वाराणसी

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इसे लोग बुलाते हैं दूसरा गोल्डन टेम्पल, PM मोदी-केजरीवाल पा चुके है लंगर

31 जनवरी को संत रविदास जयंती है। DainikBhaskar.com आपको उनकी जन्म स्थली श्री गोवर्धन से जुड़ा एक फैक्ट बता रहा है।

Dainik Bhaskar

Jan 28, 2018, 05:21 PM IST
untold story on Sant Ravidas Jayanti

वाराणसी(यूपी). 31 जनवरी को संत रविदास जयंती है। DainikBhaskar.com आपको उनकी जन्म स्थली श्री गोवर्धन से जुड़ा एक फैक्ट बता रहा है। काशी में एक अनोखा श्री रविदास मंदिर है, जहां साढ़े 200 किलों से ऊपर स्वर्ण से है। श्री हरिमंदिर साहिब के बाद लोग इसे दूसरा गोल्डन टेम्पल बुलाते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने यहां आकर मत्था टेक और लंगर खा चुके हैं। मंदिर के मैनेजर ज्ञान चंद ने बताया, ''मंदिर 1965 में बना है। इसमें लगी गोल्डन पालकी का इनॉग्रेशन 2008 में यूपी की तत्कालीन सीएम मायावती ने किया था। यूरोप के भक्तों ने बनवाई स्वर्ण पालकी...


- मंदिर के मैनेजर ज्ञान चंद बताते हैं, ''मंदिर की स्थापना 1965 में हुई है। इसका प्रबंधन श्री गुरु रविदास जन्म स्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट करता है।''
- ''1994 में मंदिर के अंदर पहला स्वर्ण कलश उस वक्त के 108 संतों ने एक साथ मिलकर चढ़ाया था।''
- ''2008 में यूरोप के भक्तों ने मिलकर पंजाब के जालंधर में 130 किलो कि स्वर्ण पालकी बनवाई। जिसका इनॉग्रेशन यूपी की तत्कालीन सीएम मायावती ने किया था।

- ''पालकी को 20 से ऊपर कारीगरों ने मिलकर डेढ़ महीने से ज्यादे का समय देकर बनाया था। इसके बाद दूसरे भक्तों ने मिलकर मंदिर को 32 स्वर्ण कलशों से सजाया।''
- ''2012 में भक्तों ने जालंधर में करीब 10 से ज्यादा कारीगरों से 25 दिन के अंदर 35 किलो स्वर्ण का दीपक बनवाया। इस अखंड ज्योति को जलाने के लिए एक बार में एक टन घी लगता है।''
- ''35 किलो सोने का छत्र संत रविदास जी के ऊपर लगाया है। इसे भी जालंधर में ही बनवाया गया है।''

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