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मोदी के मंत्री ने फुटपाथ पर लड़की को लगाया गले, पढ़ें इंस्पायरिंग स्टोरी

गाजीपुर (यूपी). यहां चाय बेचने वाली एक लड़की को मोदी के मंत्री मनोज सिन्हा का गले लगाना चर्चा में है।

Dainik Bhaskar

Dec 26, 2017, 07:38 PM IST
मनोज स‍िन्हा ने फुटपाथ पर चाय बेचने वाली छात्रा को लगाया गले। मनोज स‍िन्हा ने फुटपाथ पर चाय बेचने वाली छात्रा को लगाया गले।

गाजीपुर (यूपी). यहां चाय बेचने वाली एक लड़की को मोदी के मंत्री मनोज सिन्हा का गले लगाना चर्चा में है। दरअसल, लड़की फुटपाथ पर ठेला लगाकर चाय बेचती है और इसी पैसों से बीमार मां-बाप और दो छोटे भाईयों की परवरिश भी कर रही है। DainikBhaskar.com ने बीकॉम कर चुकी आरती से बातचीत की तो पता चला कि मनोज सिन्हा बीते शनिवार को अफीम फैक्ट्री के गेस्ट हाउस में ठहरे थे, निकलते समय आरती की हिम्मत देखकर वो फुटपाथ पर चाय की दुकान पर रुके और उसे गले लगा लिया।

दो साल से संभाल रही पिता की चाय की दुकान


- आरती ने बताया, ''मां माया गुप्‍ता और पिता मराछू गुप्‍ता बीमार रहते हैं। दो छोटे भाईयों विकास और कुश की जिम्मेदारी भी मुझपर है।''
- ''किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाए बीमार पिता की फुटपाथ पर चलने वाली चाय की छोटी सी दुकान की बागडोर करीब दो साल से संभाल रही हूं।''
- ''पिता जी के पैरो में काफी दर्द रहता है, वो देर तक बैठ और खड़े नहीं रह सकते।''

40 हजार रुपए की दी स्कॉलरशि‍प


- बता दें, आरती बीकॉम कर चुकी है और सुबह से लेकर शाम तक चाय की दुकान पर मेहनत के बाद भी पढ़ाई को लेकर उसका हौसला नहीं टूटा।
- पैसों की वजह से आगे की पढ़ाई बीटीसी में एडमिशन ने भविष्य में रुकावट डाल दी थी।

- कुछ दिनों पहले मनोज सिन्हा के पीआरओ सिद्धार्थ राय को इस बात की जानकारी हुई, उन्होंने तत्काल रेल मंत्री तक बात को पहुंचाया। स्कॉलरशिप के जरिए 40 हजार रुपए का चेक मिला, जिससे एडमिशन ले पाईं।

- शनिवार को मनोज सिन्हा खुद आरती से मिलने और हाथों की चाय पीने पहुंच गए।

छोटे भाई भी काम में बटाते हैं हाथ

- भाई विकास ने बताया, ''मैं और मेरा भाई कुश केन्‍द्रीय विद्यालय में पढ़ते हैं और स्‍कूल जाने से पहले और आने के बाद दुकान पर अपनी बहन का हाथ बटाते हैं।''

- रेल राज्‍य मंत्री के लोकल पीआरओ सिद्धार्थ राय ने बताया, ''पढ़ाई में टॉपर छात्रा पर लोगों के जरिए रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा की नजर पड़ी। बेटी के भविष्य और पढ़ाई के प्रति लगन देख कर उन्होंने मदद का भरोसा दिया।''
- ''मनोज सिन्हा ने आरती की बीटीसी की फीस के लिए 40 हजार रुपए की आर्थिक सहायता ही नहीं दिलाई, बल्कि बेटी के आग्रह पर बगैर किसी प्रोपेगंडा के उसकी चाय की दुकान पर हौंसला बढ़ाने भी पहुंचे।''
- ''उन्होंने उसे भरोसा दिलाया कि उसकी शिक्षा में कोई रुकावट नही आने दी जाएगी।''

मनोज स‍िन्हा ने पी छात्रा के हाथों से बने चाय। मनोज स‍िन्हा ने पी छात्रा के हाथों से बने चाय।
पिता के बीमार होने पर दो साल से काम संभाल रही है बेटी। पिता के बीमार होने पर दो साल से काम संभाल रही है बेटी।
कड़ी मेहनत कर बीमार मां-बाप और छोटे भाईयों की परव‍र‍िश कर रही आरती। कड़ी मेहनत कर बीमार मां-बाप और छोटे भाईयों की परव‍र‍िश कर रही आरती।
आरती के छोटे भाई भी काम में बंटाते हैं हाथ। आरती के छोटे भाई भी काम में बंटाते हैं हाथ।
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मनोज स‍िन्हा ने फुटपाथ पर चाय बेचने वाली छात्रा को लगाया गले।मनोज स‍िन्हा ने फुटपाथ पर चाय बेचने वाली छात्रा को लगाया गले।
मनोज स‍िन्हा ने पी छात्रा के हाथों से बने चाय।मनोज स‍िन्हा ने पी छात्रा के हाथों से बने चाय।
पिता के बीमार होने पर दो साल से काम संभाल रही है बेटी।पिता के बीमार होने पर दो साल से काम संभाल रही है बेटी।
कड़ी मेहनत कर बीमार मां-बाप और छोटे भाईयों की परव‍र‍िश कर रही आरती।कड़ी मेहनत कर बीमार मां-बाप और छोटे भाईयों की परव‍र‍िश कर रही आरती।
आरती के छोटे भाई भी काम में बंटाते हैं हाथ।आरती के छोटे भाई भी काम में बंटाते हैं हाथ।
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