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ये हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस की लाइफ से जुड़े 7 MYTH, जानें क्या है सच

9 साल से नेताजी की लाइफ पर रिसर्च कर रहे प्रो. डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने मिथ और उनके फैक्ट्स बताए।

Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 12:24 PM IST

वाराणसी. 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है। नेताजी के जीवन के रहस्यों लेकर देश में कई रिसर्च किए गए, जिसमे महत्वपूर्ण तौर पर नेताजी का रहन-सहन उनकी लाइफ स्टाइल रही। इसके अलावा आजाद हिंद फौज का फंड कैसे चलता था, पैसा कैसे इकठ्ठा होता था। इनसब बातों को लेकर काफी मिथ भी हैं। DainikBhaskar.com ने पिछले 9 साल से नेताजी की लाइफ पर रिसर्च कर रहे बीएचयू हिस्ट्री डिपार्टमेंट के युवा प्रो. डॉ. राजीव श्रीवास्तव से बातचीत की। उन्होंने रिसर्च के आधार पर नेताजी की लाइफ से जुड़े 7 मिथ और उनकी सच्चाई बताई।


MYTH- मुस्लिमों को सेना में नहीं लेना चाहते थे नेताजी।
FACT- ऐसा नहीं है, नेता जी ने बर्मा से रेडियो पर 12 सितंबर 1944 को कहा- ''मैं भारत के लाखों मुस्लिम नौजवानों से पूछता हूं कि क्या मातृ भूमि का विभाजन चाहिए?, ब्रिटेन को ठोकर मारो, कोई समझौता नहीं होना चाहिए। आप स्वतंत्रा चाहते हो तो संघर्ष करो।''

FACT- रंगून के जुबली हॉल में  जुलाई 1943 को भारतीय, बर्मा, सिंगापुर, रंगून, प्रवासी भारतियों ने आजाद हिंद फौज गठन के फंड के लिए 26 बोर सोने, चांदी, हीरे-जेवरात और पैसों से नेताजी को तराजू में बैठाकर तौल दिया, जिससे अक्टूबर 1943 को आजाद हिंद सरकार को मान्यता मिल गई थी।

 

FACT- नेता जी को धोती-कुर्ता और गुलाबी गमछा बहुत पसंद था। 24 घंटे में दो बार कपड़े जरूर बदलते थे। उनके पास अंग्रेजों के ड्रेस तक होते थे और गेटअप बदलकर आसानी से दुश्मनों का प्लान भी जान लेते थे।

FACT- आजाद हिंद फौज की करंसी को मांडले कहते थे, जो बर्मा में छपा करती थी। फौज में 1 पैसा, 2 कड़ा के बराबर होता था और दो कड़ा में चार पाई हुआ करता था। लेफ्टिनेंट को 80 रुपए सैलरी मिलती थी। बर्मा में जो अधिकारी फौज में थे उनको 230 रुपए मिलता था। लेफ्टिनेंट कर्नल को 300 रुपए मिलते थे।

 

FACT- 15 जुलाई 1943 को 20 महिला सैनिकों की भर्ती की गई और रेजीमेंट का नाम 'रानी झांसी' रखा गया। जुलाई 1943 के आखिर में 50 महिला सैनिकों की भर्ती हुई। डॉ. लक्ष्मी स्वामी नाथन को रेजीमेंट का पहला कैप्टन बनाया गया। अगस्त 1943 में 500 महिलाओं को मिलेट्री ट्रेनिंग के लिए चुना गया।

FACT- 31 अगस्त 1942 आजाद हिंद रेडियो से प्रसारण भारत, रंगून (बर्मा) में बोलते हुए कहा- ''हम किसानों के लिए स्वराज चाहते हैं, किसानों के विकास पर भारत का भविष्य है। आप के साथ की वजह से लड़ाई हम जीत रहे हैं।''

 

FACT- 6 जुलाई 1944 को रंगून में स्पीच के दौरान कहा- ''जब हमारे देश से दुश्मन निकल जाएंगे तो भारत में एक व्यवस्था बन जाएगी। आजाद हिंद की अस्थाई सरकार का मिशन पूरा हो जाएगा। स्वतंत्रा के बाद जनता खुद तय करे कि सरकार कैसी और सत्ता कौन संभालेगा। मेरा मकसद आजादी है।''