Hindi News »Uttar Pradesh »Varanasi» Unique Tradition For Salvation At Manikarnika Ghat

एक ऐसा स्थान, जहां मनाया जाता है 'मौत का उत्सव'

वाराणसी. काशी के मणिकर्णिका घाट का महाश्मशान एक मात्र ऐसा स्थल है, जहां मौत को उत्सव माना जाता है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 08, 2018, 07:06 PM IST

  • एक ऐसा स्थान, जहां मनाया जाता है 'मौत का उत्सव'
    +4और स्लाइड देखें
    दाह संस्कार करने वाला शख्स चिता की आग ठंडा करने से ठीक पहले काठ (अंगुली) से 94 लिखता है।

    वाराणसी. काशी के मणिकर्णिका घाट का महाश्मशान एक मात्र ऐसा स्थल है, जहां मौत को उत्सव माना जाता है। DainikBhaskar.com यहां से जुड़े एक रहस्य को बता रहा है, जिसमें दाह संस्कार करने वाला शख्स चिता की आग ठंडा करने से ठीक पहले काठ (अंगुली) से 94 लिखता है।

    ताकि मोह माया से जाने वाले को मुक्ति मिल जाए

    - अंतिम क्रिया कर्म के दौरान परंपरा के अनुसार 94 लिखकर शिव से प्रार्थना की जाती है कि मुक्ति मार्ग स्वर्ग को जाए, फि‍र पानी से भरा घड़ा उल्टा करके चिता पर फोड़ते हुए निकल जाते हैं। इस दौरान मुड़कर नहीं देखना चाहिए, ताकि मोह माया से जाने वाले को मुक्ति मिल जाए।
    - चिता की आग को ठंडा करने के लिए कुश या फिर बाएं हाथ के अंगूठे से 94 लिख दिया जाता है, जिससे मरने वाला प्रेत न बन जाए। 94 वो मुक्ति का मंत्र है, जिसे शंकर खुद ग्रहण करते हैं।

    शि‍व को समर्प‍ित क‍िए जाते हैं 94 गुण

    - पं. रजनीश तिवारी ने बताया, ''इंसान में अगर 100 गुण हो तो वो सर्व गुण संपन्न हो जाता है। काशी में शव ही शिव है, इसका मतलब है, प्रभु आपने जो 94 गुण दिए थे वो आपको समर्पित करते हैं।''

    - स्थानीय निवासी और कुछ दिन पहले मां का दाह संस्कार करने वाले विकास खन्ना ने बताया, ''6 बातें (जीवन, मरण, यश, अपयश, लाश, हाान‍ि) किसी इंसान के हाथ में नहीं होती हैं। 94 गुण इंसान के हाथों में होते हैं, जिन्हे 100 गुण मिले वो महापुरुष, सिद्ध पुरुष बनता है।

    रोज जलती हैं 140 डेडबॉडी


    - मशान नाथ मंदिर के मैनेजर गुलशन कपूर के मुताबिक, मणि‍कर्णि‍का घाट पर एवरेज रोज 100 से 140 डेडबॉडी जलती हैं।
    - दाह संस्कार यहां 9, 5, 7, 11 मन लकड़ी से किया जाता है। एक मन में 40 किलो होता है।
    - पंच पल्लव आम, नीम, पीपल, बरगद और पाकड़ की लकड़ियों से चिता जलती है। ऊपर से छोटा चंदन का लकड़ी भी रखा जाता है। रोज करीब चार हजार किलो लकड़िया तीर्थ पर जलती हैं।

  • एक ऐसा स्थान, जहां मनाया जाता है 'मौत का उत्सव'
    +4और स्लाइड देखें
    अंतिम क्रिया कर्म के दौरान परंपरा के अनुसार 94 लिखकर शिव से प्रार्थना की जाती है कि मुक्ति मार्ग स्वर्ग को जाए।
  • एक ऐसा स्थान, जहां मनाया जाता है 'मौत का उत्सव'
    +4और स्लाइड देखें
    94 वो मुक्ति का मंत्र है, जिसे शंकर खुद ग्रहण करते हैं।
  • एक ऐसा स्थान, जहां मनाया जाता है 'मौत का उत्सव'
    +4और स्लाइड देखें
    मणि‍कर्णि‍का घाट पर एवरेज रोज 100 से 140 डेडबॉडी जलती हैं।
  • एक ऐसा स्थान, जहां मनाया जाता है 'मौत का उत्सव'
    +4और स्लाइड देखें
    दाह संस्कार यहां 9, 5, 7, 11 मन लकड़ी से किया जाता है। एक मन में 40 किलो होता है।
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Varanasi News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Unique Tradition For Salvation At Manikarnika Ghat
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Varanasi

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×