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सीने पर चढ़ बुलबुल ने यूं एक-दूसरे पर किया अटैक, 150 साल पुरानी है ये परंपरा

मिर्जापुर में दंगल में बुलबुल पट्ठों को एक लड़ाने के लिए लोग दूर-दूर से इकठ्ठा होते हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2018, 10:49 AM IST
जंगल से पकड़कर या बहेलियों से खरीदकर बुलबुल लाईं जाती हैं। जंगल से पकड़कर या बहेलियों से खरीदकर बुलबुल लाईं जाती हैं।

मिर्जापुर(यूपी). यहां दो बुलबुल मालिक की नमक का हक अदा करने के लिए जान पर खेल रही हैं। मकर सक्रांति के दिन हजारों की तारदार में लोग फाइट देखने और अपनी-अपनी बुलबुल को लड़ाने के लिए जमा होते हैं। बुलबुल फाइट की यह परंपरा 150 साल पुरानी है। दंगल के लिए बुलबुल पहलवानों को खास डाइट के साथ एक महीने में तैयार किया जाता है। एक महीने में ऐसे करते हैं बुलबुल पट्ठों को तैयार...

- मामला जनपद में स्थित मां विंध्यवासिनी का धाम विंध्याचल का है। यहां मकर संक्रांति (खिचड़ी) के दिन 'बुलबुल दंगल' की विशेष तैयारी की जाती है।

- बुलबुल के मालिक अभय मिश्रा ने बताया, ''कई प्रजातियों के बुलबुल बाजार में बिकते हैं, जिसमें तोखी, डोमा व बेर्रा खास होती हैं। दंगल के एक महीने पहले ही जंगल से पकड़कर या बहेलियों से खरीदकर बुलबुल लाईं जाती हैं। बच्चों से भी बढ़कर इनकी सेवा करते हैं।''

- ''फाइट के लिए काफी पौष्टिक खाना खिलाते हैं। काजू, पिस्ता और बादाम खिला तैयार किया जाता है। एक महीने तक इनका खूब ख्याल रखा जाता है।

- दूसरी बुलबुल के मालिक अश्वनी उपाध्याय बताते हैं, ''बुलबुल को पहलवान बनाकर इनकी कई परीक्षा होती हैं। छोटे-छोटे दंगल में कड़े मुकाबले को पार करते हुए आगे बढ़ते हैं।''
- ''फाइनल में जितने वाली बुलबुल को खास इनाम में फ्रिज, टीवी, अलमारी, सोने की चेन देकर सम्मानित किया जाता है। फाइट के दौरान कोई ज्यादती नहीं की जाती है। फाइट कराने इलाहाबाद, कानपुर, मुगराबादशापुर, भदोही, जौनपुर से लोग आते हैं।''


काजू, पिस्ता और बादाम खिला तैयार किया जाता है। एक महीने तक इनका खूब ख्याल रखा जाता है। काजू, पिस्ता और बादाम खिला तैयार किया जाता है। एक महीने तक इनका खूब ख्याल रखा जाता है।
मालिक अभय ने बताया- बच्चों से भी बढ़कर इनकी सेवा करते हैं। फाइट के लिए काफी पौष्टिक खाना खिलाते हैं। मालिक अभय ने बताया- बच्चों से भी बढ़कर इनकी सेवा करते हैं। फाइट के लिए काफी पौष्टिक खाना खिलाते हैं।
फाइट कराने इलाहाबाद, कानपुर, मुगराबादशापुर, भदोही, जौनपुर से लोग आते हैं। फाइट कराने इलाहाबाद, कानपुर, मुगराबादशापुर, भदोही, जौनपुर से लोग आते हैं।
फाइनल में जितने वाली बुलबुल को खास इनाम में  फ्रिज, टीवी, अलमारी, सोने की चेन देकर सम्मानित किया जाता है। फाइनल में जितने वाली बुलबुल को खास इनाम में फ्रिज, टीवी, अलमारी, सोने की चेन देकर सम्मानित किया जाता है।
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जंगल से पकड़कर या बहेलियों से खरीदकर बुलबुल लाईं जाती हैं।जंगल से पकड़कर या बहेलियों से खरीदकर बुलबुल लाईं जाती हैं।
काजू, पिस्ता और बादाम खिला तैयार किया जाता है। एक महीने तक इनका खूब ख्याल रखा जाता है।काजू, पिस्ता और बादाम खिला तैयार किया जाता है। एक महीने तक इनका खूब ख्याल रखा जाता है।
मालिक अभय ने बताया- बच्चों से भी बढ़कर इनकी सेवा करते हैं। फाइट के लिए काफी पौष्टिक खाना खिलाते हैं।मालिक अभय ने बताया- बच्चों से भी बढ़कर इनकी सेवा करते हैं। फाइट के लिए काफी पौष्टिक खाना खिलाते हैं।
फाइट कराने इलाहाबाद, कानपुर, मुगराबादशापुर, भदोही, जौनपुर से लोग आते हैं।फाइट कराने इलाहाबाद, कानपुर, मुगराबादशापुर, भदोही, जौनपुर से लोग आते हैं।
फाइनल में जितने वाली बुलबुल को खास इनाम में  फ्रिज, टीवी, अलमारी, सोने की चेन देकर सम्मानित किया जाता है।फाइनल में जितने वाली बुलबुल को खास इनाम में फ्रिज, टीवी, अलमारी, सोने की चेन देकर सम्मानित किया जाता है।
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