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कभी सड़कों पर बेचते थे खिलौने, आज बने वर्ल्ड के मशहूर प्लास्टिक सर्जन

वाराणसी में डॉ. सुबोध सिंह ने 31 हजार लोगों का फ्री में ऑपरेशन कर चुके हैं।

Dainik Bhaskar

Dec 26, 2017, 05:38 PM IST
वाराणसी में डॉ सुबोध ने 31 हजार लोगों को फ्री में ऑपरेशन किया है। वाराणसी में डॉ सुबोध ने 31 हजार लोगों को फ्री में ऑपरेशन किया है।

वाराणसी (यूपी). यहां काशी के डॉ. सुबोध सिंह ने 31 हजार लोगों का फ्री में ऑपरेशन कर चुके हैं। इनके हॉस्पिटल में 4 ऐसे बेड हैं, जिस पर गरीब मरीजों को एडमिट किया जाता है। इनका इलाज फ्री में किया जाता है। इन्होंने DainikBhaskar.com से बात करते हुए अपना अनुभव शेयर किया है।

सड़कों पर बेचा था सामान...

- डॉ. सुबोध ने कहा, ''मेरे पिता जी रेलवे में साधारण से इम्प्लाई थे। जब मैं 13 साल का था तभी उनकी मौत हो गई थी। उनके जाने से घर की स्थिति बहुत खराब हो गई थी। बड़ें भाई पढ़ाई छोड़कर जनरल स्टोर की दुकान पर काम करने लगे।''
- ''मैं भी हाई स्कूल में लोगों के घर-घर जाकर होम ट्यूशन देने लगा। इसके बाद जो समय बचता उसमें सड़कों पर घूमकर बच्चों का खिलौना, मोमबत्ती और साबुन घर पर बनाकर बाहर सड़क पर बेचता था।''
- ''1983 में मुश्किल से फीस भरकर बीएचयू से बीएससी फर्स्ट ईयर की पढ़ाई शुरू की, तभी मेरा सेलेक्शन बीएचयू पीएमटी में हो गया। उसके बाद प्लॉस्टिक सर्जरी में इंट्रेस्टेड होने के नाते M.S और M.Ch.(मास्टर ऑफ सर्जरी ) किया।''

विदेश से ली ट्रेनिंग
- ''जब हमारी स्थिति ठीक हुई तो हमनें इंग्लैंड, अमेरिका जाकर प्लास्टिक सर्जरी, कॉस्मेटिक सर्जरी, माइक्रो सर्जरी की ट्रेनिंग ली। लोगों का दर्द इतने नजदीक से देखा था, इसलिए विदेशो में बड़े से बड़े हॉस्पिटल में मिले करोड़ों का जॉब को ठुकरा दिया।''
- ''मैंने क्लेफ्ट बच्चों को इसलिए चुना क्योंकि इसके डॉक्टर बहुत कम है। इसकी सर्जरी में भी बहुत अधिक खर्च होता है। मैं 1994 से सर्जरी कर रहा हूं, 2004 से स्माइल ट्रेन संस्था से जुड़ा और अब तक फ्री में 31 हजार आपरेशन देश और विदेश में क्लेफ्ट बच्चो का कर चूका। जिसमे कई बर्निंग और एक्सीडेंटल केस भी शामिल है।''
- ''मैंने इकठ्ठा किए पैसों से 2004-05 में जीएस मेमोरियल प्लास्टिक सर्जरी हॉस्पिटल खोला। मेरा मकसद बदसूरत चेहरों को सर्जरी कर खूबसूरत कर मुस्कान लाना था।''

