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ये है महादेव के साले का मंदिर, शादी के बाद संतान नहीं इसलिए आते हैं भक्त

14 फरवरी को महाश‍िवरात्र‍ि है। बाबा की नगरी काशी में महादेव के साले का एक मात्र मंदिर है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 12, 2018, 10:00 PM IST

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    महादेव के साले का मंदिर वाराणसी में सारनाथ में है।

    वाराणसी. 13 फरवरी को महाश‍िवरात्र‍ि है। बाबा की नगरी काशी में महादेव के साले का एक मात्र मंदिर है। dainikbhaskar.com आपको इस मंदिर के इतिहास और इसकी खासियत के बारे में आपको बताने जा रहा है।

    ये है मंदिर से जुड़ी कहानी...

    - बहुत कम लोगों को पता होगा कि महादेव के साले का मंदिर सारनाथ में है।

    - पुजारी विनय दुबे ने बताया, महादेव का विवाह राजा दक्ष की बेटी सती से हुआ था। सती के बड़े ऋषि सारंग शादी के समय मौजूद नहीं थे। बाद में जब वह लौटे तो यह सुनकर नाराज हुए कि जिसके पास वस्त्र, जेवर नहीं है, वो अड़भंगी उनका जीजा बन गया।

    - कुछ दिन बाद सारंग जेवर लेकर महादेव को देने काशी पहुंचे और सारनाथ में आकर रुके। रात में सपने में उन्हें पूरी काशी नगरी सोने की दिखाई दी,आंख खुली तो ऐसा ही नजारा था।

    - यह देख उन्हें बहुत पश्च्तावा हुआ और वो सारनाथ में ही तपस्या पर बैठ गए। हजारो साल बाद महादेव ने प्रकट होकर उनको 3 वरदान दिए।

    # आप भी मेरे स्वरूप (श‍िवलिंग) में पूजे जाएंगे

    # जाे भी भक्त तुम्हारे मंदिर में आकर दर्शन करेगा उसकी स्क‍िन ड‍िजीज से संबंध‍ित हर बीमारी ठीक होगी

    # सावन के महीने में महादेव खुद कल्पवास करेंगे

    - सारंग ने महादेव की प्रार्थना की उनको अपने साथ काशी में वास करा दें। महादवे के वरदान से यहां 2 स्वंभू श‍िवलिंग निकले, जिसको लोग सारंगदेव के नाम से पूजते हैं। सारंगनाथ (साला) का शिवलिंग लंबा है और सोमनाथ (जीजा) का गोला आकार में और ऊंचा है।

    - मंदिर से जुड़ी एक और कहानी है। कालांतर में 2400 साल पहले जब बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार तेजी से हो रहा था।

    - उस समय प्रथम आदि शंकरचार्य ने यहां आकर बौद्ध धर्म गुरुओं से शास्त्रार्ध किया और उनको हराकर इसी स्थान पर सारंगदेव के पास एक श‍िवलिंग स्थापित किया, जिसे सोमनाथ बोला गया।

    मंदिर से जुड़ी मान्यताएं
    - विवाह के तुरंत बाद यहां दर्शन करने से ससुराल और मायके का संबंध अच्छा बना रहता है।
    - जीजा और साले के बीच महादेव और सारंगनाथ जैसा मधुर संबंध बना रहता है।
    - चर्म रोग, चेहरे के कैसे भी दाग, कोढ़, मस्सा, इल्ला जैसे बीमारी यहां दर्शन करने से ठीक हो जाती है।
    - 41 सोमवार लगातार दर्शन करने से स्वर्ण सम्बंधित इक्षा पूर्ण होती है।

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