--Advertisement--

400 सालों की हिस्ट्री तोड़ी इन लड़कियों ने, जो काम करते थे पुरुष अब करती हैं ये

चंदन के ऑयल में गोल्डन एश मिलाकर नेचुरल कलर तैयार किया जाता है।

Danik Bhaskar | Dec 17, 2017, 05:19 PM IST
लड़कियां पढ़ाई के साथ इस हुनर को भी दिलचस्पी से सीख रहीं हैं। लड़कियां पढ़ाई के साथ इस हुनर को भी दिलचस्पी से सीख रहीं हैं।

वाराणसी. यहां के गायघाट पर कुछ लड़कियां और महिलाएं ऐसा आर्ट सिख रही है, जो मुगलकाल के 400 वर्षो से केवल पुरुष करते आ रहे हैं। इस आर्ट का नाम है गुलाबी मीनाकारी। इसमे चंदन के ऑयल में गोल्डन एश मिलाकर नेचुरल कलर तैयार किया जाता है। इसका पूरा वर्क चांदी पर होता है। लड़कियां पढ़ाई के साथ इस हुनर को भी दिलचस्पी से सीख रहीं हैं। "टफ काम है ये"


- रोशनी ने बताया वो बीकॉम की स्टूडेंट है और लॉकेट पर मीनाकारी सीख चुकी हैं। परिवार में पहले लोग काम करते थे, लेकिन अब दूसरे बिजनेस में लग गए हैं। बहुत मुश्किल काम है, कई बार तो हाथ तक जल गया।
- निकिता सिंह ने बताया कि बहुत ही डिफिकल्ट काम है ,नया चीज सीखने में काफी इंज्वाय कर रहे हैं। मैं पोस्ट ग्रेजूएशन कर चुकी हूं, अब ये आर्ट सीखकर दूसरी महिलाओं को सिखाऊंगी।
- गुलाबी मीनाकारी के सीनियर ट्रेनर उमा किशोर पाठक ने बताया कि ये बहुत हार्ड वर्क है। इसको पुरुष ही करते आए हैं। ये काम अब कई परिवारों में बंद हो चुका था। परिवार वालों को समझाया गया मीनाकारी धरोहर है। इसे सीखकर पैसा कमाने के साथ 400 वर्षो पुराने आर्ट को नए तरीके से जीवित किया जा रहा है।
- वहीं, कारीगर कुंज बिहारी ने बताया चन्दन के ऑयल में गोल्डन एश मिलाकर कलर तैयार किया जाता है (नेचुरल यही आर्ट है )। पूरा वर्क चांदी पर होता है। 1200 डिग्री तापमान पर अलग-अलग सांचों को पकाया जाता है। इसमें हर पार्ट को अलग-अलग बनाया गया है ,बाद में सभी को ऐसेमबेल किया गया है। 400 साल पहले मुगलकाल में ये कला विकसित हुई थी। गुलाबी मीनाकारी को देश की बौद्धिक सम्पदा अधिकार का दर्जा 2015 में हासिल हुआ।​

चन्दन के ऑयल में गोल्डन एश मिलाकर कलर तैयार किया जाता है। चन्दन के ऑयल में गोल्डन एश मिलाकर कलर तैयार किया जाता है।
इसका पूरा वर्क चांदी पर होता है। इसका पूरा वर्क चांदी पर होता है।
रोशनी ने बताया वो बीकॉम की स्टूडेंट है और लॉकेट पर मीनाकारी सीख चुकी है। रोशनी ने बताया वो बीकॉम की स्टूडेंट है और लॉकेट पर मीनाकारी सीख चुकी है।
गायघाट पर लड़कियां और महिलाएं ये आर्ट सिख रही हैं। गायघाट पर लड़कियां और महिलाएं ये आर्ट सिख रही हैं।