ऑस्कर अवार्डी पिंकी को दी मुस्कान
- ''स्माइल पिंकी की डायरेक्टर मेगना माइलन को एक ऐसी मासूम लड़की की तलाश थी, जो खुद से ही शर्माती हो। 2008 उन्होंने हमारे हॉस्पिटल में विजिट किया और डॉक्यूमेंट्री बनाने की बात कही।''
- ''उन्होंने अस्पताल में सर्जरी से लेकर बच्चों के घरो तक जाकर, खुद शूट करने की योजना बनाई। हमें रियल में ऐसा नाम खोजना था, जो बीमारी से जूझ रहा है। काफी प्रयास के बाद मिर्जापुर में पिंकी मिली।
- ''पिंकी के गांव, स्कूल, खेत, पहाड़ों और आखिर में इलाज कैसे हुआ इन सब को मिलाकर 39 मिनट की पूरी डॉक्यूमेंट्री बनाई गई। पिंकी की मुस्कान कैसे वापिस आई, इसको प्ले ऑस्कर में किया गया। जिससे पिंकी इंटरनेशनल स्टार बन गई।

इस वजह से होती है बीमारी
- ''दुनिया में एक करोड़ के ज्यादा क्लेफ्ट बच्चे हैं। आकड़ों के मुताबित, 10 लाख के ज्यादा केवल भारत में क्लेफ्ट बच्चे हैं।''
- ''इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह जीन्स की वजह से बच्चों में ये समस्या आती है। प्रेग्नेंसी के समय जीन्स की वजह से प्रोटीन नहीं बन पाता, जिसकी वजह से चेहरे का विकास नहीं हो पता और होंठ और तालू कटे फटे हो जाते हैं।''
- ''भारतीय महिलाओं में बी-12 विटामिन की काफी कमी पाई जाती है। बी-12 केमिकल साइकिलिंग में परफार्म करती है, जिसकी वजह से चेहरे का विकास बंद हो जाता है।''

डॉ सुबोध के हॉस्पिटल में 4 ऐसे बेड है, जिनपर गरीब लोगों का इलाज किया जाता है। डॉ सुबोध के हॉस्पिटल में 4 ऐसे बेड है, जिनपर गरीब लोगों का इलाज किया जाता है।
डॉ. सुबोध ने बताया- मैंने क्लेफ्ट बच्चों को इसलिए चुना क्योंकि इसके डॉक्टर बहुत कम है। डॉ. सुबोध ने बताया- मैंने क्लेफ्ट बच्चों को इसलिए चुना क्योंकि इसके डॉक्टर बहुत कम है।
डॉ. सुबोध ने सर्जन के लिए विदेश से ट्रेनिंग ली है। डॉ. सुबोध ने सर्जन के लिए विदेश से ट्रेनिंग ली है।
डॉ. सुबोध ने कई विदेशी कंपनियों के ऑफर ठुकरा दिया। डॉ. सुबोध ने कई विदेशी कंपनियों के ऑफर ठुकरा दिया।
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वाराणसी में डॉ सुबोध ने 31 हजार लोगों को फ्री में ऑपरेशन किया है।वाराणसी में डॉ सुबोध ने 31 हजार लोगों को फ्री में ऑपरेशन किया है।
डॉ सुबोध के हॉस्पिटल में 4 ऐसे बेड है, जिनपर गरीब लोगों का इलाज किया जाता है।डॉ सुबोध के हॉस्पिटल में 4 ऐसे बेड है, जिनपर गरीब लोगों का इलाज किया जाता है।
डॉ. सुबोध ने बताया- मैंने क्लेफ्ट बच्चों को इसलिए चुना क्योंकि इसके डॉक्टर बहुत कम है।डॉ. सुबोध ने बताया- मैंने क्लेफ्ट बच्चों को इसलिए चुना क्योंकि इसके डॉक्टर बहुत कम है।
डॉ. सुबोध ने सर्जन के लिए विदेश से ट्रेनिंग ली है।डॉ. सुबोध ने सर्जन के लिए विदेश से ट्रेनिंग ली है।
डॉ. सुबोध ने कई विदेशी कंपनियों के ऑफर ठुकरा दिया।डॉ. सुबोध ने कई विदेशी कंपनियों के ऑफर ठुकरा दिया।
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