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इस एक्टर ने 802 रुपए महीने से शुरू की थी जॉब, शेयर की इंटरेस्टिंग बातें

एक्टर गोविंद नामदेव इन दिनों 'जंक्शन वाराणसी' की शूटिंग के लिए काशी पहुंचे हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 06, 2017, 12:36 PM IST

इस एक्टर ने 802 रुपए महीने से शुरू की थी जॉब, शेयर की इंटरेस्टिंग बातें
वाराणसी.115 से ज्यादा फिल्मों में एक्टिंग कर चुके गोविंद नामदेव इन दिनों 'जंक्शन वाराणसी' की शूटिंग के लिए काशी में हैं। DainikBhaskar.com से खास बातचीत में उन्होंने अपनी लाइफ से जुड़ी इंटरेस्टिंग बातें शेयर की। उन्होंने बताया, ''साल 1979 में स्ट्रगल के दौर में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) दिल्ली की एक एकेडमी में पहली बार 802 रुपए महीने की नौकरी शुरू की थी।
Q. अपनी लव लाइफ के बारे में कुछ शेयर करें?
A. जब मैं एनएसडी में था, उन दिनों एकेडमी में बच्चों का समर कैम्प लगा था। मथुरा की रहने वाली सुधा, दिल्ली में अपनी बहन के घर घूमने आई थीं। वह रोज समर कैम्प में अपनी भतीजी के साथ आती थीं। 1980 में पहली बार मुलाकात हुई और धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ गई। अगले साल 1981 में हम जीवन साथी बन गए।

Q. अपने और फैमली के बारे कुछ बताएं?
A. मैं सागर का रहने वाला हूं, पिता श्रीराम प्रसाद भगवान के कपड़े सिलने के साथ रामायण गाने का काम करते थे। मैं भी उनके साथ काम करता था। 7वीं तक की पढ़ाई के बाद मैं दिल्ली आ गया।
Q. स्ट्रगल में पढ़ाई कैसे पूरी की?
A. दिल्ली में आठवीं के एग्जाम में स्कूल टॉप किया तो स्कॉलरशिप मिलने लगा। आगे की पढ़ाई स्कॉलरशिप से ही की।
Q. एक्टिंग के क्षेत्र में कैसे आए?
A. साल 1972 में मैंने एनएसडी ज्वाइन किया, जहां अनुपम खेर, करन राजदान, सतीश कौशिक साथ पढ़े।
Q. पहली फिल्म कैसे मिली और मेहनताना कितना मिला?
A. 1978 में एनएसडी से पासआउट के बाद सभी साथी मुंबई चले गए। मुझे लगा अभी कच्चा हूं, तो ड्रामा प्ले करना शुरू किया। 11 साल तक जर्मनी, पोलैंड ,लंदन तक इंटरनेशनल शो किए।
Q. फिल्म में काम कब और कैसे मिला?
A. 1990 में मुंबई गया और जितना ड्रामा प्ले किया, पिक्टोरियल बनाकर कर गया था। तीन महीने में ही पहली फिल्म परेश रावल के साथ केतन मेहता की 'सरदार पटेल' मिली। उसी दौरान पहलाज निहलानी से मुलाकात हुई। डेवि‍ड धवन फिल्म शोला और शबनम बना रहे थे। मुझे काम मिला और पहली फिल्म 1992 में रिलीज हुई। सरदार पटेल 1994 में आई।
Q. पहला फिल्म का मेहनताना कितना मिला?
A. 50 हजार रुपए उस समय मिला, क्योंकि थियेटर ने मंझा कलाकार बना दिया था।
Q. सबसे यादगार कैरेक्टर कौन सा था?
A. विरासत और प्रेम ग्रंथ बड़ी फिल्म थी। प्रेम ग्रंथ प्रीमियर में पहली बार इंडस्ट्री के बड़े कलाकार ऋषि कपूर उनकी फैमली, विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन सभी से मुलाकात हुई। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
Q. पिताजी क्या चाहते थे, फि‍ल्म इंडस्ट्री के बारे में क्या कहते थे?
A. वो चाहते थे कि उनका काम आगे बढ़ाऊं। मैं उनके साथ मजीरा बजाता था।
Q. यादगार कैरेक्टर जो करना चाहते हों?
A. हिटलर का किरदार बहुत शानदार है। वो पेंटर, आर्टिस्ट, कवि‍, लवर सभी कुछ था उसके अंदर। कहानी मिले तो करूंगा।
Q. बाहुबली ने फिल्मों का ट्रैक मोड़ा क्या?
A. दर्शकों की पसंद पता चली। मुगल-ए-आजम, ताजमहल जैसी फिल्मे भी बड़ी फिल्में थीं।
Q. हिस्ट्री के साथ फिल्मों में छेड़खाड़ ठीक है क्या?
A. नहीं होना चाहिए, तथ्य सबके सामने सटीक रखना चाहिए।
Q. देश की पॉलिटिक्स सही दिशा में है?
A. रील लाइफ, रियल लाइफ में आ गई है। नान प्रोफेशनल पॉलिटि‍क्स ठीक नहीं है।
Q. विलेन क्यों बन गए?
A. फिल्म में तीन लिड रोल होते है, पहला हीरो दूसरा हिरोइन और विलेन। सटीक बैठा और बन गया। पब्लिक ने पसंद किया। दिलीप कुमार आइडियल हैं।
Q. इस फिल्म की कहानी क्या है?
A. कहानी में मैं डॉक्टर का किरदार निभा रहा हूं, जो फ्री में लोगों का इलाज करता है। बेटा मेंटली डिस्टर्ब है। कहानी इमोशनल और फैमिल ड्रामा है।
Q. न्यूकमर को क्या मैसेज देंगे ?
A. जल्दीबाजी न करें, अपने को मांझे। अपनी योग्यता को खुद चेक करें। डायलॉग देखे और बोलना सीखें।
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