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ये नाव डूबी तो नैय्या पार वरना..निकाह से पहले निभाई जाती है ऐसी परंपरा

कुछ लोग परिवार में शादी के ठीक पहले गंगा में नाव बेड़ा पार लगाने आते हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 02, 2018, 08:00 AM IST
इस परंपरा को निकाह के ठीक पहले रस्म को पूरा किया जाता है। इस परंपरा को निकाह के ठीक पहले रस्म को पूरा किया जाता है।

वाराणसी. यूपी का वाराणसी शहर गंगा-जमुनी तहजीब और परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। DainikBhaskar.com मुस्लिम समाज से जुड़े ऐसी ही एक परंपरा के बारे में बता रहा है, जिसे कुछ लोग परिवार में शादी के ठीक पहले गंगा में नाव बेड़ा पार लगाने आते हैं। कहा जाता है कि बुरी बलाओं से बचने और लाइफ में सक्सेज पाने के लिए कागज की नाव को नदी में बहाने की परंपरा है।

- श्रद्धालु फरीदा बताती हैं- ''हमारे परिवार में शादी है। निकाह के ठीक पहले रस्म को पूरा किया जाता है। रात में जगकर गुलगुला बनाया जाता है। फातिहा पढ़ा जाता है।''
- ''मिट्टी के 4 हांडी खरीदते हैं। इसमें एक में चावल, दूसरे में दलिया, तीसरे में पैसा और चौथे में गुलगुला होता है। लड़की हो या लड़का शादी के बाद बेड़ा पार (लाइफ में सक्सेज) हो जाए। यही कामना होती है। लड़की के परिजनों की ओर से दो और लड़के के परिजनों की तरफ से एक नाव बहाई जाती है।''
- ''नाव कुछ दूर बिना डूबे निकल जाए तो नैया पार समझी जाती है और अगर नाव डूब जाए तो समझा जाता है कि जिंदगी में प्रॉब्लम्स लगी रहेंगी।''इ

प्रकृति से जुड़ी परंपरा है ये
- गयासुद्दीन ने बताया, ''कागज के नाव को बहाया जाता है। अगर कोई बला होती है, तो कट जाती है। ये प्रकृति से जुड़ी परंपरा है।''
- ''बरात से 3-4 घंटे पहले ये रस्म निभाई जाती है। इंसान का शरीर पंचतत्व से मिलकर बना है। वैवाहिक जोड़े को शांति मिले इसके लिए नदी, झील या तालाब में लोग ऐसा करते हैं। परंपरा का इतिहास का काफी पुराना है।''

रात में जगकर गुलगुला बनाया जाता है। फातिहा पढ़ा जाता है। रात में जगकर गुलगुला बनाया जाता है। फातिहा पढ़ा जाता है।
मिट्टी के 4 हांडी खरीदते हैं। इसमें एक में चावल, दूसरे में दलिया, तीसरे में पैसा और चौथे में गुलगुला होता है। मिट्टी के 4 हांडी खरीदते हैं। इसमें एक में चावल, दूसरे में दलिया, तीसरे में पैसा और चौथे में गुलगुला होता है।
लड़की के परिजनों की ओर से दो और लड़के के परिजनों की तरफ से एक नाव बहाई जाती है। लड़की के परिजनों की ओर से दो और लड़के के परिजनों की तरफ से एक नाव बहाई जाती है।
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इस परंपरा को निकाह के ठीक पहले रस्म को पूरा किया जाता है।इस परंपरा को निकाह के ठीक पहले रस्म को पूरा किया जाता है।
रात में जगकर गुलगुला बनाया जाता है। फातिहा पढ़ा जाता है।रात में जगकर गुलगुला बनाया जाता है। फातिहा पढ़ा जाता है।
मिट्टी के 4 हांडी खरीदते हैं। इसमें एक में चावल, दूसरे में दलिया, तीसरे में पैसा और चौथे में गुलगुला होता है।मिट्टी के 4 हांडी खरीदते हैं। इसमें एक में चावल, दूसरे में दलिया, तीसरे में पैसा और चौथे में गुलगुला होता है।
लड़की के परिजनों की ओर से दो और लड़के के परिजनों की तरफ से एक नाव बहाई जाती है।लड़की के परिजनों की ओर से दो और लड़के के परिजनों की तरफ से एक नाव बहाई जाती है।
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