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5 आतंकियों को पकड़ बचाई थी सैकड़ों की जान, बच्चों के लिए करता है ये काम

आदित्य मिश्रा | Last Modified - Jan 14, 2018, 10:45 AM IST

सुनील दत्त दुबे ने DainikBhaskar.com से बात की और अपनी इस काम के बारे में जानकारी दी।
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    1996 में मेरी पोस्टिंग मेरठ के लेसाडीगेट थाने में एसओ के तौर पर हुई थी। एक छोटा लड़का रोज थाने के अंदर हमें चाय देने के आया करता था।

    वाराणसी.यूपी के भदोही जिले में थाने में तैनात इंस्पेक्टर सुनील दत्त दुबे टेररिस्ट्स को पकड़कर उनके पास से जमा गोला-बारूद को नष्ट कर सैकड़ों जिंदगियां बचा चुके हैं। वे पुलिस में कार्य करते हुए बीते दो दशकों से लापता बच्चों को तलाशकर उनके घरवालों से मिलाने के लिए 'आपरेशन तलाश' नाम की मुहिम चला रहे हैं। इसमें अभी तक 50 बच्चों को रेस्क्यू और 100 लापता बच्चों को ढूंढकर सही सलामत उनके घरवालों वालों से मिला चुके हैं। वे जिस भी थाने में जाते हैं, अपनी इस मुहिम को आगे बढ़ाना हरगिज नहीं भूलते। सुनील दत्त दुबे ने DainikBhaskar.com से बात की और अपनी इस काम के बारे में जानकारी दी।

    ऐसे शुरू हुई 'आपरेशन तलाश' मुहिम
    - सुनील बताते हैं, ''1996 में मेरी पोस्टिंग मेरठ के लेसाडीगेट थाने में एसओ के तौर पर हुई थी। एक छोटा लड़का रोज थाने के अंदर हमें चाय देने के आया करता था। एक दिन मैंने उसे अपने पास बुलाकर उसके घर के बारे में पूछा। लेकिन वो ठीक से कुछ भी नहीं बता पा रहा था। उसने बस इतना बताया कि मैं छह साल पहले बिहार से भटककर यहां आ गया हूं।''
    - ''मुझे अपने घर के बारे में ठीक से कुछ भी याद नहीं है। उसकी बातें सुनकर ऐसा लगा कि उसे उसके घरवालों से मिलाने में मदद करनी चाहिए। उस टाइम मेरा बच्चे के साथ कुछ ज्यादा ही इमोशनल अटैचमेंट हो गया था।''
    - ''तब सोशल मीडिया का क्रेज नहीं था। मैंने अपने साथियों की मदद से पैंफलेट छपवाए और पेपर में एड दिए। बच्चे के पैरेंट्स सूचना पाकर बिहार से उसे लेने के लिए मेरठ आए। वे बच्चे को पाकर बहुत खुश थे।''
    - उन्होंने मुझे ढेर सारी दुआएं दी। तब पहली बार लगा की कोई पुलिस के काम की तारीफ कर रहा है। वहीं से मन में ये आइडिया आया और मैंने लापता बच्चों की तलाश के लिए 'ऑपरेशन तलाश' मुहिम शुरू कर दी।''

    8 जिलों में ड्यूटी करते हुए किया ऐसा काम
    - ''मैंने मेरठ, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही समेत कुल 8 जिलों के 33 थाने में अभी तक कुल 100 लापता बच्चों को उसके घरवालों को सही सलामत मिलवाया है।''
    - ''पुलिस की नौकरी में रहते हुए ऐसा काम करने पर कई बार मेरे साथ के लोगों ने मेरा मजाक उड़ाया तो कई बार मेरे काम का विरोध भी हुआ, लेकिन मैंने किसी की बातों पर ध्यान नहीं दिया।''
    - ''मैं पहले लापता बच्चों की फोटो लेकर फेसबुक पर भी पोस्ट कर देता था, ताकि उसके बारे में पता चल सके। लेकिन कुछ लोगों ने इस बात का भी विरोध किया। बाद में मैंने ऐसा करना बंद कर दिया।''
    - ''एक बार एक बच्चा घरवालों से नाराज होकर ट्रेन से मुंबई भागकर जा रहा था। मैंने सीसीटीवी फुटेज देखकर उसके घरवालों को उस ट्रेन के बारे में बताया था, जिस ट्रेन से उनका बेटा भागकर मुंबई जा रहा था। घरवाले उस स्टेशन पर पहुंचे तो वहां पर उनका बच्चा उन्हें मिल गया।''

    VC की कही वो बात मुझें आज तक है याद
    - ''मैं जब आगरा यूनिवर्सिटी से एमफिल की पढ़ाई कर रहा था, तब मेरी एचओडी डॉ. प्रतिमा अस्थाना ने एक दिन मुझसे एक बात कही थी वो बात मुझें आज तक याद है। उन्होंने ने कहा- हर मां-बाप चाहते हैं उसका बच्चा फर्स्ट आ जाए, लेकिन कोई पैरेंट्स ये नहीं सोचता कि उसका बच्चा कोई ऐसा काम करे किसी के चेहरे पर मुस्कान आए।''
    - ''ये जो फर्स्ट आने की आदत है, वो हमें अच्छी संस्कृति से दूर ले जा रही है। हमें इस पर विचार करने की जरूरत है कि हम किस ओर जा रहे हैं। आप अच्छी डिग्री से नौकरी तो पा सकते हैं, लेकिन अच्छा काम नहीं कर सकते। हमारा बेसिक लक्ष्य होना चाहिए कि हम लोग प्रत्येक दिन किसी न किसी की मदद जरूर करें।''

    आतंकियों से ऐसे बचाई थी लोगों की जान
    - ''1992 में मेरठ में पीएससी बम कांड हुआ था। आतंकियों ने पीएसी की वैन पर बम फेंका था। उस ब्लास्ट में कई पीएससी वाले घायल हो गए थे। उस रात मैं गश्त कर रहा था। तब मैंने पुलिस के साथ मिलकर उन 5 आतंकियों को पकड़ा था।''
    - ''उनके पास भारी मात्रा में गोला बारूद थे। उसे डिफ्यूज कराकर सैकड़ों लोगों की जान बचाई थी। तब मेरे काम की काफी तारीफ हुई थी। मुझे अवॉर्ड भी मिला था।''
    - ''मैंने एंटी रोमियो टीम में हुलिया बदलकर कई बार मजनुओं को सबक सिखाया है। मैं 50 से ज्यादा बच्चों को रेस्क्यू भी करा चुका हूं।''

    यूपी में हर रोज गायब होते है 8 बच्चे
    - नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं, यूपी में हर रोज औसतन 8 बच्चे लापता होते हैं। इनमें से तीन कभी मिलते ही नहीं है।
    - गायब होने वाले बच्चों में 33 परसेंट लड़कियां हैं। 2015 में जहां 2266 बच्चे लापता हुए थे। वहीं 2016 में ये आंकड़ा बढ़कर 3308 हो गया है।

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Web Title: Special Story On Police Inspector Sunil Dutt Dubey Rescued Children From Eight Districts
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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