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चलती ट्रेन में यहां से आया शादी का IDEA , दूल्हे ने आखिरकार खोल ही दिया वो राज

श्री श्री रविशंकर ने चलती ट्रेन में कराई शादी।

Danik Bhaskar | Mar 03, 2018, 04:00 PM IST

भदोही (यूपी). शहर के चकतोपुर न्यू पीएचसी में फार्मासिस्ट के पद पर तैनात सचिन और ज्योत्सना ने बुधवार को चलती ट्रेन में शादी की। फतेहपुर जिले के चंदनपुरा गांव की ज्योत्सना लखनऊ में सेंट्रल एक्साइज में पोस्टेड हैं। श्री श्री रविशंकर ओम अनुग्रह यात्रा पर गोरखपुर से लखनऊ ट्रेन से जा रहे थे। दोनों ही उनके शिष्य हैं। DainikBhaskar.com ने दूल्हा सचिन से बातचीत करके यह पता करना चाहा कि आखिर ये आइडिया आया कहां से। होटल में आया आइडिया, दोस्त ने श्री श्री तक पहुंचाई मेरी बात...

- दूल्हे ने बताया, हमारी शादी 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन होना है। उससे पहले गोरखपुर में मैंने होटल रूम में अपने दोस्त, रूम पार्टनर से चर्चा की। गुरूजी शादी में शिष्यों के साथ आएंगे या नहीं, यह असमंजश की स्थिति थी। इसलिए मैने सोचा क्यूं न ट्रेन में गुरू के आशीर्वाद के साथ शादी कर ली जाए।

- मैंने ज्योत्सना से भी इसकी चर्चा की। इसके बाद, उसके छोटे भाई पवन से बात की। हम लोगो में कौन गुरूजी के सामने यह बात रखेगा, यह समझ में नहीं आ रहा था। दोस्त संवर्त मिश्रा ने चलती ट्रेन में गुरूजी को हम दोनों की इक्षा बताई। गुरू ने हमारी बात को सुना और कहा- देश के लिए बिना दहेज़, बिना खर्च की शादी मिशाल बनेगी और मैं खुद करवाऊंगा।

- इतना कहकर गुरूजी चले गए। 50 मिनट तक हम सभी सोचते रहे कि पता नहीं क्या होगा। गुरूजी कबतक आएंगे। इतने में ज्योत्सना को उसकी एक फ्रेंड ने साड़ी पहनने को कहा। ज्योत्सना दोस्त की साड़ी लेकर एससी फर्स्ट में एक परिचित के कैबिन में गई और तैयार होकर आई। गुरूजी आये और बोले- माला फूल लाओ। ट्रेन में ही लोगो ने गांठ-बांधा और वरमाला हम दोनों ने एक-दूसरे को पहनाया। इसके बाद, बधाइयों का दौर शुरू हो गया।

- सचिन ने बताया, नवंबर 2017 में ज्योत्सना का भाई पवन मेरे घर कौशांबी आया था। आर्ट ऑफ लिविंग के एक साथी ने हमारी शादी की चर्चा की थी। 27 नवंबर 2017 को 20 मिनट के लिए हमारी मुलाकात लखनऊ के एक रेस्ट्रोरेंट में हुई। हम दोनों ने एक-दूसरे का नाम पूछा और 18 मिनट गुरूजी की बात करते हुए मुलाकात ख़त्म हुई।

- 18 अप्रैल को फिर से ज्योत्सना के घर फतेहपुर जाकर शादी होगी। सात्विक तरीके से पत्तल और मिटटी के बर्तन में खान-पान होगा। सभी बाराती जमीन पर बैठकर खाएंगे।

- मेरी शुरूआती शिक्षा गांव से हुई थी। मेरठ से फार्मेसी और ग्रेजुएशन कानपुर यूनिवर्सिटी से किया। नवंबर 2016 से जॉब कर रहा हूं। पिताजी नरेंद्र पाल सिंह कॉपरेटिव में सचिव पद पर है। ज्योत्सना ने फतेहपुर से एमसी माइक्रोबायोलॉजी से किया है। 2008 से मैं और 2015 से ज्योत्सना गुरूजी से जुड़े हैं।