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हीरो की तरह काम करता है ये IPS, पत्नी को हॉस्प‍िटल छोड़ निभाई थी ड्यूटी

DainikBhaskar.com ने एसपी गौरव के मां-पापा से बात की थी तो उनकी शख्सियत के अनछुए पहलू सामने आए।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 03:00 PM IST
गौरव की पत्नी आभा सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज से ताल्लुक रखती हैं। गौरव की पत्नी आभा सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज से ताल्लुक रखती हैं।

वाराणसी. अपनी कामों को लेकर चर्चा में रहने वाले IPS गौरव तिवारी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार चर्चा की वजह उन पर बन रही फिल्म है, जिसका पोस्टर भी जारी हो चुका है। नए साल पर इसे रि‍लीज भी किए जाने का प्लान था, लेकिन फिलहाल इस फिल्म की शूटिंग रोक दी गई है। मध्य प्रदेश में तैनात IPS गौरव तिवारी जनवरी 2017 में 500 करोड़ रुपए के हवाला कारोबार का पर्दाफाश कर पॉपुलर हुए थे। अपनी दिलेरी से सभी का दिल जीतने वाला ये पुलिस अफसर बनारस के तिवारीपुर का रहने वाला है। DainikBhaskar.com ने एसपी गौरव के मां-पापा से बात की थी तो उनकी शख्सियत के अनछुए पहलू सामने आए। पत्नी को हॉस्प‍िटल में छोड़ निभाई थी ड्यूटी...

- एमपी के छिंदवाड़ा जिले के एसपी गौरव तिवारी काशी के तिवारीपुर गांव से ताल्लुक रखते हैं। पुलिस की नौकरी के लिए गौरव भले ही दूसरे स्टेट चले गए हैं, लेकिन उनके माता-पिता आज भी तिवारीपुर में ही हैं। पिता किसानी करते थे।
- गौरव के पिता अरुण तिवारी और मां सरिता ने गौरव की पर्सनल लाइफ से जुड़ी बातें शेयर की थीं। सरिता तिवारी ने बताया, "मई 2015 की बात है। तब गौरव की पोस्टिंग बालाघाट थी। मेरी बहू आभा प्रेग्नेंट थी। उसे डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल में एडमिट करवाया था।"
- "गौरव के पास नक्सलियों से जुड़े एक सीक्रेट मिशन पर जाने के ऑर्डर्स थे। वो रात में निकलने ही वाला था कि तभी बहू को लेबर पेन शुरू हो गया।"
- "तुरंत डॉक्टरों ने उसका इमरजेंसी सिजेरियन ऑपरेशन किया। आभा ने रात 12 बजे मेरी पोती को जन्म दिया। गौरव अपनी बेटी को गोद में लेकर भावुक हो गया था। एक तरफ उसे ड्यूटी पर जाना था और दूसरी तरफ हाथ में नवजात बेटी थी।"
- "गौरव ने मुझसे कहा - बेटी को देखकर जा रहा हूं। बड़ा मिशन है, पूरा करके ही लौटूंगा।"
- अरुण तिवारी ने बताया कि तब गौरव ने 2 दिन बाद फोन करके गुड न्यूज सुनाई, उसने 35 लाख रुपए के इनामी नक्सली दिलीप गुहा को अरेस्ट कर लिया था। वो 19 मर्डर्स का आरोपी था, जिसे सिर्फ एमपी ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की पुलिस भी ढूंढ रही थी।

टाटा कंपनी में भी की है नौकरी
गौरव ने बताया था कि वे शुरू से ही आईपीएस अफसर बनना चाहते थे, लेकिन सिविल सर्विसेस की पढ़ाई करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने इंजीनिरिंग करने के बाद टाटा कंपनी ज्वाईन कर ली। दो साल काम करने के बाद जब पैसे एकत्रित हुए तो वे आईपीएस की कोचिंग करने के लिए दिल्ली चले गए। इसके बाद उनका सिलेक्शन हो गया।

