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ये है भारत का अनोखा बैंक, इंटरेस्ट में म‍िलती है मन की शांत‍ि-मुक्ति का द्वार

वाराणसी. महाशिवरात्रि पर काशी के पहले अनोखे बैंक 'ऊं नमः शिवाय' में भक्तों की भीड़ लगी रही।

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2018, 05:21 PM IST
बैंक की शुरुआत 2002 में 6 लोगों द्वारा की गई थी। बैंक की शुरुआत 2002 में 6 लोगों द्वारा की गई थी।

वाराणसी. महाशिवरात्रि पर काशी के पहले अनोखे बैंक 'ऊं नमः शिवाय' में भक्तों की भीड़ लगी रही। इस बैंक में आधार कार्ड और करेंसी नहीं, बल्क‍ि पंचाक्षर (शि‍व मंत्र) जमा क‍िए जाते हैं। इस बैंक की शुरुआत 2002 में 6 लोगों द्वारा की गई थी। 125 करोड़ की आबादी वाले भारत देश के इस बैंक में अब तक 134 करोड़ से ज्यादा पंचाक्षर जमा हो चुके हैं।

बि‍हार से ब्रिटेन तक हैं बैंक के अकाउंट होल्डर

- बैंक के चेयरमैन पवन कुमार ने बताया, बैंक के 10 हजार से ज्यादा अकाउंट होल्डर हैं।

- भक्तों को कर्ज के रूप में नाम और पता नोट करके कॉपी दी जाती है, जिसे वो अपनी श्रद्धा के अनुसार पंचाक्षर लिखकर जमा करते हैं।

- वाइस चेयरमैन राजेंद्र त्रिवेदी ने बताया, बिहार, मुंबई, दिल्ली, हरियाणा, मद्रास, कोलकत्ता, मध्य प्रदेश, राजस्थान के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ब्रिटेन, फ्रांस, मैक्सिको समेत कई देशों के खाता धारक हैं।

कैसे आया 'ऊं नम: शि‍वाय' बैंक का आइडि‍या

- उन्होंने बताया, बैंक की शुरुआत का आइडिया मंदिरों को देखकर आया।

- लोग पन्ने में पंचाक्षर लिखकर छोड़ देते हैं, जो जलाभिषेक‍ या अन्य तरीके से नष्ट हो जाता है। भक्तों की आस्था को बचाने के लिए प्रयास किया गया।

ब्याज के रूप में म‍िलती है मन की शांत‍ि

- बैंक में लोगों को जो ब्याज भी मिलता है, वह भी अनूठा है। इस बैंक में ऊं नमः शिवाय का मन्त्र लिखकर जमा करने से लोगों को मन की शान्ति और मुक्ति के द्वार खुल जाते हैं।

- चेनई से आई अरुणिमा ने बताया, तीन साल पहले वो बाबा विश्वनाथ के दर्शन को आई थी, पति का बिजनेस डूबने से परेशान थी। 1001 पंचाअक्षर का संकल्प लिया था। तीन सालों में 21 हजार से ज्यादा पंचाअक्षर जमा कर चुक हूं। मेरा पूरा परिवार यहां से जुड़ा है।

बैंक के 10 हजार से ज्यादा अकाउंट होल्डर हैं। बैंक के 10 हजार से ज्यादा अकाउंट होल्डर हैं।
भक्तों को कर्ज के रूप में नाम और पता नोट करके कॉपी दी जाती है, जिसे वो अपनी श्रद्धा के अनुसार पंचाक्षर लिखकर जमा करते हैं। भक्तों को कर्ज के रूप में नाम और पता नोट करके कॉपी दी जाती है, जिसे वो अपनी श्रद्धा के अनुसार पंचाक्षर लिखकर जमा करते हैं।
इस बैंक में ऊं नमः शिवाय का मन्त्र लिखकर जमा करने से लोगों को मन की शान्ति और मुक्ति के द्वार खुल जाते हैं। इस बैंक में ऊं नमः शिवाय का मन्त्र लिखकर जमा करने से लोगों को मन की शान्ति और मुक्ति के द्वार खुल जाते हैं।
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बैंक की शुरुआत 2002 में 6 लोगों द्वारा की गई थी।बैंक की शुरुआत 2002 में 6 लोगों द्वारा की गई थी।
बैंक के 10 हजार से ज्यादा अकाउंट होल्डर हैं।बैंक के 10 हजार से ज्यादा अकाउंट होल्डर हैं।
भक्तों को कर्ज के रूप में नाम और पता नोट करके कॉपी दी जाती है, जिसे वो अपनी श्रद्धा के अनुसार पंचाक्षर लिखकर जमा करते हैं।भक्तों को कर्ज के रूप में नाम और पता नोट करके कॉपी दी जाती है, जिसे वो अपनी श्रद्धा के अनुसार पंचाक्षर लिखकर जमा करते हैं।
इस बैंक में ऊं नमः शिवाय का मन्त्र लिखकर जमा करने से लोगों को मन की शान्ति और मुक्ति के द्वार खुल जाते हैं।इस बैंक में ऊं नमः शिवाय का मन्त्र लिखकर जमा करने से लोगों को मन की शान्ति और मुक्ति के द्वार खुल जाते हैं।
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