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एक श्राप से टेढ़ा हो गया ये मंदिर, साल के 4 महीने कोई नहीं जा सकता अंदर

DainikBhaskar.com 'शानदार Inडिया' सीरीज के तहत देश के जलमग्न मंदिरों से जुड़े इंटरेस्टिंग फैक्ट्स बता रहा है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 27, 2018, 11:09 AM IST

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    रत्नेश्वर महादेव मंदिर का टेढ़ा होना अब तक एक रहस्य है।

    वाराणसी.काशी विश्वनाथ मंदिर के पास गंगा किनारे स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर को देख आम लोग यही सोचते होंगे कि शायद ये मंदिर किसी भूकंप के झटके या फिर निर्माण की खामी की वजह से टेढ़ा है, लेकिन इसके पीछे एक अलग ही कहानी है। बताया जाता है कि एक मां के श्राप से मंदिर न सिर्फ टेढ़ा है, बल्कि साल के 4 महीनों तक पानी में डूबा भी रहता है। DainikBhaskar.comअपने रीडर्स को 'शानदार Inडिया' सीरीज के तहत देश के कुछ ऐसे ही जलमग्न मंदिरों से जुड़े इंटरेस्टिंग फैक्ट्स बता रहा है।

    रत्नेश्वर महादेव मंदिर (वाराणसी)

    - तीर्थ पुरोहित भुवनेश्वर मिश्रा बताते हैं कि 15वीं शताब्दी में राजा मान सिंह के सेवक ने अपनी मां रत्ना के लिए मंदिर बनवाया था। निर्माण के बाद जब सेवक अपनी मां को मंदिर दिखाने ले गया तो उसने कहा- मां मैंने तेरे लिए मंदिर बनवाया है। इसके साथ ही तेरे दूध का कर्ज चुकता हुआ।

    - ऐसा कहा जाता है कि रत्ना की नजर पहले जहां पड़ी, वहीं से मंदिर टेढ़ा हो गया। प्रचलित कथाओं के मुताबिक मां रत्ना ने बेटे को जवाब दिया था- बेटा, तूने बुरी नीयत से इस मंदिर का निर्माण करवाया। मां के दूध का कर्ज कोई किसी जन्म में चुकता नहीं कर सकता। मेरा श्राप है कि इस मंदिर में कोई कभी पूजन नहीं कर पाएगा। यहां साल के अधिकतर समय गंगा वास करेंगी, इस वजह से कोई अंदर नहीं जा पाएगा।

    आगे की स्लाइड्स में जानें देश के कुछ ऐसे मंदिर जो पानी में डूबे रहते हैं...

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    वाराणसी के दशाश्वमेध घाट के पास स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर।

    गंगा किनारे जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले रत्नेश्वर महादेव का मंदिर जलमग्न होता है। यही नहीं, यह अपने टेढ़े ढांचे की वजह से भी चर्चाओं में रहता है। भुवनेश्वर मिश्रा बताते हैं -यहां कुछ ब्रिटिश रिसर्चर भी शोध करने आए थे। वे भी मंदिर के टेढ़े होने की वजह नहीं बता सके। यह आज भी रिसर्च का टॉपिक बना हुआ है। - प्रेजेंट में यहां शिव भक्त गर्भ गृह में पूजन के लिए जाते तो हैं, लेकिन अन्य मंदिरों की तरह कभी इसकी साफ-सफाई नहीं हो पाती। यहां हमेशा गंदगी फैली रहती है।

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    स्तंबेश्वर महादेव मंदिर - वडोदरा से 40 मील दूर अरब सागर के तट पर बना है यह मंदिर। हाई टाइड्स के दौरान पूरी तरह जलमग्न हो जाता है।

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    मनसबल ताल में बना 8वीं सदी का शिव मंदिर - श्रीनगर से 32 किमी दूर कश्मीर स्थित मनसबल ताल में 8वीं सदी का शिव मंदिर है। यह मंदिर ताल में आधा डूबा रहता है। अंदर स्थापित शिवलिंग एक फुट ऊंचा है। 2007 में इसे वुल्लार-मनसबल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने संरक्षित करवाया और उसे एक टूरिस्ट स्पॉट के रूप में डेवलप किया।

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    गोबिंद सागर के मंदिर - हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में गोबिंद सागर ताल के बीच बने ये मंदिर महाभारत काल के हैं। ऐसा कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आकर रुके थे। बारिश के मौसम में ये पूरी तरह जलमग्न हो जाते हैं। अन्य सीजन में भी ये आधे ही नजर आते हैं।

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    पोंग डैम के जलमग्न मंदिर - हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में पोंग डैम के निर्माण से कई पौराणिक मंदिर जलमग्न हुए। उन्हीं में शुमार हैं 'बाथू की लड़ी'। ये 9 मंदिरों की श्रृंखला है। ये महाराणा प्रताप सागर में जलमग्न हो जाते हैं।

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Web Title: Special Story Of Underwater Temples In India
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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