साउथ के सुपर स्टार की तरह काम करता है ये IPS
- गौरव तिवारी के काम करने का अंदाज बाकी आईपीएस अफसरों से एकदम जुदा है। वे अभी छिंदवाड़ा ट्रांसफर कर दिए गए हैं, पर जब तक कटनी में रहे, उन्हें अक्सर सड़कों पर पैदल, साइकिल चलाते, सामाजिक संगठनों के बीच, समाज के बीच, गली-मोहल्लों में लोगों का दर्द बांटते देखा जा सकता था।
- लोग उन्हें साउथ के सुपरस्टार नागार्जुन जैसा कहते हैं। क्योंकि जिस तरह नागार्जुन ने फिल्म 'शिवमणि' में लोगों का दर्द बांटने वाले सुपर हीरो की भूमिका निभाई थी, ठीक उसी तरह गौरव भी लोगों के बीच जाकर समाज से अपराध कम करने के लिए काम कर रहे थे।

जवाब- गौरव हाईस्कूल तक यहीं पढ़ा है। वो बचपन से पढ़ाई में तेज था। सुबह उठकर पढ़ाई करना उसे बहुत पसंद था। गौरव पब्लिक सर्वेंट बनकर लोगों की मदद करना चाहता था। IIT से इंजीनियरिंग के दौरान ही उसने पीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी।

जवाब- 2006-07 में गौरव सिविल की तैयारी के लिए दिल्ली गया था। उसने मुखर्जी नगर में एक मकान किराए पर लिया था। रात को सोने के लिए उसने एक सेकंड हैंड पलंग और कुर्सी खरीदी थी। गांव का एक दोस्त उसे छोड़ने दिल्ली साथ गया था। जब उसने गौरव को बोला कि अरे तुम्हारा पलंग तो टूटा है। इस पर मेरे बेटे ने कहा था - 18 घंटे तो कुर्सी पर बैठकर ही पढ़ना है, सोने को तो कहीं भी सोया जा सकता है।

जवाब- बात 2006-07 की है, जब वो सिविल की तैयारी के लिए दिल्ली जा रहा था। मैंने उसे एक मोबाइल खरीदकर दिया था, जिससे वो जरूरत पड़ने पर हम से बात कर सके। लेकिन उसने लेने से इनकार कर दिया। गौरव का कहना था- पापा मोबाइल साथ रहेगा तो बार-बार फोन आएगा और पढ़ाई डिस्टर्ब होगी।

जवाब- गौरव तो बस जुटा रहता था। वो एक-एक हफ्ते तक रूम से बाहर ही नहीं निकलता था। सिर्फ केवल ब्रश करने, टॉयलेट जाने और टिफिन लेने के लिए निकलता था। स्टडीज में कन्सनट्रेशन न टूटे इसके लिए रोड पर घूमने नहीं जाता था।

जवाब- वो हर जरूरतमत इंसान के लिए खड़ा रहता है। 2014 में बतौर बालाघाट एसपी जंगल में मिशन के दौरान गरीब परिवार की एक अंधी बच्ची से मिला था। उसने पूछा - क्या बनना चाहती हो? तो बच्ची ने कहा डॉक्टर। बच्ची की बातों से प्रभावित होकर गौरव ने जबलपुर के बड़े हॉस्पिटल में उसका इलाज करवाया। मेहनत रंग लाई और बच्ची की आंखों की रोशनी वापस आ गई। गौरव ने इलाज के बाद उसकी पढ़ाई का खर्च भी उठाया। यही उसकी सोच है।

 

जवाब- वो हार्ड वर्किंग नेचर का है। वह पब्लिक के बीच सिविल ड्रेस में जाता है, वर्दी में नहीं। लोगों से बातचीत कर उनकी प्रॉबलम्स सुनता है और उनका सॉल्यूशन निकालने में जुट जाता है। इसी वजह से लोग उसे पसंद करते हैं।

जवाब- पुलिस के कैरेक्टर पर बनी फिल्में उसे बहुत पसंद हैं। गौरव को कैमिस्ट्री के फॉर्मूले बहुत पसंद थे। गौरव को सिर्फ पढ़ाई का जुनून था। वो यही कहता था - स्ट्रगल हो या कोई भी लम्हा, खाना जो भी मिले, खा लेना चाहिए। अब उसे मटर वाले पोहे बहुत अच्छे लगते हैं।