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खुश न हों न्यूक्लियर पावर बनने वाले देश, दुश्मन के साथ अपना भी होता है विनाश : दलाई लामा

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा शुक्रवार को वाराणसी पहुंचे थे।

Dainik Bhaskar

Dec 30, 2017, 12:02 PM IST
केंद्रीय तिब्बती अध्ययन संस्थान के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेने के लिए वो यहां पहुंचे हैं। केंद्रीय तिब्बती अध्ययन संस्थान के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेने के लिए वो यहां पहुंचे हैं।

वाराणसी. केंद्रीय तिब्बती संस्थान में आयोजित 'भारतीय दर्शन और प्राच्य विज्ञान' नामक दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार के उद्धघाटन अवसर पर शनिवार को दलाई लामा ने संबोधित किया। उन्होंने कहा- "न्यूक्लियर पावर बनाने वालों को बहुत खुश नहीं होना चाहिए क्योंकि उससे दुश्मन का ही नहीं अपना भी विनाश होता है।"

-उन्होंने कहा- 'विश्व में शांति के लिए आवश्यक वार्ता होनी चाहिए।" न्यूक्लियर पावर बनाने वाले देशों को उन्होंने खुश न होने की सलाह देते हुए कहा- 'न्यूक्लियर पावर को बढ़ाकर कोई देश खुद को सर्वशक्तिमान मानकर खुश न हो।"
-ये दुर्भाग्य है की इस समय सब अपना पैसा मिलिट्री पावर को बढ़ाने में लगा रहे हैं जो सभी के लिए चिंता की बात होनी चाहिए।
-वर्तमान काल के युद्ध और प्राचीन काल के युद्ध में काफी अंतर आ गया है इससे बचने की आवश्यकता है। इससे होने वाले नुकसान को समझना चाहिए।


भारतीय परंपरा को बढ़ावा देने की जरुरत

-उन्होंने कहा- "भारतीय परंपरा जिसमें ज्ञान, इमोशन, करुणा का समिश्रण है। इसको बढ़ावा देने की आवश्यकता है। ये शिक्षा शांति के प्रयास के लिए भी होना चाहिए।
-शांति चाहने वालों की विशेष जिम्मेदारी बनती है। इसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए। प्रेम का वातावरण बनाने के लिए नैतिक शिक्षा की बहुत आवश्यकता है।
-परिवर्तन के लिए हम सबको मिलकर काम करने की आवश्यकता है इसी लिए अफगानिस्तान और सीरिया जैसे देश में असंख्य लोग मारे जा रहे हैं इसको रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है।
-पृथ्वी पर सबको रहने का अधिकार है। हमने अपनी बुद्धि नकारत्मक चीजों में लगाई है। इससे इस प्लेटनेट को नुकसान पहुंचाया है।


शुक्रवार को काशी पहुंचे हैं दलाई लामा

-तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा शुक्रवार को वाराणसी पहुंचे। वाराणसी के सारनाथ में दलाई लामा का भव्य स्वागत किया गया। केंद्रीय तिब्बती अध्ययन संस्थान के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेने के लिए वो यहां पहुंचे हैं।

पृथ्वी पर सबको रहने का अधिकार है। हमने अपनी बुद्धि नकारत्मक चीजों में लगाई है। पृथ्वी पर सबको रहने का अधिकार है। हमने अपनी बुद्धि नकारत्मक चीजों में लगाई है।
भारतीय परंपरा को बढ़ावा देने की जरुरत। भारतीय परंपरा को बढ़ावा देने की जरुरत।
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केंद्रीय तिब्बती अध्ययन संस्थान के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेने के लिए वो यहां पहुंचे हैं।केंद्रीय तिब्बती अध्ययन संस्थान के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेने के लिए वो यहां पहुंचे हैं।
पृथ्वी पर सबको रहने का अधिकार है। हमने अपनी बुद्धि नकारत्मक चीजों में लगाई है।पृथ्वी पर सबको रहने का अधिकार है। हमने अपनी बुद्धि नकारत्मक चीजों में लगाई है।
भारतीय परंपरा को बढ़ावा देने की जरुरत।भारतीय परंपरा को बढ़ावा देने की जरुरत।
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