश्वनाथ का विवाह

- शाम को बाबा के सप्त ऋषि आरती के बाद मौर पहनाकर बाबा का मां गौरी संग विवाह उत्सव शुरू हुआ, जि‍सकी चार प्रहर सुबह 5 बजे से 6.30 बजे तक रस्में पूरी की गई।

- पहले पहर की आरती रात 11 से 12.30 बजे, दूसरी पहर की आरती 1.30 से.2.30 बजे, तीसरे पहर की आरती बुधवार की भोर में 3 बजे से 4 बजे तक और अंतिम चौथे पहर की आरती सुबह 5 बजे से 6.30 बजे तक हुई।

- महंत कुलपति तिवारी ने बताया, माघ कृष्ण पक्ष के दिन तिलक उत्सव के साथ रस्में शुरू हो जाती हैं।

- शिवरात्रि के दो दिन पहले सोमवार को तेल-हल्दी की रस्म हुई।

- मंगलवार को मट मंगरा की रस्म अदा की गई, जिसमें सात सुहागिन महिलाएं महादेव के लिए कुंड जलाशय के पास से मिट्टी खोकर लाइ और बेदी बनाई।

- गुड़-तेल से प्राचीन पूजा की गई। उसी रात संगीत मंगल गीतों का कार्यक्रम हुआ।

बाबा को पसंद है सप्तऋषि आरती

- पुराणों के अनुसार, बाबा विश्वनाथ को सप्तऋषि द्वारा की गई आरती प्रिय है, इसलिए सप्त ऋषि आरती में शामिल होने वाले अर्चक ही पूरी विवाह की रस्म निभाते चले आ रहे हैं।

- प्रधान अर्चक पंडि‍त शशिभूषण त्रिपाठी (गुड्डू महाराज) के नेतृत्व में सातों अर्चक वैदिक मंत्रों से विवाह कराया।

- उन्होंने बताया, महाशिवरात्रि पर होने वाली चार फहर की आरती सप्तऋषि (सात अर्चक-ब्राह्मण) ही कराते हैं। इस दौरान बाबा को ठंडई, भांग, फल-फूल अर्पित करते हैं और अबीर गुलाल चढ़ाकर काशी विश्वनाथ के आशीर्वाद लेते हैं।


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