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महिला के कमेंट पर इस साइंटिस्ट ने छोड़ी थी जॉब, आज बना मिसाल

डॉ. रजनीकांत 58 हजार से ज्यादा बच्चो को स्कूलों, मदरसों की शिक्षा से जोड़ा है।

अमित मुखर्जी | Last Modified - Jan 16, 2018, 07:03 PM IST

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    डॉ. रजनीकांत बीएचयू में साइंटिस्ट थे।

    वाराणसी (यूपी).मवईया सारनाथ के रहने वाले डॉ. रजनीकांत 58 हजार से ज्यादा बच्चो को स्कूलों, मदरसों की शिक्षा से जोड़ा है। 6000 से ज्यादे बुनकरों तक गवर्मेंट की योजनाओं को पहुंचाया। DainikBhaskar.com आपको बीएचयू के साइंटिस्ट की कहानी बता रहा है। जिसकी लाइफ एक गरीब औरत के एक सवाल ने बदल दी।

    औरत ने पूछा था ये सवाल...

    - बीएचयू के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रजनीकांत ने बताया, ''1993 में मैं भारत सरकार योजना गंगा एक्शन प्लान में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर था। मैं अक्सर सेम्पल लेने दीनापुर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जाता रहता था।''
    - ''एक दिन गांव की एक औरत मिली और बोली की साहब, मैंने एक व्यक्ति से 200 रूपए उधार लिया था। उसे 240 रुपए दे चुकी हूं। उसके बाद भी अभी मूलधन 200 रु. बाकी हैं। क्या सामाजिक प्रदूषण नहीं है क्या?''
    - ''उसकी बात सुनकर मुझे कुछ समझ में नहीं आया। दूसरे दिन मैं वहां गया और उस औरत से बोला- बहुत बड़ा सामाजिक प्रदूषण है, इसे हम और आप लोग मिलाकर दूर करेंगे।''
    - ''उसी के दूसरे दिन मैंने बीएचयू की नौकरी छोड़ पूरी तरह अपनी संस्था ह्यूमन वेलफेयर एशोसिएशन के साथ सामाजिक कार्य करने लगा। दूसरे दिन उसी औरत माधुरी के 200 रूपए से 10 महिलाओ के साथ स्वयं सहायता समूह बैंक बनवाया।''

    7 करोड़ का हो चुका है टर्न ओवर
    - ''48 से ऊपर गांवों से 3500 से ज्यादा महिलाओं को महिला शक्ति संगठन से जोड़ लिया है। जो महिलाएं साहूकारों से कर्ज लेकर खेती किया करती थी। आज सभी महिलाएं अपने दम पर बैंक चलाकर खेती कर 7 करोड़ से ऊपर का टर्न ओवर कर रही है।''
    - ''अपनी बचत को ये महिलाएं हर महीने इस बैंक में जमा करती हैं। जरुरत पड़ने पर इससे लोन भी लेती हैं। इस लोन से महिलाएं पट्टे पर खेत और बगीचे लेकर फल-फूल की खेती करती है और अपने परिवार को चलाती हैं।''
    - ''महाजन 10 फीसदी महीने का ब्याज पर कर्ज देते हैं, मगर यहां ब्याज की दर 2 फीसदी है। संस्था ने अबतक 58 हजार गरीब बच्चों को मदरसों और विद्यालयों के माध्यम से शिक्षा के मुख्यधारा से जोड़ा है।''
    - ''4000 से अधिक लड़कियों ने वोकेशनल ट्रेनिंग लेकर अपना जीवन आगे बढ़ाया है। 5000 से अधिक भूमिहीन और लघु महिला किसानों को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से जोड़कर मजबूत बनाया जा चूका है।''
    - ''6000 से अधिक बुनकरों और शिल्पियों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा चूका है। संस्था के प्रयास से वाराणसी परिक्षेत्र के11 हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों का जीआई पंजीकरण कराकर देश की बौद्धिक संपदा में शुमार किया है।''


    डॉ. रजनीकांत का परिचय
    - डॉक्टर रजनीकांत के पिता लक्ष्मीकांत प्राचार्य थे, इनकी माता चन्द्रकला गृहणी थी। इन्होंने 1983 से 1987 तक चंद्रशेखर आजाद कृषि यूनिवर्सिटी से एमएससी एजी किया।
    - 1988 से 1993 बीएचयू में एसोसिएट प्रोफेसर गंगा एक्शन प्लान भारत सरकार की योजना में कार्यरत रहे। इस दौरान 1991 में ही सामाजिक कारणों और महिलाओ के विकास के लिए ह्यूमन वेलफेयर एशोसिएशन की स्थापना और पंजीकरण करवा चुके थे।

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Web Title: Special Story On Scientist In Varanasi
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